नई दिल्ली / शौर्यपथ / केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 जारी किया है, जिसके तहत उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए प्राथमिकता क्षेत्र में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में उर्वरक उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो सके।
सरकार के अनुसार उर्वरक संयंत्रों को उनके पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत का कम से कम 70 प्रतिशत प्राकृतिक गैस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन निरंतर जारी रह सके। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक LNG आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
उर्वरक विभाग ने बताया कि संभावित वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार ने पहले से ही उर्वरकों का बड़ा बफर स्टॉक तैयार कर लिया है। 10 मार्च 2026 तक देश में कुल 180.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 131.79 लाख मीट्रिक टन की तुलना में लगभग 36.6 प्रतिशत अधिक है। इसमें यूरिया 61.51 लाख मीट्रिक टन, डीएपी 25.17 लाख मीट्रिक टन और एनपीके 56.30 लाख मीट्रिक टन का प्रमुख योगदान है।
सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि खरीफ सीजन में उर्वरकों की किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए आवश्यक शिपमेंट की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है। फरवरी 2026 तक भारत 98 लाख मीट्रिक टन यूरिया का आयात कर चुका है और अगले तीन महीनों में 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक यूरिया का अतिरिक्त आयात भी पाइपलाइन में है।
उर्वरक विभाग के अनुसार यह निर्णय किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और खेती-किसानी को निर्बाध बनाए रखने की दिशा में सरकार की प्राथमिकता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।