January 23, 2026
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भारत

भारत (933)

   नई दिल्ली / भाजपा मुख्यालय में आज एक ऐतिहासिक समारोह हुआ, जहां 45 वर्षीय नितिन नबीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, "नितिन नबीन मेरे बॉस हैं। संगठन के मामलों में वे मेरा ष्टक्र (चरित्र रिपोर्ट) लिखेंगे और मैं उनके मार्गदर्शन में कार्य करूंगा।" यह बयान भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र और युवा नेतृत्व को मजबूत करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
समारोह में पीएम मोदी ने नितिन नबीन को "मिलेनियल" नेता करार दिया, जो आधुनिक तकनीक और बदलती अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। नबीन भाजपा के 12वें और अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका निर्विरोध चयन हुआ, जिसमें उनके पक्ष में 37 नामांकन सेट दाखिल किए गए। यह चयन पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है।

पीएम मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
हृष्ठ्र में तालमेल : नबीन की जिम्मेदारी केवल भाजपा तक सीमित नहीं, बल्कि हृष्ठ्र सहयोगियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
विकसित भारत का संकल्प : अगले 25 वर्षों को निर्णायक बताते हुए पीएम ने विश्वास जताया कि नबीन के नेतृत्व में पार्टी 'विकसित भारतÓ लक्ष्य हासिल करेगी।
परिवारवाद पर प्रहार : राजनीति में परिवारवाद को अभिशाप बताते हुए मोदी ने कहा, "मैं 1 लाख ऐसे युवाओं को लाना चाहता हूं, जिनके परिवार का कोई राजनीतिक इतिहास न हो।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
बिहार से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले नेता नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार (2006, 2010, 2015, 2020, 2025) विधायक चुने गए हैं। संगठन में उनका लंबा अनुभव रहा- वे छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रभारी, भारतीय जनता युवा मोर्चा (क्चछ्वङ्घरू) के राष्ट्रीय महासचिव और बिहार सरकार में पथ निर्माण व नगर विकास मंत्री रह चुके हैं। जेपी नड्डा की जगह लेते हुए वे पार्टी को नई ऊर्जा प्रदान करने को तैयार हैं।

कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जैसे योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल और हिमंत बिस्वा सरमा उपस्थित रहे। भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह नियुक्ति 2029 लोकसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है, जिसमें युवा-केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जाएगा।

इस समाचार को और आकर्षक बनाने के लिए क्या कोई विशेष कोण या अतिरिक्त विवरण जोडऩा चाहेंगे, जैसे बिहार-छत्तीसगढ़ फोकस या तुलनात्मक विश्लेषण?

नई दिल्ली /

भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह कल, 20 जनवरी को सुबह 11:30 बजे पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन का चयन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुआ, जो बीजेपी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रतीक है।

निर्विरोध चुनाव की पूरी प्रक्रिया
पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने प्रेस बयान जारी कर पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि चुनाव तब शुरू हुआ जब 36 प्रदेश इकाइयों में से 30 प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका था, जो संविधान की 50त्न अनिवार्य शर्त से कहीं अधिक था।
- 16 जनवरी 2026:चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदाता सूची प्रकाशन।
- 19 जनवरी 2026 (आज):दोपहर 2 से 4 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया।
- नामांकन विवरण:नितिन नबीन के समर्थन में 37 नामांकन सेट दाखिल, सभी जांच में वैध पाए गए।
डॉ. लक्ष्मण ने कहा, "यह निर्विरोध चुनाव पार्टी की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व की पुष्टि करता है।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
नितिन नबीन (जन्म: 1985, बिहार) बीजेपी के उभरते युवा चेहरों में शुमार हैं। वे बिहार प्रदेश अध्यक्ष (2023-2025) रह चुके हैं और पार्टी की युवा मोर्चा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। नबीन को संगठन विस्तार और ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में बीजेपी ने 2025 विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका चयन पार्टी को युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व प्रदान करेगा, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं, जिन्होंने अपना इस्तीफ ा दिसंबर 2025 में सौंपा था। यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पूर्वोत्तर और हिंदी पट्टी में मजबूती पर केंद्रित है।

नई दिल्ली /

भारतीय जनता पार्टी को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार इकाई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन को निर्विरोध रूप से बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। वह कल, 20 जनवरी को सुबह 11:30 बजे पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहेंगे। नितिन नबीन का चयन पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान हुआ, जो बीजेपी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रतीक है।

निर्विरोध चुनाव की पूरी प्रक्रिया
पार्टी के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने प्रेस बयान जारी कर पूरी प्रक्रिया का विवरण दिया। उन्होंने बताया कि चुनाव तब शुरू हुआ जब 36 प्रदेश इकाइयों में से 30 प्रदेश अध्यक्षों का चुनाव पूरा हो चुका था, जो संविधान की 50त्न अनिवार्य शर्त से कहीं अधिक था।
- 16 जनवरी 2026:चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और मतदाता सूची प्रकाशन।
- 19 जनवरी 2026 (आज):दोपहर 2 से 4 बजे के बीच नामांकन प्रक्रिया।
- नामांकन विवरण:नितिन नबीन के समर्थन में 37 नामांकन सेट दाखिल, सभी जांच में वैध पाए गए।
डॉ. लक्ष्मण ने कहा, "यह निर्विरोध चुनाव पार्टी की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व की पुष्टि करता है।"

नितिन नबीन का राजनीतिक सफर
नितिन नबीन (जन्म: 1985, बिहार) बीजेपी के उभरते युवा चेहरों में शुमार हैं। वे बिहार प्रदेश अध्यक्ष (2023-2025) रह चुके हैं और पार्टी की युवा मोर्चा से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। नबीन को संगठन विस्तार और ग्रामीण स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में बिहार में बीजेपी ने 2025 विधानसभा चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका चयन पार्टी को युवा और क्षेत्रीय नेतृत्व प्रदान करेगा, खासकर आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में चुने गए हैं, जिन्होंने अपना इस्तीफ ा दिसंबर 2025 में सौंपा था। यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो पूर्वोत्तर और हिंदी पट्टी में मजबूती पर केंद्रित है।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान कथित दुर्व्यवहार के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं और लगातार प्रशासन व सरकार पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे 10 मार्च को साधुओं के साथ दिल्ली जाएंगे। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा किसी सरकार की नहीं, बल्कि हर सनातनी की मां है, और गंगा में स्नान के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगम में स्नान के लिए जब वे अपने शिविर से निकले तो उन्हें रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनके लोगों को उनसे अलग कर दिया, अलग-अलग जगहों पर घुमाया और अंततः जहां उन्हें छोड़ दिया गया, वहीं वे अब धरने पर बैठे हैं। स्नान की अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्या गंगा किसी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है, जो उसे किसी की पैतृक संपत्ति बना दिया गया है। सूचना देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन को तीन दिन पहले ही जानकारी दे दी गई थी।

शंकराचार्य ने आगे कहा कि शंकराचार्य शास्त्रों और धर्म के अनुसार बोलते हैं, इसलिए जब उनकी बातें समाज में प्रभाव डालने लगती हैं तो उनकी उपेक्षा या अपमान किया जाता है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि गोहत्या के जरिए पैसा कमाया जा रहा है, और उन्हें डर है कि अगर गोहत्या बंद हो गई तो उनका चंदा बंद हो जाएगा। इसी वजह से, उनके अनुसार, उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे मेला छोड़ दें, ताकि सच्चाई और गोरक्षा की आवाज दबाई जा सके।

वादा 2022 का, अब 2027 में रफ्तार—भारत-जापान बुलेट ट्रेन 12 साल बाद पटरी पर दौड़ने की तैयारी

नई दिल्ली/अहमदाबाद।

भारत की पहली बुलेट ट्रेन—मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR)—एक बार फिर समयरेखा के कारण चर्चा में है। जिस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था, वह अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त 2027 को आंशिक रूप से शुरू होने की ओर बढ़ रही है। यानी, वादे और वास्तविक शुरुआत के बीच करीब पाँच साल का अंतर।

समझौता और शिलान्यास

भारत और जापान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक समझौता 12 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली में हुआ था। इस ऐतिहासिक डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हस्ताक्षर किए।

इसके बाद 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में दोनों प्रधानमंत्रियों ने परियोजना की आधारशिला रखी।

परियोजना का स्वरूप

लंबाई: 508 किलोमीटर (मुंबई–अहमदाबाद)

तकनीक: जापान की विश्वप्रसिद्ध शिंकानसेन (Shinkansen)

लागत (अनुमानित): ₹98,000 करोड़

वित्तपोषण: जापान की JICA द्वारा 81% राशि (करीब ₹79,000 करोड़) 0.1% की बेहद कम ब्याज दर पर ऋण

नोडल एजेंसी: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL)

समयसीमा में देरी क्यों?

परियोजना की रफ्तार पर सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेषकर महाराष्ट्र खंड, और कोविड-19 महामारी का पड़ा। इन्हीं कारणों से पहले दिसंबर 2023 की आधिकारिक डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी।

वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देशवासी 15 अगस्त 2027 को भारत की पहली बुलेट ट्रेन का टिकट खरीद सकेंगे।

अब तक की प्रगति इस प्रकार है:

भौतिक प्रगति: 55.63%

वित्तीय प्रगति: करीब 70% (लगभग ₹85,801 करोड़ खर्च)

वायडक्ट (एलिवेटेड पुल): 332 किमी से अधिक तैयार

पिलर निर्माण: 415 किमी से अधिक पूरा

ट्रैक बेड: 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) तैयार

स्टेशन: गुजरात के सभी 8 स्टेशन एडवांस स्टेज में

महाराष्ट्र सुरंग: 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग पर काम जारी; 5 किमी खुदाई पूरी, पालघर में पहले पहाड़ी सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’

चरणबद्ध संचालन का प्लान

अगस्त 2027: सूरत–बिलिमोरा (या वापी) के बीच लगभग 100 किमी खंड शुरू

दिसंबर 2029: पूरा 508 किमी कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, लेकिन समयसीमा के मोर्चे पर यह परियोजना लगातार सवालों में रही है। 2017 में किया गया 2022 का वादा अब 2027 में पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार तय तारीख बदलेगी नहीं—अब देखना यह है कि क्या बुलेट ट्रेन वाकई 15 अगस्त 2027 को भारत की पटरी पर अपनी रफ्तार दिखा पाती है या नहीं।

नई दिल्ली | 

पाकिस्तान की ओर से लगातार हो रही ड्रोन घुसपैठ की कोशिशों को भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए पूरी तरह विफल कर दिया है। जनवरी 2026 के हालिया घटनाक्रमों से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की सीमाओं पर निगरानी और जवाबी क्षमता पहले से कहीं अधिक सशक्त हो चुकी है।

जम्मू-कश्मीर में ड्रोन गतिविधि, सेना सतर्क

11 से 15 जनवरी 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर के राजौरी (नौशेरा, मंजकोट), पुंछ और सांबा (रामगढ़ सेक्टर) में कई संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। भारतीय जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए मशीनगनों से फायरिंग की और एंटी-ड्रोन (Anti-UAS) सिस्टम सक्रिय किया, जिसके बाद सभी ड्रोन पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र (PoK) की ओर वापस भागने पर मजबूर हो गए।

हथियारों की खेप बरामद

सुरक्षा बलों ने सांबा जिले में ड्रोन के जरिए गिराई गई हथियारों की खेप बरामद की। इसमें:

  • दो पिस्तौल

  • तीन मैगजीन

  • 16 राउंड गोलियां

  • एक हैंड ग्रेनेड
    शामिल हैं। इसे आतंकियों तक हथियार पहुँचाने की साजिश माना जा रहा है।

सेना प्रमुख का सख्त संदेश

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 को बताया कि 9 जनवरी से अब तक 10 से 12 ड्रोन घुसपैठ की कोशिशें नाकाम की जा चुकी हैं। भारत ने इस गंभीर मुद्दे को पाकिस्तान के DGMO स्तर पर उठाते हुए इसे स्पष्ट रूप से ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है।

पंजाब बॉर्डर पर BSF की निर्णायक कार्रवाई

दिसंबर 2025 में BSF ने अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में तीन पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए थे, जिनके जरिए लगभग 2 किलोग्राम हेरोइन की तस्करी की जा रही थी। यह ड्रोन नेटवर्क के जरिए आतंक और नशे के गठजोड़ को उजागर करता है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया पाकिस्तान

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि ये गतिविधियाँ मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान की हताश प्रतिक्रिया हैं। उस ऑपरेशन में भारत ने सीमा पार स्थित आतंकी ठिकानों और रडार केंद्रों को ध्वस्त कर दिया था।

ड्रोन घुसपैठ के पीछे की मंशा

सेना और सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से:

  • आतंकियों तक हथियार और ड्रग्स पहुँचाने,

  • भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी और कमजोरियाँ तलाशने,

  • तथा 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पहले अशांति फैलाने
    के लिए कर रहा है।

हाई अलर्ट पर सीमाएँ

वर्तमान में जम्मू-कश्मीर से लेकर पंजाब तक सभी सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और रियल-टाइम सर्विलांस के जरिए हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ड्रोन युद्ध के इस नए दौर में भारत ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—सीमा पर हर साजिश का जवाब तुरंत, सटीक और निर्णायक होगा।

मुंबई / शौर्यपथ विशेष रिपोर्ट

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले ‘महायुति’ गठबंधन ने अपनी निर्णायक ताकत साबित कर दी है। 15 जनवरी 2026 को संपन्न हुए 29 नगर निगम (महानगर पालिका) चुनावों के नतीजे 16 और 17 जनवरी को सामने आए और परिणामों ने साफ कर दिया कि शहरी महाराष्ट्र पर अब निर्णायक रूप से भगवा छाया हुआ है।

इन चुनावों में महायुति (BJP + एकनाथ शिंदे की शिवसेना + अजित पवार की NCP) ने राज्य के 29 में से 25 नगर निगमों में जीत का दावा करते हुए विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को करारी शिकस्त दी है।

मुंबई: 30 साल बाद ठाकरे युग का अंत

देश के सबसे बड़े नगर निगम बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) में यह चुनाव ऐतिहासिक साबित हुआ।

227 सीटों वाले BMC में

भाजपा–शिंदे शिवसेना गठबंधन: 118 सीटें

भाजपा: 89

शिवसेना (शिंदे): 29

शिवसेना (उद्धव ठाकरे – UBT): 65 सीटें

कांग्रेस: 24 सीटें

इस परिणाम के साथ ही ठाकरे परिवार का करीब तीन दशक पुराना वर्चस्व समाप्त हो गया, जिसे राजनीतिक गलियारों में शहरी महाराष्ट्र की सबसे बड़ी सत्ता परिवर्तन की घटना माना जा रहा है।

पुणे–ठाणे–नागपुर: भाजपा और शिंदे का दबदबा

पुणे महानगर पालिका (PMC):

165 में से 123 सीटें जीतकर भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

ठाणे महानगर पालिका (TMC):

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गढ़ में महायुति ने 103 सीटें जीतीं, जिनमें से 75 सीटें अकेले शिवसेना (शिंदे) ने हासिल कीं।

नागपुर महानगर पालिका (NMC):

भाजपा ने 151 में से 97 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।

अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी महायुति की बढ़त

नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली, नासिक, पनवेल जैसे महत्वपूर्ण शहरी निकायों में भी महायुति ने विपक्ष को पीछे छोड़ते हुए मजबूत बढ़त दर्ज की।

पार्टी-वार कुल सीटें (29 नगर निगम)

भारतीय जनता पार्टी (BJP): ~1,370–1,400 सीटें

शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 397 सीटें

कांग्रेस: 324 सीटें

NCP (अजित पवार): 160 सीटें

शिवसेना (UBT): 153 सीटें

AIMIM (असदुद्दीन ओवैसी): 126 सीटें (विशेषकर छत्रपति संभाजीनगर में प्रभावी प्रदर्शन)

राजनीतिक संदेश साफ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ये नतीजे केवल नगर निगम चुनाव नहीं हैं, बल्कि

BJP की शहरी राजनीति पर मजबूत पकड़,

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की वैधता,

और अजित पवार के साथ बने नए सत्ता समीकरण पर जनता की मुहर माने जा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे (SS-UBT) और शरद पवार गुट (NCP-SP) के लिए ये नतीजे गंभीर आत्ममंथन का संकेत हैं।

महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया है कि

“शहरी महाराष्ट्र में सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह महायुति के हाथों में है।”

ये परिणाम न केवल राज्य की नगर सरकारों की दिशा तय करेंगे, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की राजनीतिक पटकथा भी यहीं से लिखी जाती दिख रही है।

संभल / लखनऊ।

   संभल में नवंबर 2024 की जामा मस्जिद सर्वे हिंसा से जुड़े बहुचर्चित मामले में न्यायपालिका ने बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला आदेश दिया है। चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर की अदालत ने 13 जनवरी 2026 को तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी (वर्तमान में एएसपी), इंस्पेक्टर अनुज तोमर तथा 15–20 अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी किया है।

24 वर्षीय युवक को गोली लगने का आरोप

यह आदेश यामीन, निवासी खग्गू सराय अंजुमन, की याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के समय उनका 24 वर्षीय बेटा आलम, जो बिस्कुट और रस बेचने घर से निकला था, को पुलिस द्वारा कथित रूप से गोली मारी गई। गोली लगने से आलम गंभीर रूप से घायल हो गया था।

याचिका में दावा किया गया है कि युवक हिंसा में शामिल नहीं था, इसके बावजूद पुलिस ने उस पर फायरिंग की।

अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला

कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आदेश पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा—

“अब कोई बचाने नहीं आएगा। भाजपा का फॉर्मूला है—पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो।”

पुलिस ने आदेश मानने से किया इनकार

वहीं, संभल पुलिस प्रशासन ने इस न्यायिक आदेश को मानने से फिलहाल इनकार कर दिया है। संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने अदालत के आदेश को “अवैध” बताते हुए कहा कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें पुलिस को क्लीन चिट दी जा चुकी है।

एसपी ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देगी

हिंसा की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान पत्थरबाजी और गोलीबारी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और नागरिक घायल हुए थे। यह मामला प्रदेश भर में कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर लंबे समय तक चर्चा में रहा।

कानूनी और प्रशासनिक टकराव

इस प्रकरण में अब न्यायपालिका के आदेश और पुलिस प्रशासन के रुख के बीच स्पष्ट टकराव नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बनने की संभावना जता रहा है।

नई दिल्ली।
भारत–चीन संबंधों में तनाव के दौर के बीच राजनीतिक संवाद की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय का दौरा किया और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की।

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सन हैयान ने किया

चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व CPC के अंतरराष्ट्रीय विभाग (IDCPC) की उप-मंत्री सन हैयान (Sun Haiyan) ने किया। बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग (Xu Feihong) भी उपस्थित रहे। इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई तल्खी के संदर्भ में।

भाजपा की ओर से अरुण सिंह और विजय चौथाईवाले शामिल

भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद और संपर्क बढ़ाने (Inter-party Communication) के उपायों पर चर्चा की गई।

भाजपा नेताओं ने इसे औपचारिक, संस्थागत और पारदर्शी संवाद बताते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के बीच बातचीत अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर समझने में सहायक होती है।

RSS और अन्य दलों से भी मुलाकात

अपने भारत दौरे के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 13 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले से भी मुलाकात की। इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद तथा वामपंथी दलों के नेताओं से भी अलग-अलग बैठकें कीं।

कांग्रेस ने भाजपा पर लगाया ‘दोगलेपन’ का आरोप

इस मुलाकात को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर “दोगलापन” का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर चीन को लेकर सख्त बयान दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। कांग्रेस ने बैठक के एजेंडे और चर्चा के बिंदुओं को सार्वजनिक करने की मांग की है।

भाजपा का जवाब

भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह बैठक किसी गुप्त एजेंडे के तहत नहीं बल्कि राजनीतिक दलों के बीच सामान्य कूटनीतिक संवाद का हिस्सा थी। पार्टी का कहना है कि संवाद से पीछे हटना समाधान नहीं है और ऐसे संपर्क वैश्विक राजनीति में सामान्य प्रक्रिया हैं।

राजनीतिक और कूटनीतिक मायने

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत–चीन संबंध अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। ऐसे में यह संवाद भविष्य की कूटनीतिक दिशा, राजनीतिक संदेश और आंतरिक राजनीति—तीनों स्तरों पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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