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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की पहल पर छत्तीसगढ़-ओडिशा के बीच अहम बैठक, साझा जल प्रबंधन और दीर्घकालिक समझौते पर जोर
रायपुर । वर्षों से लंबित महानदी जल बंटवारे के मुद्दे को सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा देने के उद्देश्य से गुरुवार को नई दिल्ली स्थित श्रमशक्ति भवन में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू सहित दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कहा कि महानदी किसी विवाद का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा की साझा समृद्धि का आधार है। उन्होंने कहा कि महानदी का जल दोनों राज्यों के किसानों, पेयजल व्यवस्था, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। इसलिए इस विषय का समाधान टकराव नहीं, बल्कि सहयोग और आपसी विश्वास के आधार पर होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस बैठक को विवाद की निरंतरता नहीं, बल्कि समाधान की नई शुरुआत के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के बीच बने संवाद और सहयोग के सकारात्मक माहौल से स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ओडिशा की सिंचाई, पेयजल और हीराकुंड परियोजना की आवश्यकताओं का पूरा सम्मान करता है। उसी प्रकार छत्तीसगढ़ के किसानों, आदिवासी क्षेत्रों, सूखा प्रभावित इलाकों और भविष्य की विकास जरूरतों को भी समान संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के हित एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं।
मुख्यमंत्री साय ने सुझाव दिया कि दोनों राज्यों के विशेषज्ञों द्वारा किए गए वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर भविष्य उन्मुख जल प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाए। विशेष रूप से कम वर्षा वाले वर्षों के लिए साझा जल प्रबंधन प्रणाली तैयार करने और जल उपलब्धता, उपयोग तथा भविष्य की आवश्यकताओं की नियमित समीक्षा के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करने पर उन्होंने जोर दिया।
उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर अधिकांश विषयों का समाधान आपसी समन्वय से किया जाए तथा केवल नीतिगत मामलों को ही मंत्रिस्तरीय स्तर पर लाया जाए। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और समयबद्ध होगी।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय जल आयोग से अनुरोध किया कि वे निष्पक्ष तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और दोनों राज्यों के बीच दीर्घकालिक सहमति आधारित समझौते का प्रारूप तैयार कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सहकारी संघवाद की भावना ने वर्षों पुराने जटिल मुद्दों के समाधान के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में दोनों राज्य मिलकर ऐसा समाधान विकसित करेंगे, जिससे किसानों, नागरिकों, उद्योगों, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों का जल भविष्य सुरक्षित एवं समृद्ध हो सके।
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव एवं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और 209 सदस्यीय जनजातीय प्रतिनिधिमंडल का ऐतिहासिक अभिनंदन, राष्ट्रपति ने जताई बस्तर दशहरा में शामिल होने की इच्छा
नई दिल्ली / रायपुर । भारतीय लोकतंत्र के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर राष्ट्रपति भवन में गुरुवार को ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला, जिसने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था को राष्ट्रीय गौरव के शिखर पर स्थापित कर दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकारों, पारंपरिक मांझी-चालकी नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों एवं विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में विशेष सम्मान किया गया।इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया। समारोह का सबसे भावनात्मक क्षण तब आया जब राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका स्वागत किया। उनकी इस आत्मीयता ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावुक कर दिया और यह दृश्य राष्ट्रपति भवन के इतिहास में एक यादगार अध्याय बन गया।
राष्ट्रपति बोलीं— बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की नई पहचान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम के आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा यहां शिक्षा, सड़क, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मांझी-चालकी व्यवस्था सामाजिक समरसता, सामुदायिक नेतृत्व और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत आधारशिला है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि "मांझी मेरे परिवार का हिस्सा हैं, मेरे पिता भी मांझी थे," जिससे उनका जनजातीय समाज से आत्मीय जुड़ाव झलकता है।
बस्तर दशहरा में आने की जताई इच्छा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराएं और भगवान जगन्नाथ से जुड़ी इसकी सांस्कृतिक विरासत उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती है।
अमित शाह बोले— पहली बार राष्ट्रपति भवन में देखा बस्तर का ऐसा सांस्कृतिक वैभव
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे अनेक बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री: यह पूरे छत्तीसगढ़ के सम्मान का क्षण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल का सम्मान पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाई है और स्थानीय कलाकारों व लोक परंपराओं को नया मंच प्रदान किया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
300 वर्ष पुरानी 'झिटकू-मिटकी' की कलाकृति की भेंट
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा 'झिटकू-मिटकी' पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, समर्पण और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। बस्तर की लोकमान्यता के अनुसार झिटकू और मिटकी ने अकाल के समय अपने त्याग और प्रेम से अमिट मिसाल कायम की थी और आज भी उन्हें श्रद्धापूर्वक 'खोड़िया राजा' और 'गप्पा देई' के रूप में पूजा जाता है।
प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राप्त की। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था और लोककला को राष्ट्रीय मंच पर मिली अभूतपूर्व प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गया।
नई दिल्ली /
लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार को काफी हंगामेदार रही। देशभर में छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध से शुरू हुआ सदन का माहौल बाद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर केंद्रित हो गया। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बावजूद अंतत: विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए सहमति बनी और सरकार ने चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे करने का ऐलान किया।
शुरुआत में विपक्ष का हंगामा, दोपहर तक स्थगित रही कार्यवाही
संसद के मानसून सत्र में मंगलवार सुबह जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी दलों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से जवाब मांगा और छात्रों के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के विरोध और लगातार व्यवधान को देखते हुए कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया।
गतिरोध खत्म होने के बाद शुरू हुई एंटी-पेपर लीक बिल पर चर्चा
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनी और महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा प्रारंभ हुई।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अनुचित साधनों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
विपक्ष ने पीएम और गृहमंत्री की अनुपस्थिति का उठाया मुद्दा
विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए।
विपक्ष ने छात्र आंदोलनों, परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की। प्रियंका गांधी ने चर्चा के दौरान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और छात्रों के साथ न्याय की मांग की।
विधेयक पर चर्चा के लिए बढ़ाया गया समय
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में घोषणा की कि विपक्ष की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे किया जाएगा, ताकि सभी दलों के सांसद अपने विचार रख सकें। इस विधेयक पर सदन में कुल 91 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिन पर चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष का विरोध
कार्यवाही के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को लेकर की गई टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में संबंधित टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने की दिशा में बड़ा कदम
लोकसभा में पेश यह संशोधन विधेयक प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बडिय़ों, पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और लाखों अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी।
वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कदम उठाना भी जरूरी है। लोकसभा में मंगलवार की कार्यवाही ने साफ कर दिया कि परीक्षा सुधार और पेपर लीक का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।
राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर किया इस्तीफा, छात्रों के नाम संदेश में बोले धर्मेंद्र प्रधान—'युवाओं की आकांक्षाओं का हमेशा रहेगा सम्मान'
नई दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्रालय NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में छात्रों के आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे समय में सरकार ने मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंपते हुए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।
इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान
अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।
प्रधान ने कहा कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर पूरा विश्वास है और देश के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का उन्होंने हमेशा सम्मान किया है। उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं।
NEET विवाद से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन
देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालिया आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होते ही पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।
इसी बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।
अब सबकी नजर शिक्षा मंत्रालय की नई दिशा पर
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालना होगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में नई प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्रों का आंदोलन नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बने सोनम वांगचुक ने 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन प्रदर्शन अब भी जारी है। दूसरी ओर, आंदोलन की प्रमुख मांगों को लेकर सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच आज संविधान क्लब में उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो गई है।
सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में दोपहर 12:30 बजे दूसरे दौर की औपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक में छात्रों की मांगों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने, NEET पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने तथा अन्य प्रमुख मांगों पर विचार करने का लिखित आश्वासन दिया है। इसी आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया।
हालांकि, CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। संगठन के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अडिग हैं। जंतर-मंतर पर धरना जारी है और देशभर में समर्थन प्रदर्शन आयोजित करने का भी ऐलान किया गया है।
उधर, राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जंतर-मंतर, संविधान क्लब और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई प्रमुख मार्गों और मेट्रो स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
अब देशभर की निगाहें सरकार और CJP के बीच चल रही वार्ता पर टिकी हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो आंदोलन के समाधान की संभावना बन सकती है, लेकिन फिलहाल "अनशन खत्म, प्रदर्शन जारी" की स्थिति बनी हुई है।
नई दिल्ली। निजी भूमि पर बने मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंधन और कथित नीलामी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार तथा मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका 237 वंशानुगत पुजारियों और निजी मंदिरों के मालिकों की ओर से दायर की गई है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की शिकायतों पर संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि निजी भूमि पर बने मंदिरों की संपत्तियों की सरकारी स्तर पर नीलामी की जा रही है और वर्ष 1974 के एक शासनादेश के आधार पर जिला कलेक्टरों को इन मंदिरों का प्रबंधक बना दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये मंदिर उनके पूर्वजों द्वारा निजी भूमि पर स्थापित किए गए थे और हमेशा से निजी मंदिर रहे हैं। उनका आरोप है कि अब प्रशासन मंदिरों की जमीन की नीलामी की कार्रवाई कर रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने सवाल किया कि यदि वर्ष 1974 से ही राजस्व अभिलेखों में जिला कलेक्टरों का नाम दर्ज था, तो याचिकाकर्ताओं ने इतने वर्षों तक इस पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई।
खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि "कई मामलों में पुजारी मंदिरों की संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। वास्तव में यह संपत्ति देवता की होती है।"
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रथम दृष्टया इस विवाद के समाधान के लिए दीवानी अदालत (सिविल कोर्ट) का रास्ता अधिक उपयुक्त हो सकता है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने अपने मथुरा दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 22 वर्ष पहले मंदिर की स्थिति काफी खराब थी, जबकि हालिया दौरे में सरकारी प्रबंधन के बाद रखरखाव में उल्लेखनीय सुधार दिखाई दिया।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि एक स्वतंत्र प्राधिकरण या अधिकरण गठित किया जाए, जो यह तय करे कि संबंधित मंदिर निजी हैं या सार्वजनिक। साथ ही वर्ष 1974 के शासनादेश और उससे जुड़े राजस्व अभिलेखों को रद्द करने, वंशानुगत पुजारियों के नाम पुनः दर्ज करने तथा मंदिर की संपत्तियों की नीलामी, ध्वस्तीकरण या किसी भी प्रकार की सरकारी दखलअंदाजी पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की गई है।
ध्यान दें: सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में केवल नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं की मांगों पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।
देहरादून । उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' महा-संवाद में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा प्रणाली गंभीर संकट से गुजर रही है और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में अब तक करीब 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े मामलों के बावजूद अब तक किसी भी प्रमुख दोषी को सजा क्यों नहीं मिली। उनके अनुसार, इससे युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकारी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है।
'शिक्षा नहीं, वसूली का तंत्र बन गई है व्यवस्था'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय परीक्षा शुल्क के माध्यम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर छात्रों से इतनी फीस वसूली जा रही है कि उसका आंकड़ा शिक्षा बजट के बराबर पहुंच जाता है। राहुल गांधी ने इसे "एक्सटॉर्शन मॉडल" बताते हुए सरकार पर शिक्षा के व्यावसायीकरण का आरोप लगाया।
'1 प्रतिशत को फायदा, 99 प्रतिशत छात्र परेशान'
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था का लाभ केवल 1 प्रतिशत ऐसे लोगों को मिलता है जो भ्रष्टाचार और पेपर लीक के नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 99 प्रतिशत ईमानदार और मेहनती छात्र इसकी कीमत चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत एक पेपर लीक से बर्बाद हो जाती है, जो युवाओं के साथ बड़ा अन्याय है।
NEET अभ्यर्थियों को दिया भरोसा
नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे 24 लाख से अधिक छात्रों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र खुद को अकेला न समझें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पूरा विपक्ष छात्रों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ता रहेगा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाता रहेगा।
'यह राजनीतिक सभा नहीं, छात्रों की आवाज है'
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि 'छात्रों की गूंज' कोई चुनावी या पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं, बल्कि युवाओं की समस्याओं, संघर्षों और भविष्य पर केंद्रित संवाद है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों की चिंताओं को सुनना और उनके मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना लोकतंत्र की जिम्मेदारी है।
सियासी संदेश भी स्पष्ट
राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर कांग्रेस युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष के हमले आगामी राजनीतिक विमर्श में भी प्रमुख मुद्दा बने रहने की संभावना है।
नई दिल्ल / केंद्र सरकार ने शुक्रवार को विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश और सुशासन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के लिए ₹19,400 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। वहीं, नीति आयोग ने राज्यों के निवेश माहौल का आकलन करने वाली बहुप्रतीक्षित 'निवेश अनुकूलता सूचकांक (Investment Friendliness Index)' रिपोर्ट जारी की। स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
हरियाणा को ₹14,700 करोड़ की विकास सौगात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल भारत के हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा मिशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने ₹14,700 करोड़ से अधिक लागत की रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़क संपर्क, शिक्षा एवं अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
चंडीगढ़ में ₹4,700 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का शुभारंभ
केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा संस्थानों के उन्नयन, सड़क संपर्क और शहरी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से ₹4,700 करोड़ से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की शुरुआत की। इन योजनाओं का उद्देश्य नागरिक सुविधाओं में सुधार और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
नीति आयोग ने जारी किया 'निवेश अनुकूलता सूचकांक'
नीति आयोग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण का मूल्यांकन करने वाली 'Investment Friendliness Index' रिपोर्ट जारी की। यह सूचकांक राज्यों के प्रशासनिक सुधार, उद्योग-अनुकूल नीतियों, निवेश प्रक्रियाओं की सरलता और कारोबारी वातावरण का व्यापक आकलन प्रस्तुत करता है। सरकार का मानना है कि यह रिपोर्ट राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा की समीक्षा बैठक सम्पन्न
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में 16-17 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का समापन हुआ। बैठक में रोग निगरानी प्रणाली, सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, महामारी नियंत्रण, टीकाकरण और स्वास्थ्य आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की गई। राज्यों के अधिकारियों के साथ भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
भारतीय वन सेवा अधिकारियों से राष्ट्रपति का संवाद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारतीय वन सेवा (IFoS) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्हें देश की प्राकृतिक विरासत का संरक्षक बताया। उन्होंने अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के प्रति समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।
विकास और सुशासन की दिशा में अहम दिन
17 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की पहलें देश में हरित परिवहन, आधुनिक अवसंरचना, निवेश प्रोत्साहन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन निर्णयों से देश की विकास गति को और मजबूती मिलेगी तथा राज्यों में प्रतिस्पर्धात्मक निवेश वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।
हरियाणा के जींद में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास, स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन को मिली नई दिशा
जींद । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के जींद में आयोजित विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह की झलकियां साझा करते हुए देशवासियों को एक ऐतिहासिक उपलब्धि का साक्षी बनने पर बधाई दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसे देश के रेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों की प्रतिभा तथा समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इसे "आत्मनिर्भर भारत" और भविष्य के लिए तैयार आधुनिक परिवहन व्यवस्था का प्रतीक बताया।
स्वच्छ और हरित भारत की ओर बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन तकनीक आधारित यह ट्रेन भारत की तकनीकी क्षमता, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित यह पहल न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगी।
उन्होंने कहा, "देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर मुझे गर्व की अनुभूति हो रही है। यह स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।"
21वीं सदी की तकनीक का प्रतीक बनी हाइड्रोजन ट्रेन
प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई यह ट्रेन भारत को भविष्य की उन्नत परिवहन तकनीकों की दिशा में आगे ले जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परियोजना की सफलता से देश में स्वच्छ ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि ट्रेन की तकनीकी विशेषताओं और इसकी क्षमता के बारे में जानकर हर भारतीय गर्व महसूस करेगा।
हरियाणा की धरती को बताया वीरता और आस्था की भूमि
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शक्तिपीठ माता जयंती के आशीर्वाद का उल्लेख करते हुए जींद क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, वीरतापूर्ण और आध्यात्मिक विरासत की सराहना की। उन्होंने कार्यक्रम में उमड़े जनसमूह के उत्साह को विकास और प्रगति की नई ऊर्जा बताया।
दूरदर्शी नीतियों का परिणाम: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि देश आज भी पुरानी सोच और व्यवस्थाओं पर निर्भर होता, तो वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर रेलवे व्यवस्था पर पड़ता। लेकिन बीते वर्षों में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन के क्षेत्र में दूरदर्शी निर्णय लिए हैं, जिनका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल समस्याओं की पहचान नहीं करती, बल्कि समय रहते उनके स्थायी समाधान भी तैयार करती है, जिससे देश को दीर्घकालिक लाभ मिलता है।
नई ऊर्जा, नई तकनीक और नया भारत
जींद में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से आगे बढ़कर हरित और टिकाऊ तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
