नई दिल्ली ।
देश में उभरते स्वास्थ्य खतरों, महामारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन को और मजबूत बनाने की दिशा में नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। कर्तव्य भवन-3 में आयोजित वैज्ञानिक संचालन समिति की पांचवीं बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय के. सूद ने की।
बैठक में स्वास्थ्य, पशुपालन, पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मंत्रालयों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसमें विशेष रूप से पशुओं से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों (Zoonotic Diseases), जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य चुनौतियों और महामारी तैयारी पर व्यापक चर्चा हुई।
“वन हेल्थ” मॉडल से एकीकृत स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं, इसलिए किसी भी महामारी या स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सभी क्षेत्रों के बीच समन्वित रणनीति आवश्यक है। प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि हाल के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मजबूत अंतर-क्षेत्रीय सहयोग ही भविष्य की चुनौतियों से सुरक्षा का आधार बनेगा।
एक वर्ष में कई बड़ी उपलब्धियां
राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन ने पिछले एक वर्ष में कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। इनमें—
- राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए मॉडल शासन ढांचे का विकास,
- जीनोमिक्स और मेटाजीनोमिक्स आधारित निगरानी नेटवर्क की शुरुआत,
- चिड़ियाघरों, पक्षी अभयारण्यों और बूचड़खानों में निगरानी प्रणाली,
- जनजागरूकता और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान शामिल हैं।
बैठक में राज्यों में वन हेल्थ शासन को मजबूत करने के लिए तैयार मॉडल ढांचे पर आधारित एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया।
AI आधारित निगरानी और डेटा साझाकरण पर फोकस
विशेषज्ञों ने भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए AI-सक्षम रोगजनक पहचान, एकीकृत निगरानी प्रणाली, डेटा साझाकरण और आधुनिक प्रयोगशालाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
मॉक ड्रिल और तैयारी तंत्र को मजबूत करने पर जोर
समापन संबोधन में प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने नियमित मॉक ड्रिल, मजबूत तैयारी तंत्र और समय पर वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के तहत किए जा रहे कार्यों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का आग्रह किया, ताकि भारत भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने के लिए और अधिक सक्षम बन सके।