प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान कथित दुर्व्यवहार के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठ गए हैं और लगातार प्रशासन व सरकार पर तीखे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि वे 10 मार्च को साधुओं के साथ दिल्ली जाएंगे। शंकराचार्य ने कहा कि गंगा किसी सरकार की नहीं, बल्कि हर सनातनी की मां है, और गंगा में स्नान के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगम में स्नान के लिए जब वे अपने शिविर से निकले तो उन्हें रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने उनके लोगों को उनसे अलग कर दिया, अलग-अलग जगहों पर घुमाया और अंततः जहां उन्हें छोड़ दिया गया, वहीं वे अब धरने पर बैठे हैं। स्नान की अनुमति के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्या गंगा किसी कंपनी के नाम पर पंजीकृत है, जो उसे किसी की पैतृक संपत्ति बना दिया गया है। सूचना देने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन को तीन दिन पहले ही जानकारी दे दी गई थी।
शंकराचार्य ने आगे कहा कि शंकराचार्य शास्त्रों और धर्म के अनुसार बोलते हैं, इसलिए जब उनकी बातें समाज में प्रभाव डालने लगती हैं तो उनकी उपेक्षा या अपमान किया जाता है। उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि गोहत्या के जरिए पैसा कमाया जा रहा है, और उन्हें डर है कि अगर गोहत्या बंद हो गई तो उनका चंदा बंद हो जाएगा। इसी वजह से, उनके अनुसार, उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे मेला छोड़ दें, ताकि सच्चाई और गोरक्षा की आवाज दबाई जा सके।