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NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार

  • rounak group

राष्ट्रपति ने तत्काल प्रभाव से मंजूर किया इस्तीफा, छात्रों के नाम संदेश में बोले धर्मेंद्र प्रधान—'युवाओं की आकांक्षाओं का हमेशा रहेगा सम्मान'

नई दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को उनके वर्तमान मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी संभालेंगे। हाल के दिनों में शिक्षा मंत्रालय NEET-UG परीक्षा, पेपर लीक के आरोपों और देशभर में छात्रों के आंदोलन को लेकर लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे समय में सरकार ने मंत्रालय की कमान प्रह्लाद जोशी को सौंपते हुए नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है।

इस्तीफे के बाद क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान

अपने इस्तीफे के साथ जारी संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसके बावजूद कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को भ्रमित करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया।

प्रधान ने कहा कि उन्हें भारतीय लोकतंत्र की शक्ति पर पूरा विश्वास है और देश के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और उम्मीदों का उन्होंने हमेशा सम्मान किया है। उनके अनुसार, युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि 'विकसित भारत' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भागीदार हैं।

NEET विवाद से शुरू हुआ देशव्यापी आंदोलन

देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर हालिया आंदोलन की शुरुआत 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा के बाद हुई। परीक्षा समाप्त होते ही पेपर लीक और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद हजारों छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए। देखते ही देखते यह मुद्दा सोशल मीडिया से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के छात्र आंदोलन में बदल गया।

इसी बीच 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बन गई। उन्होंने कुछ लोगों के संदर्भ में 'कॉकरोच' शब्द का प्रयोग किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी छात्रों या युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के आधार पर पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में थी।

अब सबकी नजर शिक्षा मंत्रालय की नई दिशा पर

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रह्लाद जोशी को अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का विश्वास बहाल करना, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और NEET विवाद से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान निकालना होगी। केंद्र सरकार के इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में नई प्रशासनिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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