दुर्ग / शौर्यपथ / ट्यूशन फीस को लेकर प्रशासन, प्रायवेट स्कूल और पालकों के बीच टकराव चरम सीमा में पंहुच गया है और अब पैरेंट्स एसोसियेशन ने भी ट्यूशन फीस को लेकर अधिनियम और संहिता का हवाला देकर शिक्षा विभाग और प्रायवेट स्कूलों को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी कर रहा है।
फैक्ट फाईल
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 सी के अनुसार ट्यूशन फीस वह फीस होता है, जो हम अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए स्कूल को देते है, जिसमें डेवलपमेंट, डोनेशन, कैपिटेशन और लेट फीस शामिल नहीं है। शिक्षा संहिता नियम 124ए अघ्याय 9-शिक्षा शुल्क पेज नं. 831 के अनुसार ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क का आशय यह कि शासकीय एंव आशाकीय विद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रम संबंधी एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों के संचालन हेतु जो शुल्क लिया जाता है, उसे ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क कहा जाता है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर गत 22 अप्रैल 2016 के अनुसार स्कूल में फीस का निर्धारण स्कूल के पालकों की आम सहमति और जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में निर्धारित किया जाएगा। सीबीएसई एफिलियेशन बायलॉस 2018 के अनुसार स्कूलों में फीस पीटीए (पैरेंट्स टीचर एसोसियेशन) द्वारा स्कूलों में दी जा रही सुविधाओं के अनुसार निर्धारित होगा। यह कि, फीस अधिसूचित/अनुमोदित करने के उपरांत इसे जनसामान्य को अवगत कराने हेतु विद्यालय के सूचना पटल में प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है। यह कि, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर 22.04.2016 के अनुसार शुल्क निर्धारण के उपरांत यदि यह पाया जाता है कि, शुल्क का निर्धारण याथोचित रूप से नहीं किया गया है एवं इस संबंध में पालक वर्ग संतुष्ट नहीं है तो जिला शिक्षा अधिकारी इस हेतु समग्र रूप से उत्तरदायी होगें।
इन मदों में ले रहे हैं निजी स्कूल फीस
प्रदेश के 8 हजार प्राईवेट स्कूल शिक्षण शुल्क, डेवलपमेंट फीस,मेडिकल शुल्क, बिल्डिंग शुल्क,मेंनटेंनेंश शुल्क, टर्म फीस,बागवानी शुल्क, योगा शुल्क,अमलगमेटेड फंड, निर्धन छात्र शुल्क, स्मार्ट क्लास, परिवहन शुल्क,वार्षिक शुल्क,एडमिशन शुल्क,डायरी शुल्क,आईडी कार्ड शुल्क,टाई-बेल्ट शुल्क,रेडक्रास शुल्क, परीक्षा शुल्क,क्रीड़ा शुल्क विज्ञान शुल्क,स्काउड/गाईड शुल्क, पत्रिका शुल्क, छात्र समूह बीमा योजना शुल्क, क्रियाकलाप/एक्टिविटी शुल्क, लेट फीस, बोर्ड एफिलियेशन फीस, कम्प्युटर फीस,लैब फीस, कॉसन मनी का फीस लिया जाता है।