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सुप्रीम कोर्ट में आज कई अहम मामलों पर सख्त रुख, महिलाओं की सुरक्षा से UPI शुल्क और स्कूल नीति तक बड़े निर्देश

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नई दिल्ली / एजेंसी / सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को महिलाओं की सुरक्षा, चुनाव चिह्न विवाद, यूपीआई भुगतान शुल्क, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल और सीबीएसई की भाषा नीति समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। अलग-अलग पीठों ने संबंधित सरकारों और संस्थाओं से जवाब मांगा तथा कई मामलों में समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।

दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली-NCR में नाबालिगों और महिलाओं के साथ बलात्कार की हालिया मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने कानून प्रवर्तन और प्रशासन की ‘सिस्टमैटिक विफलता’ पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि ढीली पेट्रोलिंग और प्रशासनिक कमियों के कारण पार्क, बसें और मेट्रो स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहें महिलाओं के लिए जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बन सकतीं। कोर्ट ने कहा कि केवल सहानुभूति या एकजुटता पर्याप्त नहीं, बल्कि लापरवाही के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस और सरकार से तत्काल जवाब मांगा गया है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर ECI को तीन महीने
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला करने का निर्देश दिया। आयोग ने आगामी विधानसभा चुनावों और मामले की जटिलता का हवाला देते हुए 5-6 महीने का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। सभी पक्षों को दलीलें और अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं। तब तक ECI का अंतरिम फ्रीज आदेश लागू रहेगा।

₹2,000 से अधिक UPI लेन-देन पर 0.4% MDR को चुनौती
15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट P2M यूपीआई लेन-देन पर ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने फिलहाल फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र सरकार और RBI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि फैसला सार्वजनिक परामर्श और पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा के बिना लिया गया।

पैकेट फूड पर वार्निंग लेबल को लेकर FSSAI से सवाल
मैगी, कुरकुरे जैसे पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों पर चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा स्पष्ट रूप से दिखाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। जस्टिस पारदीवाला ने FSSAI की प्रस्तावित लंबी समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े मामले में इतना समय क्यों लगाया जा रहा है। कोर्ट ने FSSAI से ‘एडेड शुगर’ की स्पष्ट परिभाषा बताने को कहा। मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया है।

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी में कक्षा 6 को राहत
कक्षा 9 से लागू होने वाली CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े मामले में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कक्षा 6 के छात्रों को भी वह छूट देने का निर्देश दिया, जो वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को दी जा रही है। इस मामले में केंद्र सरकार के विरोध के बावजूद कोर्ट ने CBSE को निर्देश जारी किया।

गांगुली आर्बिट्रेशन मामले में ₹14.49 करोड़ का पुरस्कार बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने एक टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली के पक्ष में दिए गए ₹14.49 करोड़ के मध्यस्थता पुरस्कार को चुनौती दी गई थी।

नेताजी के अवशेष भारत लाने की याचिका पर भी सुनवाई
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने की मांग वाली याचिका पर भी सुनवाई हुई। कार्यवाही के दौरान एक मध्यस्थ ने याचिकाकर्ता द्वारा किए गए दावों पर सवाल उठाए।

इस तरह 28 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने महिला सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से लेकर चुनावी प्रक्रिया, डिजिटल भुगतान और शिक्षा नीति तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं से जवाब और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा तय की।

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