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शिक्षा : आंसर देना शुरू करने से पहले की जरूरी सावधानियां

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शौर्यपथ शिक्षा / प्रश्नों को हल करने के लिए साल भर कड़ी मेहनत करते रहने की चिंता और तनाव में बहुत छोटी किन्तु सर्वाधिक असरकारी गलतियों से मिलने वाला परिणाम जीवन भर हमें ज्यादा परेशान करता है | इस आर्टिकल में नीट जैसी परीक्षा में परीक्षार्थियों से होने वाले कॉमन-मिस्टेक्स से उन्हें सावधान करने की कोशिश की गई है |
नीट देश की प्रतिष्ठित और बहुत महत्वाकांक्षी परीक्षा है | इस परीक्षा के प्रश्न पत्र और आंसर शीट (ओ एम आर शीट ) भी विशेष कोड के साथ विशेष ऑर्डर में प्रिंट किये गए होते हैं | नीट के परीक्षार्थियों को आंसर देना शुरू करने से पहले अपने प्रश्नपत्र-बुकलेट और आंसर शीट के कोड को मिला लेना चाहिए| दोनों का एक ही कोड होना चाहिए | कोड अलग होने पर तुरंत इस गलती की जानकारी वहां उपस्थित परीक्षा प्रभारी को देना चाहिए| क्योंकि अलग-अलग कोड वाले प्रश्न-पत्रों में प्रकाशित प्रश्नों के क्रम (आर्डर ऑफ़ क्वेश्चन) अलग-अलग होते हैं इसलिए उस विशेष कोड के आंसर शीट में प्रकाशित विकल्पों यानी संभावित आंसर से संबंधित गोले (सर्किल) भी अलग क्रम में होते हैं|
इसलिए तनाव और हड़बड़ी में परीक्षार्थी कोड को ना मिलाकर सीधे आंसर देना शुरू ना कर दें| आंसर देना शुरू करने से पहले एक ज़रूरी कार्य यह भी है कि परीक्षार्थी अपने प्रश्न-पत्र में प्रकाशित पृष्ठों की संख्या को ठीक से चेक कर लें अर्थात आपके प्रश्न-पत्र में प्रकशित पृष्ठों की संख्या पूरी है या नहीं| यानी प्रश्न-पत्र के ऊपर प्रकाशित कुल पृष्ठों की संख्या और अन्दर संलग्न (अटैच) पृष्ठों की संख्या पूरी है या नहीं| एक सामान्य गलती आंसर शीट (ओएमआर शीट) में दिए गए गोले (सर्किल) को ठीक ढंग से नहीं भरने की भी होती हैं| ओएमआर अर्थात ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन। यह स्कैनर की तरह कार्य करता है। यह शीट कुछ विशेष प्रकार के चिन्हों या फिर मार्क्स को (आंसर या रिस्पांस को) पहचानने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।
ओएमआर शीट को लेजर लाइट के माध्यम से डाटा एंट्री में उपयोग की जाती है। ओएमआर शीट में परीक्षार्थियों के द्वारा जो काले घेरे किए गए होते हैं वहां से लेजर की मात्रा कम वापस आती है क्योंकि काला रंग प्रकाश का अच्छा अवशोषक होता है यानी लाइट को काला रंग अच्छे से सोख लेता है| इसलिए जहां पर गोले को काला नहीं किया हुआ है, केवल वहां से लेजर लाइट की मात्रा ज्यादा वापस आती है। इस प्रकार ओएमआर स्कैनर हमारी शीट में दिए हुए उत्तरों या रिस्पांस को वैज्ञानिक विधि से तुरंत पहचान लेता है। ओएमआर शीट को यदि अच्छे से नहीं भरा गया हो तो ओएमआर स्कैनर उसके डाटा को कलेक्ट नहीं करेगा। इसलिए इस शीट को भरते समय गोले को पूरी तरीके से काला करना जरूरी होता है अन्यथा मशीन उसे नहीं पढ़ पाएगी। अनेक परीक्षार्थी इस शीट को भरने में ही गलतियां करते हैं | एक से अधिक विकल्पों में काला रंग भर देना या किसी आंसर को मिटाने, बदलने का प्रयास करते हुए बाद में किसी अन्य आंसर (विकल्प) में काला रंग भरना या निर्धारित स्थान (सर्किल) में सही ढंग से काला रंग नहीं भरना भी सामान्य तौर पर होने वाली गलतियां हैं|
ओएमआर शीट में काला करने के अलावा किसी और तरह का निशान जैसे की टिक या क्रॉस नहीं लगाया जाना चाहिए।गोला भरते वक्त सावधानी यह भी रखें कि कोई लाइन या निशान बाहर ना हो| यानी काला निशान (स्याही) केवल गोले के अंदर ही रहे।
किसी भी एग्जाम को फेस करते समय पहली और आवश्यक योग्यता परीक्षार्थी का खुश रहना और उस एग्जाम के दिशा-निर्देशों (गाइडलाइंस) के प्रति ईमानदार रहना होता है| इस योग्यता के सामने टेंशन, एग्जाम -फोबिया या निराशापन की चुनौतियों का असर अपने आप नगण्य हो जाता है|
साभार : योगेश अग्रवाल, साइंस-मैथ्स शिक्षक

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