नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज (25 सितंबर) देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ा और राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस आंदोलन को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), और विभिन्न नागरिक संगठनों (Civil Society) का समर्थन प्राप्त था।
इस पूरे घटनाक्रम और विवाद से जुड़ी विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:
आंदोलन और विरोध का मुख्य कारणयह प्रदर्शन मुख्य रूप से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा था।
वोट चोरी के आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा की गई इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिससे झुग्गी-झोपड़ियों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले हजारों गरीब नागरिकों के नाम मतदाता सूची से प्रभावित हुए हैं।
मुख्य मांग: आंदोलनकारियों का नारा था "वोट चोरी इस देशद्रोह"। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
2. पुलिस की सख्त कार्रवाई और नाकेबंदीदिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए थे:
रास्ते पूरी तरह बंद: जंतर-मंतर जाने वाले सभी रास्तों पर कई परतों (Layers) की भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी। यहां तक कि मीडिया कर्मियों और प्रदर्शनकारियों को भी घटना स्थल पर प्रवेश करने से पूरी तरह रोक दिया गया।
अनुमति नहीं होने का दावा: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आयोजकों ने इस प्रदर्शन के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं दिया था और न ही कोई अनुमति ली गई थी, इसलिए भीड़ को जमा होने से रोका गया।
3. दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासतजंतर-मंतर पर जैसे ही प्रदर्शनकारी और छात्र जुटने लगे, पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाना शुरू कर दिया:
प्रमुख गिरफ्तारियां/हिरासत: प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, और प्रसिद्ध वकील व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण सहित कई छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
प्रशांत भूषण का बयान: हिरासत में लिए जाने के बाद प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना सरकार की हताशा को दिखाता है और अब ऐसे आंदोलन देश के कोने-कोने में फैलेंगे।
4. देशव्यापी असर और विपक्षी दलों का मार्चयह आंदोलन सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रव्यापी आक्रोश का हिस्सा था
:यूथ कांग्रेस और दिल्ली कांग्रेस: इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) और दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी रायसीना रोड और राउज एवेन्यू से निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग कार्यालय) की तरफ मार्च निकाला, जहां सुरक्षा बलों को भारी संख्या में तैनात रहना पड़ा।
अन्य राज्यों में प्रदर्शन: कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के नेतृत्व में चुनाव कार्यालय की तरफ मार्च निकाला गया, जहां पुलिस के साथ नोकझोंक हुई और पुतले फूंके गए। वहीं असम में भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई और कई वरिष्ठ नेताओं को इसी मुद्दे पर प्रदर्शन करने के कारण हिरासत में लिया गया है।