बोड़ला / शौर्यपथ /
नगर पंचायत बोड़ला में काँग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा पंचायत परिसर में राजीव गाँधी की पुण्यतिथि मनायी गयी । नगर पंचायत अध्यक्ष सावित्री रामचरण साहू जी ने राजीव जी के तैलयचित्र पर माल्यापर्ण कर आगे उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । श्रीमती साहू जी कहा कि भारत रत्न राजीव गांधी एक ऐसे कर्मयोगी रहे हैं, जिनकी जीवन यात्रा में मानवता, सहजता, सरलता, निष्छलता के कई मुकाम रहे हैं। राष्ट्रहित उनके चिंतन के केन्द्र में था। सर्वधर्म सद्भाव उनके मानस में रचा-बसा था।
राजीव गांधी के व्यक्तित्व में परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय था। नियति ने समय के कैनवास पर उन्हें बहुत कम समय बख्शा, लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने इतिहास के कैनवास पर अपनी अनूठी और अमिट छाप छोड़ी। विलक्षण प्रतिभा के धनी राजीवजी में सादगी और दृढ़ता का आदर्श समावेश था। बेहद शांत और गंभीर प्रवृत्ति के राजीव गांधी का संपूर्ण जीवन सत्यम्, शिवम, सुंदरम् का मूर्तिमान रूप था।
एक अनोखा व्यक्तित्व
राजीव गांधी राजनीति में सतत् संवाद के पक्षधर थे। जापान यात्रा के दौरान श्रीमती पुष्पा भारती को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था "राजनीति जनता से संवाद की राजनीति हो।" राजीव जी मानते थे कि बिना संवाद के विश्वास पैदा नहीं हो सकता और बिना विश्वास के राजनीति नहीं चल सकती। इसी पारस्परिक संवाद की राजनीति को अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने पंजाब, असम और मिजोरम समझौते किए, जिससे इन प्रदेशों में वर्षों से चल रही उथल-पुथल, अशांति एवं हिंसक गतिविधियों पर विराम लगा।राजीव गांधी ने विषम परिस्थितियों में देश के प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभाला। राजीव गांधी के साथ करोड़ों भारतीयों के मन में आधुनिक भारत की आशाएं, आकांक्षाएं और सपने जाग उठे। राजीव गांधी ने एक जननेता और प्रधानमंत्री के रूप में देश को पुननिर्माण एवं विकास के पथ पर अग्रेषित किया। उन्होंने भारत को आधुनिक, खुशहाल और एक मजबूत राष्ट्र बनाने में विशेष भूमिका निभाई।
सबकी सुनना और सबको साथ लेकर चलना राजीवजी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विषेशता थी। वे आमजन की समस्याओं को बड़े ध्यान से देखते थे और फिर सही दिशा-निर्देश देकर उसको सुलझाने का काम करते थे, यही उनकी कार्यशैली थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सूचना क्रांति की आधारशिला रखी।राजीव जी संवाद का माहौल पैदा करना जानते थे। उन्हें बातचीत में यकीन था।
मानवीय और संवेदनशील राजनेता होने के कारण पीडि़त मानवता की सेवा उनकी प्राथमिकता थी। भोपाल गैस त्रासदी की घटना के तुरंत बाद चुनाव प्रचार छोड़कर वे भोपाल पहुंचे। उन्होंने चुनाव प्रचार की बजाए मानवता की सेवा को प्राथमिकता दी। गैस पीडि़तों के दुख-दर्द पर मरहम लगाया। भोपाल गैस पीडि़तों को भी इस बात का अहसास हुआ कि उनका भी कोई हमदर्द है जिसे उनकी चिंता है।
राजीव जी ने अनाथ बच्चों, असहाय बुजुर्गो और रोती हुई महिलाओं को सांत्वना दी, उन्हें धीरज बंधाया। वे तुरंत भोपाल के हमीदिया अस्पताल में गैस पीडि़तों से मिलने पहुंचे और उन्होंने पीडि़तों के इलाज के बारे में जानकारी ली तथा मध्यप्रदेश सरकार को गैस पीडि़तों को शीघ्र सहायता देने हेतु आवश्यक निर्देश दिए। चुनाव उपरांत भोपाल गैस पीडि़तों के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में अलग "प्रकोष्ठ" बनाया। भोपाल गैस पीडि़तों का उपचार ठीक से हो, उन्हें उपयुक्त मुआवजा मिले, इसके लिए उन्होंने गैस पीडि़तों के राहत एवं पुनर्वास के लिए कार्ययोजना बनाई और उस पर योजनाबद्ध तरीके से अमल शुरू करवाया।
राजीवजी ने देश के ग्रामीण इलाकों का अनवरत दौरा किया। मध्यप्रदेश में एवं अन्य प्रदेशों के वे ऐसे इलाकों में गए, जहां विकास की रोशनी नहीं पहुंची थी। उन्होंने सुदूर अंचलों में रहने वाले गरीब, दलित, शोषित, पीडि़त और कमजोर लोगों के दरवाजों पर जाकर उनकी तकलीफों को समझा और उन्हें दूर करने की कोशिश की।
दरअसल,,ऐसे कई उदाहरण है जिसमें वे सुरक्षा तथा प्रोटोकाल की परवाह किए बिना पीडि़तों के दुख-दर्द में शामिल हुए। वे गरीब की झोपड़ी में एक ऐसा स्वर्णिम भारत देखना चाहते थे, जिसमें खुशहाली की सुनहरी इबारत लिखी हो और वहां "सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:खभाग् भवेत्" की भावना का साक्षात् साकार स्वरूप दिखाई देे, अर्थात् राजीव जी के प्रयास थे कि सभी सुखी हों, सभी रोग मुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दुख का भागी न बनना पड़े।
देश के जिन इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं से तबाही मची जैसे उड़ीसा में महाचक्रवात, गुजरात में भूकंप, देश के कुछ इलाकों में सूखा व बाढ़ की स्थिति बनी, वहां आपदा की इस घड़ी में राजीव जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए प्रभावितों की पूरी संजीदगी से मदद की। प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए उन्होंने व्यवस्थित और प्रभावी कदम उठाए। राहत और पुनर्वास के कामों को सुचारू रूप से चलाया।
राजीव गांधी पर्यावरण, प्रदूषण की समस्या से बहुत चिंतित रहते थे। उन्होंने वन एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए मजबूत कदम उठाये। राजीव गांधी का मानना था कि पर्यावरण संरक्षण और विकास की अवधारणा में संतुलन आवश्यक रूप से होना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण एवं ओजोन परत के क्षरण के मामलों को अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से आगे बढ़ाए जाने की वकालत की। राजीवजी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में "पृथ्वी संरक्षण कोश" की स्थापना हुई।
राजीव गांधी ने निराशा पर आशा और निर्भरता पर आत्मविश्वास की विजय पाने की राह दिखाई। राजीव गांधी का यह मानना था कि नई सदी, ज्ञान पर आधारित सदी होगी और इसीलिए उन्होंने विज्ञान और टेक्नोलॉजी का सहारा लेकर प्राचीन राष्ट्र को नए भारत में बदलने का अभिनव प्रयास किया।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सूचना क्रांति की आधारशिला रखी।
राजीव जी एक ऐसे व्यक्ति थे जो सदा नये विचारों और रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते
लोकतांत्रिक और जननायक
राजीव गांधी एक सच्चे लोकतंत्रवादी थे, एक ऐसे व्यक्ति थे जो सदा नये विचारों और रचनात्मक आलोचनाओं का स्वागत करते थे। राजीवजी ने अपने निष्कलंक सार्वजनिक और राजनैतिक जीवन में जिस भी भूमिका का निर्वहन किया, उसमें वे पूर्ण रूप से खरे उतरे। एक सांसद, प्रधानमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेताप्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने जो भी भूमिका निभाई, सभी में राष्ट्रहित में समर्पण भाव से अपने दायित्व का निर्वहन किया।
राजीव गांधी भारत में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति के प्रथम सूत्रधार थे। आज जिस डिजिटल इंडिया की बात पूरे देश में हो रही है, उसकी आधारशिला श्री राजीव गांधी ने ही रखी थी। संचारक्रांति का शंखनाद कर राजीवजी देश में कम्प्यूटर क्रांति के जनक बने। राजीवजी का विश्वास था कि भारत का भविष्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के द्वारा ही संवारा जा सकता था।
विकसित कहे जाने वाले राष्ट्रों तक ने हमारी टेक्नालॉजी को न केवल स्वीकार किया बल्कि उसकी उच्च गुणवत्ता को विश्व स्तर पर सराहा। राजीव जी ने जैव प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा, पर्यावरण आदि क्षेत्रों में नये कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया तथा पेयजल, खाद्यान्न, दूरसंचार, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में भी प्रगति हेतु विभिन्न टेक्नोलॉजी मिशन गठित किए।
राजीव जी का एजेंडा भारत का विकास ही था और विकसित आधुनिक भारत उनका सपना था। विधि का विधान रहा कि असमय इस दुनिया से चले जाने के कारण उनका यह संकल्प अधूरा ही रह गया। राजीव गांधी ने अपने सतत् प्रयासों से देश के जनमानस में ऐसी उत्कृष्ट छाप छोड़ी कि उनके दुनिया में नहीं रहने के बाद भी सदियों तक आदर के साथ वे हमेशा याद किए जाते रहेंगे। ऐसे युग पुरूष का जीवन, उनकी शहादत और स्मृतियां हमेशा देश के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। उक्त पुण्यतिथि पर
*अध्यक्ष प्रतिनिधि रामचरण साहू, भरत गुप्ता, श्रीमती शशी खरे, राजेंद्र खरे, विसर्जन धुर्वे, दयाराम खुशरो, श्री हरिप्रसाद बंजारे, श्री बंटी खान एवं काँग्रेस पार्टी के सभी वरिष्ठ जन उपस्थित थे ।