RPSC SI भर्ती पर उठे सवाल,
न्यायिक जांच के घेरे में रहीं डॉ. मंजू शर्मा —
इस्तीफा, अपील और अब अदालत का अगला कदम?”**
जयपुर।
राजस्थान की सबसे चर्चित भर्तियों में शामिल सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती–2021 एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की तत्कालीन सदस्य और प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की पत्नी डॉ. मंजू शर्मा का नाम न्यायिक जांच के दायरे में आया, हालांकि उनके विरुद्ध अब तक किसी प्रकार का सीधा कानूनी आरोप या एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा मामला
अगस्त 2024 में राजस्थान हाईकोर्ट की एकल पीठ ने SI भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे “Systematic Corruption” से प्रभावित बताया। अदालत ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए यह संकेत दिया कि लिखित परीक्षा और साक्षात्कार स्तर पर प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता हुआ है।
इन्हीं टिप्पणियों के बाद आयोग के तत्कालीन सदस्यों की भूमिका न्यायिक जांच के दायरे में आई, जिनमें डॉ. मंजू शर्मा भी शामिल रहीं।
इस्तीफा लेकिन आरोप से इनकार
अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद डॉ. मंजू शर्मा ने
? 1 सितंबर 2025 को RPSC सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे राजस्थान के राज्यपाल ने
? 15 सितंबर 2025 को स्वीकार कर लिया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि—
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उनके खिलाफ किसी भी एजेंसी में कोई आपराधिक जांच लंबित नहीं है
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उन्हें किसी भी मामले में अभियुक्त नहीं बनाया गया है
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उन्होंने आयोग की गरिमा और अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए पद छोड़ा
अब मामला अदालत में विचाराधीन
डॉ. मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट की एकल पीठ की टिप्पणियों को “अपमानजनक” बताते हुए उन्हें हटाने की मांग के साथ विशेष अपील (Special Appeal) दायर की है।
उनका तर्क है कि—
“बिना पक्षकार बनाए और बिना सुनवाई का अवसर दिए इस प्रकार की टिप्पणियां प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
भर्ती का भविष्य अधर में
अब बड़ा सवाल यह है कि—
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क्या SI भर्ती 2021 पूरी तरह रद्द होगी?
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क्या न्यायिक जांच किसी औपचारिक आपराधिक जांच में बदलेगी?
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या फिर हाईकोर्ट की अपील में कोई नया मोड़ आएगा?
फिलहाल, मामला न्यायालय के विचाराधीन है, और अंतिम निर्णय आना बाकी है।
✍️ नोट: यह समाचार न्यायालयी रिकॉर्ड, सार्वजनिक बयानों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार केवल न्यायालय को है।