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इंस्पायरिंग:लक्ष्य बड़े होने चाहिए, ये आपको डराएंगे या उत्साह से भर देंगे - एमएस धोनी

  • devendra yadav birth day

इंस्पायरिंग /शौर्यपथ/

जब आपको प्रश्नपत्र मिलता है, आप उसे देखते हैं, फिर तय करते हैं कि क्या आपको आता है, क्या नहीं! अगर आपने सालभर पढ़ाई की होगी, तो आपको लगभग सारे उत्तर पता होंगे। थोड़ा आप मिस करेंगे, थोड़ा आप भूलोगे, लेकिन सालभर आपने पढ़ाई की होगी तो फिर भी आप लिख सकते हो। मैं हमेशा ही स्टूडेंट्स से कहता हूं कि जब भी आप क्लास में हों, आपका पूरा ध्यान वहीं रहे। हर दिन थोड़ी-थोड़ी पढ़ाई करते रहें। ऐसा नहीं कि आखिरी दिनों में जमकर बैठ जाएं और कोर्स खत्म करने की कोशिश करें। नौ-दस महीने जो हमने मिस किए हैं, उनकी भरपाई ऐसे में बेहद मुश्किल हो जाती है।

मेरी जिंदगी की एक घटना बताता हूं। यह शायद 12वीं क्लास की बात होगी। मेरे मैच चल रहे थे। मैं थोड़ा हिचक रहा था कि पापा से यह बात कैसे बोली जाए। मम्मी को तो पटा लिया था, लेकिन पापा के पास जाकर कैसे बताएं कि एग्जाम है लेकिन उससे पहले मुझे मैचेस खेलना हैं। और एग्जाम खत्म होने के बाद ही मुझे ट्रेन पकड़कर जाना है, फिर मैच खेलकर वापस आना है। बड़ी हिम्मत जुटाकर मैं पापा के पास पहुंचा। बोला- पापा ऐसा है कि हमारा मैच है, और परीक्षा भी है... ये .. वो। उन्होंने बेहद आराम से जवाब दिया। वो बोले - बेटा, अगर साल भर मेहनत की होगी तो एक दिन से फर्क नहीं पड़ेगा, अगर साल भर मेहनत नहीं की होगी, तो भी एक दिन से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।

- असफलता का सामना कीजिए, तब तक जब तक असफलता आपसे सामना करने में असफल ना हो जाए।

- लक्ष्य बेहद बड़े रखिए, या तो यह आपको डरा देंगे.. या फिर इतना उत्साहित करेंगे कि आप उसे पा लें।

- नजरिए को असलियत का जामा पहनाने की क्षमता ही लीडरशिप है।

यह बात हर फील्ड में लागू होती है। आपको कुछ हासिल करना है तो जुटना ही होगा। वैसे पढ़ाई के मामले में थोड़ा अलग तरह से सोचता हूं। जब भी मुझसे कोई पूछता है कि मेरा 10-12 साल का बच्चा क्रिकेट सीख रहा है, क्रिकेटर बनना चाहता है तो मेरी सलाह उनको कई बार चौंका देती है। मैं उनसे कहता हूं कि यह उम्र जो है, वो क्रिकेट पर ध्यान लगाने की हो सकती है, लेकिन पढ़ने की भी है। इन उम्र में बच्चों को दोनों में मजा ढूंढना चाहिए। खेल के साथ पढ़ाई में मजा आए तो सोने पर सुहागा।वैसे हमारी कोशिश होना चाहिए कि हम रिजल्ट के बारे में नहीं सोचें। मैं इस बात में ज्यादा यकीन करता हूं कि प्रोसेस ज्यादा महत्वपूर्ण है। प्रोसेस के कारण आपको रिजल्ट हासिल होता है। प्रोसेस में हमेशा नजदीक के लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करें। फिर बात क्रिकेट की हो या पढ़ाई की। शॉर्ट टर्म प्लानिंग कभी बुरी नहीं होती। धीरे-धीरे यही लॉन्ग टर्म प्लान बन जाता है, आपको पता ही नहीं चलता। इस प्रोसेस में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। जितना ज्यादा आप छोटी बातों पर फोकस करेंगे, परफेक्शन के उतने करीब पहुंचेंगे।

यह तय है कि हमारे लक्ष्य पर पहुंचने की कोशिश कई दूसरे भी कर रहे होंगे। बिल्कुल संभव है कि आप उस तक ना पहुंचें, क्योंकि उनकी प्लानिंग आपसे बेहतर हो सकती है। लक्ष्य हासिल नहीं हो, कोई बात नहीं, प्रोसेस को जो आप तक पहुंचाना था वो आप तक पहुंचा चुकी है। आप कम से कम यह समझने के काबिल तो हुए कि गलती कहां हुई। प्रोसेस पर फोकस नहीं करेंगे तो कभी यह भी नहीं समझ पाएंगे कि आप कहां कमजोर पड़े, फिर सुधार की बात तो काफी दूर हो जाती है। अगर गलती नहीं होगी तो आप भगवान हो जाओगे। गलती सबसे होती है। उससे डरिए मत, खुद को बस उस गलती को समझने और फिर सुधारने लायक बनाइए।(विभिन्न मंचों पर कही गई बातों से)

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PANKAJ CHANDRAKAR