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बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करने के लिए हम लगातार प्रयासरत हैं जिसमें अभिभावकों का भी सहयोग जरूरी है: प्रशांत कुमार Featured

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दुर्ग / शौर्यपथ / जैसा कि आप सभी को मालूम है कि राज्य शासन में ऑनलाइन क्लास के साथ-साथ अब ऑफलाइन क्लास की भी सुविधा प्रारंभ कर दी है एवं स्कूलों को शासन के गाइडलाइन के पालन के साथ ऑफलाइन क्लास के लिए भी अनुमति दे दी है। ऑफलाइन क्लास शुरू होते ही बच्चों में एक अलग प्रकार का उत्साह देखने को मिल रहा है लगभग डेढ़ साल बाद बच्चे स्कूल जा रहे हैं स्कूल जाते हुए बच्चों का खिल खिलाता चेहरा पालको को एक सुकून तो दे रहा है साथ ही सुरक्षा को लेकर भी पालक चिंतित दिखाई देते हैं ऐसे में अभिभावकों के मन में उठ रहे सवालों का एवं बच्चों के भविष्य के लिए किए जा रहे कार्य योजना के बारे में डीएवी स्कूल हुडको भिलाई के प्राचार्य प्रशांत कुमार ने गत रविवार को अभिभावकों की एक वर्चुअल मीटिंग रखा है जिसमें अभिभावकों को स्कूल की कार्य योजना ऑफलाइन क्लास से होने वाले फायदे ऑफलाइन क्लास के कारण भविष्य में बच्चों की मजबूत आधारशिला शासन के कोविड से सुरक्षा के मापदंड का कैसे पालन करना है एवं शासन और और स्कूल प्रबंधन छात्रों के लिए किस प्रकार किन-किन सुरक्षा के साथ ऑफलाइन क्लास शुरु कर रही है इस बारे में विस्तृत चर्चा की है प्राचार्य प्रशांत कुमार ने बताया कि जब देश और पूरी दुनिया में कोरोना आपदा के कारण स्कूल बंद हुए तब भी स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों की शिक्षा के बारे में उनके बेसिक ज्ञान के बारे में प्रबंधन ने लगातार प्रयास किए हैं जब शासन ने ऑनलाइन क्लास की बात कही तब भी एस डीएवी स्कूल प्रबंधन ने ऑनलाइन क्लास के माध्यम से बच्चों को पूरी इमानदारी से शिक्षा देने का भरपूर प्रयास किया है और लगभग सफल भी हुए हैं .शासन की गाइड लाइन के अनुसार अभिभावकों से स्कूल प्रबंधन ने किसी भी प्रकार की फीस की मांग नहीं की अपितु तब भी स्कूल प्रबंधन ने अपने स्कूल के सैकड़ों कार्यरत शिक्षकों और स्टाफ को समय-समय पर वेतन प्रदान किया साथ ही ऑनलाइन शिक्षा के द्वारा बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा है . हालांकि शासन ने सभी को प्रमोटी कर दिया बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन ने यह भरकस प्रयास किया कि बच्चों को अगली कक्षा में जाने के पहले पिछली कक्षा के विषयों के बारे में संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो सके ताकि अगली कक्षा के सिलेबस में बच्चों को परेशानी का सामना ना करना पड़े हैं .
अब जबकि शासन द्वारा ऑनलाइन क्लास की अनुमति दे दी गई है तो स्कूल प्रबंधन ने शासन के बताए अनुसार सुरक्षा के सभी उपायों को अपनाते हुए ऑफलाइन क्लास भी शुरू कर दिए हैं स्कूल प्रबंधन सभी अभिभावकों से भी अपेक्षा है कि अपने लाडलो को वह ज्ञान वह शिक्षा दिलाने में स्कूल प्रबंधन का सहयोग करें जिस शिक्षा की उन्हें जरूरत है शासन ने यह तो आदेश दे दिया है कि क्लास 8th तक सभी को पास कर दिया जाएगा किंतु डीएवी संस्था की यही कोशिश है कि हर बच्चा अपने क्लास में अपने विषयों पर मजबूत पकड़ बना सके ताकि क्लास 9th क्लास 10th में पहुंचने पर जो सिलेबस उस समय रहेगा उसे समझने में बच्चों को आसानी होगी अगर नीव मजबूत रहेगी तो भवन भी बुलंद होगा कुछ है ऐसे ही कहावत शिक्षा के क्षेत्र में भी है अगर बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा का आधार है मजबूत रहेगा तो भविष्य कक्षाओं का सिलेबस बच्चों को समझने में आसानी होगी और इसी कोशिश के परिणाम स्वरूप डीएवी संस्था लगातार ऑनलाइन क्लास में भी बच्चों को बेसिक ज्ञान देने की पुरजोर कोशिश करती रही है ताकि भविष्य में बच्चा कमजोर ना हो।
वर्तमान में डीएवी संस्था पूरे भारत में प्रथम स्थान पर संचालित संस्था है शिक्षा के क्षेत्र में डीएवी संस्था अपने सभी मानको को पूरा करते हुए अग्रणी संस्था के रूप में एक पहचान बनाया हुआ है वहीं अगर शुल्क के बारे में बात की जाए तो वर्तमान में भी पूरे जिले में डीएवी संस्था सबसे कम फीस लेने वाली संस्था है डीएवी संस्था ने संस्था को चलाने के लिए जरूरत के हिसाब से शुल्क में वृद्धि की थी किंतु शासन ने जिस मात्रा में शुल्क बढ़ाई गई थी उसे स्वीकार नहीं की एवं एक मापदंड तैयार कर शुल्क वृद्धि की अनुमति दी जिसे भी डीएवी संस्था ने स्वीकार किया और जिन से भी ज्यादा शुल्क लिए थे उन लोगों की बढ़ी हुई राशि अगले आने वाले फीस में समायोजित कर दिया गया है .
डीएवी संस्था कमजोर वर्ग के लोगों को भी अपने स्तर पर निशुल्क शिक्षा देने के लिए तत्पर है और ऐसे कुछ मामलों में कुछ बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान भी की जा रही है डीएवी संस्था अभिभावकों से भी उम्मीद और अपेक्षा करती है कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों कार्य करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों एवं स्कूल संचालन के लिए जरूरी मुद्रा जोकि फीस के रूप में अभिभावकों से लेती है इसे भुगतान करें ताकि स्कूल चलाने में संस्था को किसी प्रकार की वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़े। ऐसा नहीं है कि डीएवी संस्था को रोना आपदा के समय हुई परेशानियों से अवगत नहीं है कई अभिभावकों को वर्तमान स्थिति में भी शुल्क पटाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ऐसे अभिभावकों से भी निवेदन करती है कि स्कूल प्रबंधन से संपर्क करें एवं अपनी जायज परेशानियों को प्रबंधन के सामने रखें प्रबंधन सदैव ऐसे अभिभावकों की बातों को गंभीरता पूर्वक सुनेगी एवं अभिभावकों के परेशानियों को समझते हुए कोई ऐसा निर्णय लेगी ताकि शुल्क बढ़ाने में अभिभावकों को भी परेशानी ना हो और प्रबंधन भी परेशानियों से बची रहे।
एक समय ऐसा भी था कि डीएवी स्कूल को शिक्षक ट्रेनिंग सेंटर समझते थे किंतु आज स्कूल प्रबंधन ने शिक्षकों को उस अनुपात पर वेतन देने का कार्य कर रही है कि शिक्षक स्कूल में ही रहें एवं अन्य स्कूलों की ओर प्रस्थान ना करें इसके कारण स्कूल में शिक्षकों की स्थिरतता लगातार बढ़ती जा रही है।
आज स्कूल प्रबंधन ऑफलाइन क्लास में शासन के गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करते हुए छात्रों के हितों का पूरी तरह ध्यान रख रही है बावजूद इसके भी अगर किसी अभिभावकों के मन में अगर संदेह है तो प्रबंधन ऐसे अभिभावकों को स्नेह पूर्वक निमंत्रण देती है कि वह स्कूल आए एवं स्वयं देखें कि स्कूल प्रबंधन ने उनके नौनिहालों के लिए कैसी व्यवस्था कर रखी है जितनी चिंता अभिभावकों को अपने बच्चों की है इतनी ही चिंता स्कूल प्रबंधन को अपने छात्रों की भी है .
स्कूल प्रबंधन पूरी ईमानदारी से पूरी तत्परता से इस प्रयास में है कि स्कूल में बच्चों को किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ का सामना ना करना पड़े इसके लिए स्कूल प्रबंधन शासन के प्रत्येक गाइडलाइन का पूरी ईमानदारी से 100% पालन कर रही है एवं आगे भी करती रहेगी इस प्रबंधन का उद्देश्य केवल शुल्क ही नहीं है प्रबंधन का उद्देश्य छात्रों को बेसिक ज्ञान देने से है ताकि छात्र भविष्य में मिलने वाले सिलेबस को आसानी से समझ सके और अपनी उच्च शिक्षा के समय किसी के सामने अपने आप को कमजोर महसूस ना करें छात्रों के हित के लिए छात्रों की शिक्षा के लिए डीएवी प्रबंधन सदैव अपना शत-प्रतिशत योगदान देने में तत्पर है।
डीएवी हुडको स्कूल के प्राचार्य प्रशांत कुमार ने गत रविवार को हुए वर्चुअल मीटिंग में जिस प्रकार से स्कूल संचालन के बारे में एवं बच्चों के भविष्य के बारे में तथा फीस एवं शासन की गाइडलाइन के संबंध में खुलकर चर्चा की और जिस प्रकार से ऑनलाइन क्लास की अपेक्षा ऑफलाइन क्लास के लिए जोर दिया ताकि आधार ज्ञान की मजबूती से भविष्य में शिक्षा का स्तर मजबूत होता है जिसके बारे में सभी अभिभावक अच्छे से जानते वह समझते हैं और हर अभिभावक यही चाहता है कि उनके नौनिहाल उच्च शिक्षा को प्राप्त करें इस दुनिया में धन दौलत से ज्यादा कीमती शिक्षा होती है और इसी शिक्षा के महत्व को समझते हुए शासन ने ऑनलाइन क्लास की अपेक्षा ऑफलाइन क्लास को मंजूरी दी छत्तीसगढ़ शासन ने अभी हाल में ही खेलकूद का भी आयोजन करवाया ताकि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी हो और सहभागिता हो स्वस्थ बच्चे ही स्वक्ष समाज का निर्माण करते हैं। मुझे याद है कि आज से तकरीबन माह भर पहले जब मैं अपने बच्ची को डेढ़ साल बाद स्कूल ले कर गया और जब वापस लेकर आया तो उसके चेहरे पर जो खुशी देखी जो प्रसन्नता देखी मानो मैंने उसे लाखों करोड़ों का तोहफा दे दिया हो हम इस दुनिया में जीते हैं सिर्फ अपने बच्चों के लिए बच्चों की खुशी बच्चों का भविष्य हमारे लिए सर्वोपरि है मैंने तो अपनी बच्ची को हफ्ते में सभी दिन स्कूल भेजने का फैसला लिया और लगातार भेज भी रहा हूं मेरी बच्ची बहुत खुश है आप भी कोशिश कीजिए देखिए अच्छा लगेगा ...

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