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June 14, 2026
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भारत

भारत (1082)

नई दिल्ली, ।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे उपायों की व्यापक समीक्षा करते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति की 25वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

बैठक में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने हेतु पेट्रोल पंपों एवं सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की समीक्षा की गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन, बीएस-III और उससे पुराने वाहनों पर कार्रवाई तथा यातायात जाम वाले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

सड़क धूल एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के तहत दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 5,500–6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज करने पर जोर दिया गया।

पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में पराली आधारित बायोमास पेलेट्स के उपयोग को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 1 नवंबर 2026 तक न्यूनतम 30 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया।

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की रोकथाम, लैंडफिल स्थलों पर आग नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई।

बैठक में उद्योगों के लिए नए उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि निर्धारित पीएम उत्सर्जन सीमा का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बंदी सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी एजेंसियां सख्त प्रवर्तन, नियमित समीक्षा और त्वरित सुधारात्मक कदमों के साथ निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

राज्यसभा नामांकन विवाद में कांग्रेस की अगली रणनीति पर नजर, 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प खुला

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित नामांकन विवाद में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद अब राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस की अगली रणनीति क्या होगी और क्या मीनाक्षी नटराजन चुनाव याचिका दायर कर इस मामले को आगे बढ़ाएंगी।

हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज ही आया है और फिलहाल मीनाक्षी नटराजन द्वारा चुनाव याचिका दायर किए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस की विधिक टीम सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी रणनीति तय कर सकती है।

हाई कोर्ट में चुनौती देने का रास्ता खुला

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका के माध्यम से मामले को आगे बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस इस मामले को आगे बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर नामांकन निरस्तीकरण की वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

राज्यसभा चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल गया

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने का सीधा असर राज्यसभा चुनाव की दिशा पर पड़ा। कांग्रेस की प्रमुख दावेदार के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल गए और भारतीय जनता पार्टी के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का मार्ग प्रशस्त हो गया।

कांग्रेस ने लगाए लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने के आरोप

कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। पार्टी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से विपक्षी प्रतिनिधित्व प्रभावित हुआ है और लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचा है। वहीं भाजपा ने निर्वाचन प्रक्रिया को नियमसम्मत और वैधानिक बताते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है।

अब सबकी नजर कांग्रेस के अगले कदम पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया, नामांकन की वैधता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े व्यापक सवाल भी इससे जुड़े हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस हाई कोर्ट का रुख करती है या नहीं, इस पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा को तत्काल राजनीतिक लाभ मिला है, जबकि कांग्रेस के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अपनी रणनीति तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

इन्वेस्टर कनेक्ट में हैदराबाद के निवेशकों को मुख्यमंत्री साय का न्योता
आईटी, टेक्सटाइल, डेटा सेंटर, फार्मा के क्षेत्र में खुली 7,800 रोजगार की राह

  हैदराबाद / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हैदराबाद में आयोजित 'छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्टÓ कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों की सात प्रमुख कंपनियों ने 9,580 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए हैं, जिनसे 7,800 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने देश के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा विकसित भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में छत्तीसगढ़ तेजी से उभर रहा है और राज्य में निवेशकों के लिए 'रेड कारपेटÓ बिछा हुआ है।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन सहित दक्षिण भारत के कई बड़े उद्योगपति, निवेशक और कारोबारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु के साथ-साथ जापान और दक्षिण कोरिया में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। राज्य सरकार इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज निवेश के लिए देश के सबसे बेहतर राज्यों में से एक बनकर उभर रहा है। राज्य में उद्योगों के लिए आसान प्रक्रियाएं, सिंगल विंडो व्यवस्था, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और उद्योग अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में उद्योग स्थापित करने का आमंत्रण दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद ने आईटी, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ भी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है और दोनों राज्यों के उद्योगपति एवं उद्यमी मिलकर नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ देश का सबसे उपयुक्त लॉजिस्टिक हब बनने की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सात राज्यों से घिरा हुआ है और 60 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। रेलवे नेटवर्क, भारतमाला परियोजना, एयर कार्गो सुविधाओं तथा खनिज संसाधनों की उपलब्धता उद्योगों के लिए इसे अत्यंत अनुकूल बनाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र में राज्य को 3.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिससे प्रदेश देश के प्रमुख पावर हब के रूप में उभर रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सात प्रमुख कंपनियों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए 'इन्विटेशन टू इन्वेस्टÓ (ऑफर लेटर) प्रदान किए। इनमें डेटा सेंटर, सीमेंट, सेमीकंडक्टर एवं जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल और डेयरी प्रसंस्करण क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियां शामिल हैं।

सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव हाइपरनेक्स्ट डाटा सेंटर लिमिटेड की ओर से प्राप्त हुआ, जिसने छत्तीसगढ़ में भारत का पहला समर्पित डिजास्टर रिकवरी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करने के लिए ?4,200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया। इस परियोजना से राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और छत्तीसगढ़ डेटा सेंटर क्षेत्र का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकेगा। इस परियोजना से लगभग 250 रोजगार सृजित होंगे।

फीग्रेड एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने सीमेंट क्षेत्र में 2,912 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 4,000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं निवाई लैब्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?1,000 करोड़ के निवेश से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जीपीयू इंफ्रास्ट्रक्चर, एडवांस कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर असेंबली से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव दिया। इससे राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा एवं लगभग 200 रोजगार सृजित होंगे।

सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण क्षेत्र की एसजी मार्ट लिमिटेड ने 700 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है, जिससे लगभग 450 लोगों को रोजगार मिल सकता है।
श्री सरवणा मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने ?528 करोड़ के निवेश से अत्याधुनिक टेक्सटाइल और परिधान निर्माण इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना से लगभग 2,500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की काबरा ड्रग्स ने 200 करोड़ रुपये तथा डेयरी क्षेत्र की दिनशॉज़ डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने 40 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन दोनों परियोजनाओं से क्रमश: लगभग 250 और 150 रोजगार सृजित होंगे।

हैदराबाद दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने देश की कई अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठकें कीं। इनमें पेज इंडस्ट्रीज और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स, एक्सिस एनर्जी, सेल्कॉन ग्रुप, मैग्नमविंग्स जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल रहीं। बैठकों में छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और राज्य सरकार की उद्योग-अनुकूल नीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके अलावा स्वामी नारायण गुरुकुल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर रायपुर के टाटीबंध में 650 बिस्तरों वाले चैरिटेबल अस्पताल की स्थापना के प्रस्ताव पर चर्चा की।

इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में आईटी, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस एवं रक्षा, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और उन्नत विनिर्माण जैसे भविष्य के उद्योगों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। निवेशकों ने इन क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई।

कार्यक्रम में सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर सुश्री रितु सैन, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक श्री विश्वेश कुमार, उद्योग विभाग के संचालक श्री प्रभात मलिक एवं अन्य अधिकारी भी शामिल रहे।

प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री ने जताया आभार, कहा— विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिली नई शक्ति

रायपुर/शौर्यपथ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए एक विस्तृत पत्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व, सुशासन, गरीब कल्याण और आत्मनिर्भर भारत की सोच ने छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा प्रदान की है तथा राज्य के दूरस्थ, आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक विकास की रोशनी पहुंचाई है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में कहा कि केंद्र सरकार की प्रभावी रणनीति और सुरक्षा बलों को मिले संसाधनों के कारण छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में लगातार सफलता प्राप्त कर रहा है। विशेष केंद्रीय सहायता योजना के तहत राज्य को 2,080 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिली है, वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 3,222 किलोमीटर सड़कें और 88 बड़े पुलों के निर्माण से विकास एवं सुरक्षा दोनों को मजबूती मिली है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों को वित्तीय रूप से अधिक सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ाई गई, जिससे पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को 3.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर हिस्सेदारी तथा 1.43 लाख करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त पूंजीगत निवेश, जीएसटी क्षतिपूर्ति और विभिन्न विकास योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, रेल और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए 35,766 करोड़ रुपये तथा विभिन्न सड़क परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ अंचल अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 1,247 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे हजारों गांवों को डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

ग्रामीण और गरीब कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 24.50 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 19.70 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से प्रदेश के लगभग 1.99 करोड़ लोगों को हर माह खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं उज्ज्वला योजना के तहत 39.54 लाख महिलाओं को नि:शुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं।

कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए बड़ी राहत बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 25.51 लाख किसानों को 10,784 करोड़ रुपये की सहायता सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, कृषि सिंचाई योजना और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी योजनाओं ने किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आदिवासी कल्याण को केंद्र सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और वन अधिकारों की मान्यता जैसी पहलों से हजारों आदिवासी परिवार लाभान्वित हुए हैं। प्रदेश में 4.83 लाख व्यक्तिगत और 48 हजार से अधिक सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लखपति दीदी, बिहान, सखी वन स्टॉप सेंटर, सक्षम आंगनबाड़ी और स्व-सहायता समूहों को मिली आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन रही हैं। वहीं आयुष्मान भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने पर्यटन, खेल, उद्योग, ग्रामोद्योग, हस्तशिल्प, ऊर्जा, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में भी केंद्र सरकार के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आज विकास, निवेश, सुशासन और जनकल्याण के नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का सपना भी तेजी से साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्र के अंत में छत्तीसगढ़ की साढ़े तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सहयोग भविष्य में भी प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

रायपुर, । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज एक दिवसीय हैदराबाद प्रवास पर रहेंगे, जहां वे राज्य में निवेश आकर्षित करने और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से आयोजित इन्वेस्टर मीट में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य में उद्योग, रोजगार और निवेश की नई संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जारी दौरा कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री श्री साय गुरुवार शाम 6:15 बजे नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन से रवाना होकर 7:00 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचेंगे। इसके बाद वे इंडिगो की उड़ान 6E-6601 से शाम 7:45 बजे हैदराबाद के लिए प्रस्थान करेंगे और रात 10:05 बजे राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, हैदराबाद पहुंचेंगे। वहां से वे होटल पार्क हयात, बंजारा हिल्स में रात्रि विश्राम करेंगे।

शुक्रवार 12 जून को मुख्यमंत्री सुबह से दोपहर तक होटल पार्क हयात में आयोजित इन्वेस्टर मीट में भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न औद्योगिक समूहों, निवेशकों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक परियोजनाओं और रोजगार सृजन से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 3:50 बजे होटल से एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे और इंडिगो की उड़ान 6E-7248 से शाम 6:00 बजे रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। वे 7:50 बजे स्वामी विवेकानंद विमानतल, रायपुर पहुंचेंगे तथा रात 8:20 बजे मुख्यमंत्री निवास, सिविल लाइन रायपुर पहुंचकर दौरा समाप्त करेंगे।

राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री का यह दौरा छत्तीसगढ़ को निवेश के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा उद्योगों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2026 रिपोर्ट के अनुसार, नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के आधार पर भारत वर्तमान में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर भारत ने अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है।

हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के कारण नॉमिनल जीडीपी रैंकिंग में भारत एक स्थान नीचे खिसक गया है, लेकिन देश की वास्तविक आर्थिक मजबूती और विकास दर पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आज भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

पिछले पांच वर्षों में भारत की वैश्विक जीडीपी रैंकिंग

2022: भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का गौरव हासिल किया।

2023: तेज आर्थिक विकास दर के दम पर भारत 5वें स्थान पर कायम रहा।

2024: ब्रिटेन पर बढ़त बनाए रखते हुए भारत ने 5वां स्थान बरकरार रखा।

2025: मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक सुधारों के चलते भारत कुछ समय के लिए 4थे स्थान तक पहुंचा और जापान को पीछे छोड़ने में सफल रहा।

2026: विनिमय दरों में बदलाव के कारण भारत फिलहाल 6वें स्थान पर है, जबकि जापान और ब्रिटेन उससे आगे निकल गए हैं।

तेज विकास दर से दुनिया का ध्यान भारत पर

अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, डिजिटल क्रांति, विनिर्माण क्षेत्र में विस्तार और आधारभूत संरचना पर हो रहा बड़ा निवेश है। यही कारण है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत लगातार विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान

IMF और विभिन्न वैश्विक आर्थिक संस्थानों के आकलन के अनुसार, यदि वर्तमान विकास दर और आर्थिक सुधारों की गति बनी रहती है तो वर्ष 2030 तक भारत 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। यह उपलब्धि भारत को अमेरिका और चीन के बाद वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

नई दिल्ली: 9 जून 2026 की तारीख देश के इतिहास में एक ऐसे सुनहरे अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जहां एक तरफ भारत ने वैश्विक राजनीति और रणनीतिक ऊंचाइयों को छुआ, तो दूसरी तरफ खेल के मैदान और बुनियादी ढांचे में नए कीर्तिमान स्थापित किए। आइए रुख करते हैं आज की उन बड़ी और धमाकेदार राष्ट्रीय सुर्खियों पर, जिन्होंने पूरे देश को गौरव से भर दिया:

? ऐतिहासिक राजनीतिक मील का पत्थर: मोदी सरकार के 12 साल बेमिसाल

भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन बेहद खास रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अपने 12 वर्ष (3 कार्यकाल) का ऐतिहासिक सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। याद दिला दें कि 9 जून 2024 को उन्होंने अपने तीसरे कार्यकाल की शपथ ली थी, जिसके बाद से देश निरंतर विकास की नई परिभाषाएं गढ़ रहा है।

?️ रणनीतिक और बुनियादी ढांचा बुलेटिन: ज़ोजिला में कामयाबी, लद्दाख अब दूर नहीं!

ज़ोजिला टनल (Zojila Tunnel) में बड़ी सफलता: कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में एक-दूसरे से जोड़े रखने वाली देश की सबसे रणनीतिक ज़ोजिला सुरंग परियोजना में आज एक बहुत बड़ा 'ब्रेकथ्रू' (Breakthrough) हासिल कर लिया गया। अब कड़कड़ाती सर्दियों और भारी बर्फबारी में भी लद्दाख तक भारतीय सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

डिजिटल हुआ सीमा पार व्यापार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में लैंड पोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (LPMS) का भव्य शुभारंभ किया। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के 15 लैंड पोर्ट्स पर सीमा पार होने वाले व्यापार और यात्रियों की आवाजाही को पूरी तरह से पारदर्शी और पेपरलेस बनाएगा।

? स्पोर्ट्स डेस्क: खेल के मैदान से आईं दो बड़ी स्वर्णिम खुशियां!

खेल प्रतियोगिता भारत का प्रदर्शन प्रतिद्वंदी टीम / स्कोर उपलब्धि

सैफ (SAFF) महिला फुटबॉल शानदार जीत बांग्लादेश को 3-1 से हराया छठी बार चैंपियन ?

पुरुष अंडर-18 एशिया कप हॉकी स्वर्ण पदक जापान को फाइनल में दी शिकस्त तीसरी बार खिताब ?

महिला अंडर-18 एशिया कप हॉकी कांस्य पदक दक्षिण कोरिया को 3-0 से रौंदा तीसरा स्थान ?

? नीतिगत और सरकारी घोषणाएं: योजनाओं में बड़े बदलाव

? ₹33,660 करोड़ की 'भव्य' (BHAVYA) योजना: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने देश में 100 विश्व स्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित करने के उद्देश्य से BHAVYA डिजिटल पोर्टल को लॉन्च कर दिया है।

? कोल एक्सचेंज रूल्स, 2026: कोयला मंत्रालय ने देश के कोयला बाजार में पारदर्शिता और बाजार-संचालित व्यापार को बढ़ावा देने के लिए नए नियमों को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया।

? उज्ज्वला योजना में कटौती: केंद्र सरकार ने बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या सालाना 9 से घटाकर 4 कर दी है। अब लाभार्थियों को केवल शुरुआती 4 रिफिल पर ही ₹300 की सब्सिडी दी जाएगी।

⚖️ रक्षा और न्याय व्यवस्था: SIPRI की रिपोर्ट और एमपी का सियासी घमासान

परमाणु ताकत में बढ़ा भारत का दम: स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि भारत का परमाणु हथियार भंडार बढ़कर 190 वारहेड्स तक पहुंच गया है, और भारत दुनिया का 5वां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना हुआ है।

राज्यसभा चुनाव पर अदालती साया: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सूबे में भारी राजनीतिक घमासान मच गया है, जिसके बाद कांग्रेस ने इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

?️ मौसम और अन्य हादसे: कहीं राहत, कहीं आफत

मौसम का डबल रोल: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में अपनी रफ्तार पकड़ ली है। इसके विपरीत, दिल्ली, यूपी समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाके अब भी भीषण गर्मी और लू (Heatwave) के टॉर्चर से जूझ रहे हैं।

विशाखापत्तनम स्टील प्लांट में धमाका: विशाखापत्तनम के राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (RINL) प्लांट में एक दुखद ब्लास्ट के कारण 8 श्रमिकों की जान चली गई। सरकार ने हादसे की गहराई से जांच के लिए तुरंत 3 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है।

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CPA नॉर्थ ज़ोन सम्मेलन संपन्न, विकसित भारत-2047 के लिए चार अहम संकल्प पारित

जनभागीदारी, विधायकों के प्रशिक्षण, AI के उपयोग और विधायी निगरानी को मिलेगा बढ़ावा

चंडीगढ़/नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में लगातार होने वाले व्यवधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जनप्रतिनिधियों को अपने आचरण, संवाद और सार्थक बहस के माध्यम से जनता का विश्वास मजबूत करना होगा।

कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीजन ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) के दो दिवसीय सम्मेलन के समापन अवसर पर श्री बिरला ने कहा कि जनता ने अपने प्रतिनिधियों को लोकतांत्रिक संस्थाओं में भेजा है, इसलिए उनके व्यवहार और कार्यशैली का सीधा प्रभाव समाज पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि "जैसा नेतृत्व होगा, वैसा ही समाज का स्वरूप भी विकसित होगा।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य केवल मजबूत संसदीय और विधायी संस्थाओं के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। इसके लिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने, आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने, विधायकों की क्षमता विकसित करने और संविधान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

राज्यों के विकास से ही बनेगा विकसित भारत

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के संघीय ढांचे में राज्यों और केंद्र सरकार का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यों का समग्र विकास ही राष्ट्रीय विकास का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि नई चुनौतियों का समाधान नए विचारों और नवाचारों से ही संभव है तथा सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए सुझाव इस दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।

उन्होंने युवाओं और महिलाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में अधिक भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि छात्र जीवन से ही संविधान, लोकतंत्र और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता विकसित की जानी चाहिए।

12 राज्यों के प्रतिनिधियों ने की भागीदारी

8-9 जून को चंडीगढ़ में आयोजित इस सम्मेलन में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित 12 राज्यों की विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण तथा अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

सम्मेलन में पारित हुए चार प्रमुख संकल्प

1. जन-जागरूकता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा

आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों और विधायकों के बीच संवाद बढ़ाने तथा तकनीक के जिम्मेदार उपयोग के जरिए जागरूक और सशक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया।

2. विधायकों की क्षमता निर्माण

निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, अनुसंधान सहयोग और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को अधिक सक्षम बनाने पर सहमति बनी।

3. विधायी निगरानी और जनविश्वास

नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में नागरिकों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया गया।

4. AI और डिजिटल तकनीकों का विस्तार

सार्वजनिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया।

मुख्य संदेश

चंडीगढ़ सम्मेलन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विकसित भारत-2047 का मार्ग मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं, जनभागीदारी, तकनीकी नवाचार और जवाबदेह शासन से होकर गुजरता है। सम्मेलन में पारित चारों संकल्प आने वाले वर्षों में देश की संसदीय और विधायी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और जनोन्मुख बनाने की दिशा तय करेंगे।

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भले ही कई राज्यों में मजबूत स्थिति में हो, लेकिन दक्षिण भारत के कई प्रमुख राज्यों में पार्टी अभी भी व्यापक जनाधार बनाने के लिए संघर्ष कर रही है। उपलब्ध विधानसभा आंकड़ों के अनुसार केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और झारखंड की कुल 971 विधानसभा सीटों में भाजपा के पास केवल 97 विधायक हैं, जो कुल सीटों का लगभग 10 प्रतिशत है।

केरल और तमिलनाडु में भाजपा का सीमित प्रभाव

आंकड़ों के अनुसार केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के केवल 3 विधायक हैं, जबकि तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा की उपस्थिति मात्र 1 विधायक तक सीमित है। यह दर्शाता है कि इन राज्यों में पार्टी अभी भी क्षेत्रीय और पारंपरिक दलों के मजबूत प्रभाव को चुनौती नहीं दे पाई है।

कर्नाटक बना सबसे बड़ा आधार

दक्षिण भारत में भाजपा का सबसे मजबूत प्रदर्शन कर्नाटक में दिखाई देता है। 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 62 विधायक हैं। हालांकि पार्टी सत्ता से बाहर है, लेकिन विपक्ष के रूप में उसकी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

आंध्र प्रदेश में भी सीमित प्रतिनिधित्व

175 सीटों वाली आंध्र प्रदेश विधानसभा में भाजपा के केवल 8 विधायक हैं। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का दबदबा होने के कारण भाजपा को अभी लंबा राजनीतिक सफर तय करना है।

झारखंड और पंजाब में भी चुनौती

झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि पंजाब की 117 सीटों में भाजपा के केवल 2 विधायक हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रभाव के बीच भाजपा का संगठन विस्तार अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

राज्यवार स्थिति

राज्य

कुल विधानसभा सीटें    भाजपा विधायक  केरल

140    3

तमिलनाडु  234      1

कर्नाटक  224

62

आंध्र प्रदेश   175

8

पंजाब  117

2

झारखंड   81

21

कुल    971

97

राजनीतिक विश्लेषण

इन छह राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा का राष्ट्रीय विस्तार होने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में उसे अभी भी मजबूत क्षेत्रीय दलों, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से केरल, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी का जनाधार सीमित है, जबकि कर्नाटक और झारखंड भाजपा के लिए अपेक्षाकृत मजबूत आधार बने हुए हैं।

 

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