नई दिल्ली। C. Joseph Vijay सरकार ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कोयंबटूर के सुलूर क्षेत्र में 10 वर्षीय मासूम बच्ची के अपहरण, यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में अधिकारियों के कथित असंवेदनशील व्यवहार को लेकर की गई।
क्या है पूरा मामला?
25 मई 2026 को इस जघन्य अपराध मामले को लेकर पुलिस द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। प्रेस वार्ता शुरू होने से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में पुलिस महानिरीक्षक (IGP) R. V. Ramya Bharati सहित तीन वरिष्ठ अधिकारी हल्के-फुल्के अंदाज में हंसते और मुस्कुराते दिखाई दिए।
यह दृश्य ऐसे समय सामने आया जब पूरा राज्य एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या से आक्रोशित एवं दुखी था। वीडियो वायरल होते ही जनता, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे प्रशासन की “संवेदनहीनता” करार देते हुए कड़ी आलोचना शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री का सख्त रुख
जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री विजय ने तत्काल प्रभाव से तीनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी कर दिए। साथ ही इनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक जांच भी प्रारंभ कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि ऐसे गंभीर और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, असंवेदनशीलता या गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को सरकार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, वहीं कई लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि संवेदनशील मामलों में अधिकारियों के आचरण को लेकर प्रशासनिक प्रशिक्षण और जवाबदेही को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, सार्वजनिक जवाबदेही और पुलिस व्यवस्था की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर गया है।