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कोशिश बदलाव की : मुंगेली के गांव में 70 सालों से लोगों का पेशा है चोरी और लूट, नए एसपी ने कहा- गुनाह की दुनिया छोडि़ए हम मदद करेंगे

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मुंगेली/शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक गांव ऐसा है जहां हर घर में चोर और लुटेरे ही रहते हैं। आजादी के पहले से शुरू हुई वारदातें, अब परंपरा बन चुकी है। चरोटी नाम के इस गांव के हर घर में मौजूद व्यक्ति प्रदेश की किसी ना किसी जेल में कुछ महिने बिता चुका है। गांव के लोगों का पेशा चोरी और लूट ही है। मार्च के महीने में जिले में नए एसपी डी. श्रवण आए। उन्होंने पहले ही इस गांव के बारे में सुन रखा था। अपनी टीम के साथ गुरुवार को एसपी गांव में पहुंचे, लोगों से अपराध की दुनिया को छोड़कर मुख्यधारा से जुडऩे की अपील की। उन्होंने कहा कि पुलिस लोगों की हर संभव मदद करेगी।
अब ग्रामीणों की मांग पर होगा बदलाव
एसपी डी श्रवण ने गांव के युवकों, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों से बात की। ग्रामीणों ने रोजगार, स्कूल की मरम्मत, पंखे, ब्लैकबोर्ड की परेशानी के बारे में बताया। लोगों ने कहा कि गांव में पीने के साफ पानी और तालाब की जरुरत है। आईपीएस अफसर ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर सुविधाएं जल्द से जल्द गांव में मुहैया कराने का भरोसा दिलाया। एसपी के साथ एसडीओपी नवनीत कौर छाबड़ा, थाना प्रभारी संजीव ठाकुर और उप निरीक्षक सुशील कुमार बंछोर, सरगांव के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार सिंह ,जनपद सदस्य विजय चेलक, सीलदाहा सरपंच विजय यादव भी साथ पहुंचे थे।
गांव के लोग चाहते हैं गुनाह की दुनिया से छुटकारा
बिलासपुर से मुंगेली की ओर बढऩे पर करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर चिरोटी स्थित है। यहां करीब 50 परिवार हैं और गांव की जनसंख्या 252 है। चिरोटी में रहने वाले समुदाय के लोगों को सामाजिक कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता। गांव के 50 परिवारों में आपस में ही शादियां हो रही है। यही वजह है कि इस गांव के लोग भी बदलाव चाहते हैं। चिरोटी सरगांव थाना क्षेत्र में है। यहां के उप निरीक्षक सुशील बंछोड़ ने बताया कि वह ग्रामीणों को अपराध छोडऩे प्रेरित कर रहे हैं। करीब 60त्न आबादी पुलिस की बात मानने को तैयार है। जो बचे हुए परिवार हैं, उन्हें भी राजी किया जाएगा। पूर्व में इसी गांव से जिन लोगों को पुलिस ने पकड़ा उन्हें भी इस अभियान से जोड़कर ग्रामीणों का भरोसा जीतने का प्रयास किया जा रहा है
इस तरह गांव धंस गया गुनाह के दल दल में
जानकारों के मुताबिक गांव के लोगों में चोरी करने की आदत आजादी के पहले से है। यहां के लोग आसपास के गांव से फसल की चोरी किया करते थे। जब हौसला बढ़ा तो फिर ट्यूबवेल, मोटर पंप की चोरी करने लगे।
फिर राशन दुकान, किराना दुकान, कपड़ा दुकान और लोगों के मकान को निशाना बनाया। अब तो अपराध को अंजाम देने के लिए कार, पिकअप वाहन का इस्तेमाल भी करते हैं। गांव में कुछ ग्रैजुएट युवक भी चोरी और लूट की घटनाओं में संलिप्त हैं। लेकिन अब ग्रामीण एक सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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