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अजीत पवार जायेंगे जेल अगर पीएम मोदी की गारंटी की बात सच हुई तो .... Featured

 अजीत पवार जायेंगे जेल अगर पीएम मोदी की गारंटी की बात सच हुई तो .... अजीत पवार जायेंगे जेल अगर पीएम मोदी की गारंटी की बात सच हुई तो ....
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नई दिल्ली / शौर्यपथ / इन दिनों देश के पीएम मोदी भार्श्ताचारियो पर कार्यवाही की गारंटी दे रहे है सुनकर अच्छा लगता है किन्तु तब इस बात का दुःख होता है कि जिन नेताओं पार भ्रष्टाचार के आरोप लगे है और केन्द्रीय जाँच एजेंसिया के जाँच के दायरे में है ऐसे भ्रष्टाचारी जब भाजपा से हाँथ मिलाते है तो इन पर हो रही जाँच रुक जाती है और ये भ्रष्टाचारी नेता राष्ट्रभक्त की श्रेणी में आ जाते है . पिच्लेदिनो महाराष्ट्र मे जो हुआ उससे यही प्रतीत होता है कि अगर कोई भ्रष्टाचारी भाजपा के साथ आ जाता है तो फिर उसे राष्ट्रभक्त माना जाने लगा है . क्या केन्द्रीय जाँच एजेंसिया जो पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार के अधीन है उनका यही कार्य शेष रह गया है कि किस नेता को भाजपा में मिलाना है और उसके लिए किस घोटाले में आरोपी बना है और अगर भाजपा मेशामिल हो गए तो जाँच की फाइल को किसी कोने में रख कर भूल जाना है .
महाराष्ट्र में अजीत पवार के सरकार में शामिल होने के बाद उन्हें उप मुख्यमंत्री के पद से नवाजा गया साथ ही उनके साथ आये कई विधायको को भी मंत्री पद मिल गया . अब जो जाँच एजेंसिया उनके घोटाले को बेनकाब करने वाली थी जिस पुलिस के द्वारा उन्हें सलाखों के पीछे पहुँचाने वाली थी वही अब सेल्यूट करते दिखेंगे . क्या भारत के लोकतंत्र में उन्ही भ्रष्टाचारियो को सजा मिलेगी जिन्होंने भाजपा से दुरी बनाई या फिर पीएम मोदी जिस बात की गारंटी ले रहे है उस पर केन्द्रीय जाँच एजेंसिया अमल करेंगी . देश के प्रधानमंत्री ने कई सभाओ में यह बात कही तो क्या अब माना जाए कि भले ही अजीत पवार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री हो गए एवं उनके साथीयों ने मंत्री पद की शपथ ले ली इसके बावजूद भी केन्द्रीय जाँच एजेंसिया उसी तत्परता से कार्य कर भ्रष्टाचार की जद में आये लोगो पर कड़ी कार्यवाही करेगी जिस तरह से दिल्ली के उप मुख्यमंत्री सिसोदिया के साथ किया .
अगर पीएम देश की जनता को भ्रष्टाचारियो पर कार्यवाही की गारंटी की बात सिर्फ दिखावे के लिए कार रहे है तो यह देश की जनता के साथ धोखा होगा अगर राष्ट्रहित में कर रहे है तो बहुत जल्दी अजित्त पवार और उनके साथ आये साथियो की जगह सलाखों के पीछे होगी अब देखना यह है कि पीएम मोदी की गारंटी दिखावा है या सच .....

एनसीपी के किन-किन लोगों ने ली महाराष्ट सरकार में शपथ
//अजित पवार - अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. वह बारामती सीट से विधायक हैं.
//छगन भुजबल - छगन भुजबल ने मंत्री पद की शपथ ली है. वह नासिक के येवला सीट से विधायक हैं.
//दिलिप राव वलसेपाटिल - मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने दिलिप राव वलसेपाटिल पुणे की अंबेगांव से विधायक हैं.
//हसन मियांलाल मुशरिफ - कैबिनेट मंत्री बने हसन मियांलाल मुशरिफ कोल्हापुर की कागल सीट से विधायक हैं.
//धनंजय पंडितराव मुंडे - कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे बीड की परळी सीट से विधायक हैं.
//धर्माराव बाबा भगवंतरंव आत्राम - गड़चिरौली की अहेरी सीट से विधायक हैं.
//अदिति वरदा सुनीत तटकरे - श्रीवर्धन सीट से विधायक हैं.
//संजय शंकुलता बाबूराव बनसोड़े- लातूर की उदगीर सीट से विधायक हैं.
//अनिल भाईदास पाटिल - जलगांव की अमलनेर सीट से विधायक हैं.


आइये जानते हैं किस नेता के खिलाफ कौन से मामले हैं...
1. अजीत पवार -अजित पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के जांच की लंबी सूची है. इसमें सहकारी बैंक घोटाला और सिंचाई घोटाला मामला प्रमुख हैं. यहां तक की उनकी अपनी कंपनी पर भी भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने साल 2021 में स्पार्कलिंग सॉइल प्रा.लि. के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर कर किया था. हालांकि दायर चार्जशीट पर अजित पवार और उनकी पत्नी का नाम शामिल नहीं है लेकिन जिस कंपनी के खिलाफ शिकंजा कसा गया है वह अजित पवार और उनकी पत्नी की है.
सहकारी बैंक घोटाला: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम बने अजित पवार के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से दिए गए लोन में अनियमितताओं के आरोप हैं. इसी आरोप पर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के आधार पर वह आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच का सामना कर रहे थे. ईडी ने भी इसी संबंध में उनपर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज किया था.
इसके बाद साल नवंबर 2019 में, महा विकास अघाड़ी - कांग्रेस, राकांपा और अविभाजित शिवसेना का तीन-पक्षीय गठबंधन सत्ता में आया. उस दौरान अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. डिप्टी सीएम बनने के एक साल के भीतर, सितंबर 2020 में, ईओडब्ल्यू ने कहा कि अजित पवार के खिलाफ किसी भी आपराधिक गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है और विशेष अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की.
ईडी ने साल 2020 में ईओडब्ल्यू के रुख का विरोध किया था लेकिन उसके हस्तक्षेप को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर ईओडब्ल्यू केस बंद हो जाता तो ईडी भी जांच जारी नहीं रख सकती थी. इससे पहले कि विशेष अदालत ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला कर पाती, पिछले साल जून महीने में राज्य सरकार बदल गई.
इस बीच, ईडी ने अप्रैल में अपनी जांच में आरोप पत्र दायर किया. इस आरोप पत्र में बैंक और बैंक से लोन लेने वाली चीनी सहकारी समितियों को खरीदने वाली कुछ कंपनियों में अजित की भूमिका का जिक्र किया गया है. लेकिन उन्हें इन मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है.
2. छगन भुजबल-महाराष्ट्र के गवर्नर रमेश बैस ने बीते रविवार जिन 9 एनसीपी विधायकों को शपथ दिलाई है उनमें विधायकों में कईयों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई चल रही है. छगन भुजबल भी उन्हीं विधायकों में शामिल हैं. छगन दो बार मुंबई के मेयर रह चुके हैं और उन्हें पवार के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है.
फिलहाल छगन पर साल 2006 में पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए 100 करोड़ की परियोजनाओं का कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता का मामला दर्ज है. छगन पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था जिसमें साल 2016 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और साल 2018 में उन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत भी मिल गई थी.इसके अलावा छगन भुजबल पर मुंबई विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने एक केस दर्ज किया था. जो अब तक विशेष अदालत में लंबित है.
3. हसन मुश्रीफ -मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ भी ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. दरअसल उनपर सर सेनापति संताजी घोरपडे शुगर फैक्ट्री में अनियमितताओं का मामला दर्ज है. जिसकी जांच ईडी कर रही है.
4. धनंजय पंडितराव मुंडे -साल 2021 में एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज की गई थी. हालांकि मुंडे ने बलात्कार के आरोपों का खंडन किया था. कुछ दिन बाद महिला ने भी शिकायत वापस ले ली थी.


शपथ समारोह के बाद अजित पवार ने क्या कहा
अजित पवार और छगन भुजबल ने एनडीए में शामिल होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें प्रफुल्ल पटेल भी साथ बैठे नजर आए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीत पवार ने अपने फैसले पर बात करते हुए कहा, "हमने एनसीपी पार्टी के नाते शिंदे-फडनवीस सरकार में शामिल होने का फैसला लिया है."
उन्होंने आगे कहा, "हम देश का विकास चाहते हैं इसलिए एनडीए में शामिल हो रहे हैं. एनसीपी के सभी विधायक हमारे साथ हैं. हम अगले चुनाव में एनसीपी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे. "
वहीं दूसरी तरफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छगन भुजबल ने कहा "हमें कुछ दिन पहले शरद पवार साहब ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर वापस आने वाले हैं. अगर ऐसा है तो एक सकारात्मक कदम लेते हुए हमने विकास के उद्देश्य से उनकी सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है."
उन्होने आगे कहा, "कई लोगों का कहना है कि हमारे नेताओं मे से कई लोगों के खिलाफ ईडी के केस चल रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है. शपथ लेने वाले नेताओं के नाम आप देख सकते हैं. हम सभी लोग मोदी के साथ जाना चाहते हैं."


शरद पवार ने क्या कहा
महाराष्ट्र की राजनीति में आए सियासी भूचाल पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी बयान दिया. उन्होंने अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा, "एनसीपी किसकी है, ये लोग तय करेंगे." इसके अलावा शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्हें ही अब अपने साथ ले लिया है. शरद आगे कहते हैं, 'मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने आज शपथ ली है. उनका सरकार (महाराष्ट्र) में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि वे सभी आरोप मुक्त हो गए हैं.'

एकनाथ शिंदे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा, “अब एक मुख्यंमत्री और दो उपमुख्यमंत्री वाली सरकार तेज़ गति से काम करेगी. ये डबल इंजन वाली सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चल रहा था. अब इसे ट्रिपल इंजन मिल गया है. अजीत पवार और उनके सभी सहयोगी का स्वागत करता हूं.” उन्होंने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, "लोकसभा चुनाव में चार-पांच सीटें उन्हें मिली थीं. इस बार उतनी भी रख पाएं तो बड़ी बात है."

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