वादा 2022 का, अब 2027 में रफ्तार—भारत-जापान बुलेट ट्रेन 12 साल बाद पटरी पर दौड़ने की तैयारी
नई दिल्ली/अहमदाबाद।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन—मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR)—एक बार फिर समयरेखा के कारण चर्चा में है। जिस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ यानी 15 अगस्त 2022 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा था, वह अब संशोधित कार्यक्रम के अनुसार 15 अगस्त 2027 को आंशिक रूप से शुरू होने की ओर बढ़ रही है। यानी, वादे और वास्तविक शुरुआत के बीच करीब पाँच साल का अंतर।
समझौता और शिलान्यास
भारत और जापान के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आधिकारिक समझौता 12 दिसंबर 2015 को नई दिल्ली में हुआ था। इस ऐतिहासिक डील पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने हस्ताक्षर किए।
इसके बाद 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में दोनों प्रधानमंत्रियों ने परियोजना की आधारशिला रखी।
परियोजना का स्वरूप
लंबाई: 508 किलोमीटर (मुंबई–अहमदाबाद)
तकनीक: जापान की विश्वप्रसिद्ध शिंकानसेन (Shinkansen)
लागत (अनुमानित): ₹98,000 करोड़
वित्तपोषण: जापान की JICA द्वारा 81% राशि (करीब ₹79,000 करोड़) 0.1% की बेहद कम ब्याज दर पर ऋण
नोडल एजेंसी: नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL)
समयसीमा में देरी क्यों?
परियोजना की रफ्तार पर सबसे बड़ा असर भूमि अधिग्रहण में देरी, विशेषकर महाराष्ट्र खंड, और कोविड-19 महामारी का पड़ा। इन्हीं कारणों से पहले दिसंबर 2023 की आधिकारिक डेडलाइन भी आगे बढ़ानी पड़ी।
वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, देशवासी 15 अगस्त 2027 को भारत की पहली बुलेट ट्रेन का टिकट खरीद सकेंगे।
अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
भौतिक प्रगति: 55.63%
वित्तीय प्रगति: करीब 70% (लगभग ₹85,801 करोड़ खर्च)
वायडक्ट (एलिवेटेड पुल): 332 किमी से अधिक तैयार
पिलर निर्माण: 415 किमी से अधिक पूरा
ट्रैक बेड: 292 ट्रैक किमी (146 रूट किमी) तैयार
स्टेशन: गुजरात के सभी 8 स्टेशन एडवांस स्टेज में
महाराष्ट्र सुरंग: 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग पर काम जारी; 5 किमी खुदाई पूरी, पालघर में पहले पहाड़ी सुरंग का ‘ब्रेकथ्रू’
चरणबद्ध संचालन का प्लान
अगस्त 2027: सूरत–बिलिमोरा (या वापी) के बीच लगभग 100 किमी खंड शुरू
दिसंबर 2029: पूरा 508 किमी कॉरिडोर चालू करने का लक्ष्य
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, लेकिन समयसीमा के मोर्चे पर यह परियोजना लगातार सवालों में रही है। 2017 में किया गया 2022 का वादा अब 2027 में पूरा होने जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस बार तय तारीख बदलेगी नहीं—अब देखना यह है कि क्या बुलेट ट्रेन वाकई 15 अगस्त 2027 को भारत की पटरी पर अपनी रफ्तार दिखा पाती है या नहीं।