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धर्म नगरी खैरा-सेतगंगा मे गुरू घासीदास जंयती की रही धुम। निकाले गये कलश व शोभायात्रा जगह जगह हुआ भब्य स्वागत

  • devendra yadav birth day

मुंगेली / गुरू घांसीदास जयंती धर्म नगरी खैरा-सेतगंगा में अत्यंत धूमधाम आखाड़े, गाजे,बाजे,धुमाल के साथ हर्षोल्लाससे सतनामी समाज के अनुयायियों के द्वारा भव्य जोड़ा जैतखाम का आरती उतार कर श्वेत पालो को चढ़ाकर मनाई गई। प्रात काल 10 बजे से गुरु पूजा की हुई।गुरु पूजन के पश्चात दोपहर 3 बजे से कलश यात्रा एवं शोभायात्रा निकली।शोभायात्रा खैरा-सेतगंगा स्थित जैतखाम से निकाली गई खैरा-सेतगंगा,तालम,फॉस्टरपुर मुख्य मार्ग होते हुए बाबा गुरू घांसी दास मंदिर में पहुँची।शोभायात्रा में ध्वज व कलश को लेकर समाज के प्रतिष्ठित लोग आगे बढते रहे। सामाजिक कन्याओं और महिलाओंकी कलश यात्रा आकर्षकव श्रद्धा का केंद्र रहा।वही युवा वर्ग सामाजिक गीतों पर पंथी नृत्य करते हुए शौर्य प्रदर्शन भी किये।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले रहे।अध्यक्षता पूर्व विधायक मुंगेली चंद्रभान बारमते ने की।विशिष्ट अतिथि अनुसूचित जाति प्राधिकरण सदस्य रत्नावली कौशल, जिला पंचायत सदस्य रजनी सोनवानी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मानिक सोनवानी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जैत राम खांडे,जनपद पंचायत सदस्य जितेंद्र भास्कर,भुवन ओगरे, राजेंद्र भास्कर, फागुराम धृतलहरे,भगत राम दिवाकर, विष्णु जायसवाल, जय देवांगन, केशव सिंह परिहार, नरेंद्र जायसवाल, उत्तरा अंचल, भरत नवरंग, श्याम लाल मोहले, कुंजन सतनामी, भागवत कुर्रे, परमेश्वर कुर्रे, कलीम कंवर,जलेश्वर यादव, निरंजन तोडर रहे।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री मोहले ने कहा कि बाबा गुरु घांसी दास सत्य और अहिंसा के पुजारी थे।बाबा के विचारों को आत्म सात कर हम अपना जीवन धन्य कर सकते हैं उन्होंने सत्य की आराधना कर लोगों को सात्विक जीवन जीने का संदेश दिया।अध्यक्षता के आसंदी पर बैठे श्री बारमते नेकहा कि बाबा गुरु घांसी दास कुरूतियों के विरोधी थे और सत्य के पुजारी थे उन्होंने मनखे मनखे एक समान का सूत्र देकर सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया।विशिष्ट अतिथि श्री मति कौशल ने कहा कि बाबा का संदेश आज भी प्रासंगिक है।जब जब समाज में विकृति फैली है तब तब समाज को शिक्षा देने संत अवतरित हुए हैं जिन्होंने समाज को सनदेश देकर विकृतियों और कुरीतियों का नाश किया है।श्री मानिक सोनवानी ने कहा कि बाबा गुरु घांसी दास जी का जन्म ऐसे समय में हुआ जब समाज में छुआछूत, ऊंचनीच, झूठ कपट का बोलबाला था।बाबा ने ऐसे समय में समाज को एकता, भाईचारा, दया, करुणा, परोपकारव समरसता का संदेश दिया बाबा जी सत्य के प्रति अटूट आस्था की वजह से ही इन्होंने बचपन में कई चमत्कार किये जिसका लोगों में गहरा प्रभाव पड़ा बाबा जी ने लोगों को सात्विक जीवन जीने की प्रेरणा दी । और रात मे सतनाम भजन,सतनाम लीला, पंथी नृत्य का आयोजन हुआ जिसमे पंथी नृत्य मे प्रथम स्थान विचारपुर पंथी पाट्री रहा जिसे 11000 रुपये नगद मोहले के द्वारा दिया गया दिवतीय पंथी पाट्री मुडिया रहा जिसे 7000 नगद इनाम सोनवानी के द्वारा दिया तृतीय इनाम लालपुर पंथी पाट्री जिसे 5000 भास्कर के द्वारा दिया गया बाकी सभी पाट्री को संतवना इनाम दिया गया । कार्यक्रम को सफल आयोजन बनाने के लिये अखिलटोन्डर,शत्रुहन,पुनाराम,जितेंद्र भास्कर,सीताराम, निरजंन टोन्डर, हीरादास, बाबूदास, बालक,ओमप्रकाश, पुष्पाराज,अनंत, धमैन्द्र जांगड़े, सुखचंद, रहे

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