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आंगनबाड़ी केंद्र में सुनी गई ‘अपनापन’ की कहानी

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सजगः राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर हुआ प्रेरक प्रयास, सरपंच ने सराहा

   राजनांदगांव / शौर्यपथ / ‘सजग’ आडियो कार्यक्रम की कड़ियां कोरोना महामारी के दौर में हिम्मत हारने के बजाय समझदारी के साथ हौसला बनाए रखकर जीने की सीख दे रहीं हैं, जो विशेषकर बच्चों के दिमाग में सकारात्मक प्रभाव डालने के दृष्टिकोण से लाभदायक हो सकता है। इस आडियो संदेश को गांव-गांव में न सिर्फ सुना जा रहा है, बल्कि लोग इससे प्रेरित भी हो रहे हैं। इन दिनों सजग के संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला की 29वीं कड़ी का प्रसारण किया जा रहा है, जो ‘अपनापन’ विषय पर केंद्रित है।
‘अपनापन’ की यह रोचक कहानी राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राजनांदगांव ग्रामीण क्रमांक-1 परियोजना, बोरी सेक्टर के जोरातराई गांव में आंगनबाड़ी क्रमाक-3 में सुनाई गई। लोगों को सकारात्मक वातावरण देने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लीलेश्वरी साहू ने गांव की सरपंच ज्योति स्वामी को भी यह आडियो सुनने के लिए आमंत्रित किया। सरपंच के साथ ग्राम पंचायत के सभी पंच भी आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे और ‘अपनापन’ का संदेश सुना। जिसमें बताया गया है कि, चांदनी (काल्पनिक पात्र) को अमरूद बहुत अच्छे लगते हैं, सामने हों तो खाती ही रहे। मां कल बाजार से किलोभर लाईं तो 2 उठाकर बोली, इन्हें रिंकू (काल्पनिक पात्र) को दे आती हूं। मां ने बड़े प्यार से सर पर हाथ फेरकर हामी भर दी, जानती हैं आजकल रिंकू के यहां कठिन दिन चल रहे हैं, उसके पिता का काम छूट गया है, अब कभी काम होता है, कभी नहीं। गुजारा मुश्किल से होता है। खाना तक पूरा नहीं पड़ता। चांदनी जब से आई है, वो और रिंकू साथ खेले हैं। कई बार रिंकू ने बताया, कि रात को घर के सब लोग बिना खाना खाए ही सो गए थे। चांदनी पास बैठकर सुनती है, रिंकू को गले लगा लेती है। खाने को कुछ देती भी है पर रिंकू को उसका पास बैठना-चुपचाप बात सुनना ही ज्यादा शांति देता है। उसे ऐसा लगता है, वह अकेला नहीं है। इस मुश्किल समय में यह बड़ी बात लगती है। आडियो संदेश सुनकर सरपंच ज्योति स्वामी ने कहा यह वास्तव में रोचक है और ऐसा संदेश बच्चों को भी जरूर सुनाया जाना चाहिए।
दरअसल, समाजसेवी संस्था सेंटर फार लर्निंग रिसोर्सेस (सीएलआर) ने सजग नाम से पालकों को सुनाने के लिए संक्षिप्त आडियो संदेशों की श्रृंखला तैयार की है, इन आडियो संदेशों में माता-पिता के लिए सरल सुझाव दिए गए हैं, ताकि वह अपने बच्चों के लिए प्यार से अच्छी सेहत के लिए बेहतर वातावरण तैयार कर सकें। यह आडियो संदेश पालकों को सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान करते ही हैं, साथ ही उन्हें यह ज्ञान भी मिलता है कि बच्चों के समग्र विकास हेतु कठिन परिस्थितियों में भी वह क्या बेहतर कर सकते हैं। सजग आडियो कार्यक्रम का क्रियान्वयन महिला एवं बाल विकास विभाग तथा सीएलआर के द्वारा किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में यूनिसेफ और एचसीएल फाउंडेशन भी सहयोग कर रहे हैं। इस तरह यह प्रेरक आडियो संदेश सुदूर अंचल में रह रहे पालकों तक भी अब सहजता से पहुंचाए जा रहे हैं।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणु प्रकाश ने बताया, सजग नाम का यह आडियो क्लिप डायरेक्ट्रेट से प्रत्येक सोमवार की सुबह व्हाट्सएप के जरिए जिला अधिकारियों को भेजा जाता है। जिला अधिकारियों से परियोजना अधिकारी, परियोजना अधिकारी से सुपरवाइजर और सुपरवाइजर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक पहुंचता है। इसके बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन संदेशों को पालकों को सुनाती हैं। उन्होंने बताया, जिन पालकों के पास व्हाट्सएप या स्मार्ट फोन जैसी सुविधाएं नहीं हैं, उनके घर तक जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं पालकों को संदेश सुनाकर उनसे चर्चा भी करती हैं। इन दिनों आडियो संदेशों की 29वीं कड़ी का प्रसारण किया जा रहा है, जिससे गांव-गांव में यह प्रेरक आडियो संदेश सुना जा रहा है। वहीं सीएलआर की दुर्ग संभाग कार्यक्रम अधिकारी अमृता भोईर ने बताया, कोरोना संक्रमण जैसे कठिन समय में भी सजग कार्यक्रम पूरे छत्तीसगढ़ में क्रियान्वित किया जा रहा है। सजग के आडियो संदेशों की श्रृंखला पूरे 35,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रयासों से लगभग 5 लाख परिवारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह आडियो कार्यक्रम छोटे बच्चों की बेहतरी के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का एक हिस्सा है। छत्तीसगढ़ के साथ ही बिहार, उत्तरप्रदेश व महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी क्षेत्रीय बोली-भाषा में तैयार किए गए इस एप को वाट्सएप के जरिए प्रसारित किया जा रहा है।

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शौर्यपथ