चिकित्सा के ठेकेदारों पर साय सरकार कब कसेगी लगाम ?
निजी अस्पतालों के एजेंट बने 108 के ड्राइवरों और अटेंडेंट पर कब होगी कार्यवाही
आयुष्मान कार्ड की सुविधा होने के बाद भी नगद इलाज करने वाले निजी नर्सिंग होम पर कार्यवाही कब ?
बिना अनुमति शहर में चल रहे नर्सिंग होम के व्यापार पर कब लगेगा लगाम ?
दुर्ग / शौर्यपथ /
चिकित्सा और चिकित्सक ये दो शब्द हर उस व्यक्ति के लिए इश्वर का रूप होते है जब उन्हें शारीरिक समस्या का सामना करना होता है . धरती के भगवान् के रूप में चिकित्सको को देखा जाता है किन्तु वर्तमान समय में भगवान् के भेष में शैतान का रूप भी कही कही नजर आता है जो चिकित्सा को दागदार करता है . चिकित्सा में व्यापार एक समय तक उचित है किन्तु इस व्यापार की का वजन उस समय असहनीय हो जाता है जब चिकित्सा की आड़ में धन कीई लालसा बढ़ जाती है और इंसानों की जान के साथ खिलवाड़ होने लगता है . कुछ ऐसा ही मामला हाल ही में देखने को मिला जब एक युवक की जान के साथ खिलवाड़ हो गया और इस खेल में धन के साथ साथ जान भी गवानी पड़ी . धन आज नहीं तो काल आ जायेगा किन्तु जान अब दुबारा नहीं आएगी .
ग्राम खुटेरी (गुंडरदेही) निवासी 19 वर्षीय रोहित कुमार का हाथ क्रेशर की चपेट में आ गया और भुजा व कोहनी के बीच से कट गया . कटे हुए हाथ के साथ युवक को परिजितो ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गुंडरदेहीले गए जहाँ से प्राथमिक चिकित्सा के बाद तुरंत शासन की एम्बुलेंस 108 में जिला अस्पताल दुर्ग रेफर किया गया . किन्तु इस गंभीर दुर्घटना के बाद भी एम्बुलेंस के चालक और अटेंडेंट अपनी ड्यूटी को दरकिनार करते हुए परेशान हाल परिजनों को किसी हायर सेंटर में इलाज की सलाह देने के बजाये एस आर हॉस्पिटल दुर्ग में इलाज कराने की सलाह देने लगे .
जिला अस्पताल में अपने लोगो को और निजी एम्बुलेंस को भी इस दरमियान लाइन अप कर लिया यह सब इतनी जल्दी से किया गया कि जिला अस्पताल में मरीज के नाम सिर्फ पर्जी ही कटी और शासकीय अस्पताल में निजी एम्बुलेंस और एक दलालों की पुरी टीम आ गयी जिसके बाद मरीज को एस आर अस्पताल शिफ्ट कार दिया गया उसके बाद शुरू हुआ पैसे के लेनदेन का खेल .
हाथ जोडऩे का ठेका हुआ दो लाख में ...
मरीज के एस आर हॉस्पिटल (10/12/2024 शाम लगभग 8 बजे) में पहुँचते ही प्रबंधन ने मरीज के परेशान और चिंतित परिजनों से हाथ जोडऩे का सम्पूर्ण इलाज का ठेका 02 लाख में कर दिया जिसमे दवा का खर्च अलग मानो इलाज ना कर रहे हो कोई निर्जीव वस्तु का निर्माण कर रहे हो जब ठेका हुआ तो फिर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी की स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आयुष्मान कार्ड भी दरकिनार कर दिया गया क्योकि नगद का खेल जो आरम्भ हो गया .
24 घंटे बाद जुड़े हाथ को फिर काट दिया गया ...
मरीज के हाथ को ओपरेशन से जोड़ तो दिया गया किन्तु मात्र 24 घंटे बाद (11/12/2024 रात लगभग 8 बजे ) फिर से अस्पताल प्रबंधन से फरमान आया कि जुड़े हुए हाथ में रिअक्शन हो गया इसे काट के अलग करना होगा मतलब ठेका जो हुआ था वो असफल हो गया और जुड़े हाथ को काट दिया गया .
स्थिति बिगड़ रही मरीज की पैसा जमा करो और ले जाओ ...
12 दिसंबर की शाम को मरीज के परिजनों को अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि मरीज की हालत बिगडती जा रही है जिस पर परिजनों द्वारा किसी बड़े अस्पताल ले जाने की बात कही गई किन्तु प्रबंधन को मरीज की जान से ज्यादा शायद पैसो की आवश्यकता थी देर रात गरीब परिजनों से बकाया राशि दो लाख के लगभग जमा किये बिना नहीं जाने देने की बात कही गई . आज के जमाने में देर रात दो लाख नगद लाना माध्यम परिवार के लिए भी बहुत मुश्किल होता है ऐसे में गरीब परिवार कहा से नगद रकम लाये . 12 दिसंबर को लगभग 08 बजे मिली सुचना के बाद परिजन परेशां होते रहे और 13 की सुबह लगभग 04 बजे उन्हें मरीज के मृत होने की जानकारी दी गई . इतना सब होने के बाद और ठेका में इलाज में असफल होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन अपनी बकाया राशि की जिद पर अड़ा रहा . धीरे धीरे मृतक के परिजन ,दोस्त , सम्बन्धी और मिडिया पहुँचने लगे लगभग 10 घंटे चले इस हंगामे के बाद मृतक के मृत देह को अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों को सौपा और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया .
मृतक का भाई
मृतक के गाँव (खुटेरी ) के निवासी
मृतक के ग्राम के निवासी
मानवता को शर्मशार करने वाली इस घटना पर क्यो है सब मौन ...
घटना 13 दिसम्बर की है इस घटना के सम्बन्ध में एक निजी चेनल पर दुर्ग सीएमओ ने ब्यान दिया कि निजी एम्बुलेंस का परिसर में आना प्रतिबंधित है ऐसे में आपात कालीन कक्ष से मरीज को निजी अस्पताल में ले जाने आये निजी एम्बुलेंस पर अब तक जाँच व कार्यवाही क्यो नहीं हुई . उस शासकीय एम्बुलेंस के चालाक और सहायक से जाँच व पुझताझ क्यो नहीं हुई जिन्होंने जिला अस्पताल से बेहतर एस आर अस्पताल में परेशानं हाल परिजनों को इलाज कराने की सलाह देकर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ किया . उस अस्पताल प्रबंधन पर जिला प्रशासन कार्यवाही क्यो नहीं कर रहा जिन्होंने परिजनों के आयुष्मान कार्ड के उपयोग को करने से मना किया और नगद के बोझ से परिजनों को परेशान किया . ऐसा कौन सा चिकित्सक और प्रबंधन है जो इलाज ठेके पर करता है अगर ठेके पर किया है तो कार्य पूर्ण नहीं होने पर राशि की मांग क्यो की गई ? क्या ऐसे प्रबंधन पर जिला प्रशासन को स्वयं संज्ञान नहीं लेना चाहिए .
मृत रोहित का भाई आज अपनी दास्तान बता रहा है और अपने मृत छोटे भाई के लिए इन्साफ की उम्मीद कर रहा है क्या जिला प्रशासन मामले को स्वयं संज्ञान में लेकर निष्पक्ष जांच नहीं कर सकता और सच्चाई आम जनता के सामने नहीं ला सकता . एक तरफ प्रदेश सरकार स्वास्थ्य के लिए बड़े बड़े दावे कर रही है किन्तु वही दावे किस कदर खोखले साबित हुए यह मृत रोहित के परिजनों की हालत देख कर ही अंदाजा लगाया जा सकता है . शौर्यपथ समाचार जागरूक पाठको और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों से विनम्र निवेदन करता है कि मामले को संज्ञान में ले एवं निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करे . शौर्यपथ समाचार पत्र ने उपरोक्त बाते मृतक रोहित के भाई , थ्रेशर के मालिक और गाँव के उप सरपंच से चर्चा और उनकी जुबानी कही बातो के आधार पर प्रेषित की है जिसके प्रमाण जाँच अधिकारियो को उपलब्ध कराने सहर्ष स्वीकार्य है .
जिला चिकित्सा अधिकारी दुर्ग : डॉ. दानी