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रायपुर / शौर्यपथ /
बीजापुर जिले में प्रधान अध्यापक की आत्महत्या से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोट्र्स को लेकर जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा बीजापुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अधूरे निर्माण कार्य के भुगतान के दबाव जैसी खबरें तथ्यहीन एवं भ्रामक हैं। जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा बीजापुर द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग निष्पक्ष रूप से पुलिस जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पालनार अंतर्गत प्राथमिक शाला मझारपारा में पदस्थ प्रधान पाठक श्री राजू पुजारी का 22 अप्रैल 2026 को निधन हो गया, जो एक अत्यंत दुखद घटना है। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच के दौरान मृतक के पास से कुछ पत्र बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर जांच की कार्यवाही जारी है।
समग्र शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष का निर्माण कार्य शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से कराया गया था, जिसमें प्रधान अध्यापक पदेन अध्यक्ष होते हैं। निर्माण कार्यों के लिए स्वीकृत राशि के अनुरूप प्रथम किस्त का भुगतान नियमानुसार किया गया तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात माप पुस्तिका, पूर्णता प्रमाण पत्र, हस्तांतरण प्रमाण पत्र एवं फोटोग्राफ्स प्राप्त होने पर प्रगति के आधार पर रनिंग बिलों के माध्यम से राशि जारी की गई।
विभाग के अनुसार, प्राथमिक शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष दोनों का निर्माण फरवरी 2026 में पूर्ण हो चुका था तथा शेष 60 प्रतिशत राशि राज्य स्तर से प्राप्त होना लंबित है। भुगतान की प्रक्रिया में किसी प्रकार का दबाव या अनियमितता नहीं पाई गई है।
जिला मिशन समन्वयक ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में बिना तथ्यों की पुष्टि के प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं, जिससे आमजन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अपील की है कि आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही समाचारों का प्रकाशन किया जाए।
विभाग ने पुन: स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना के सभी पहलुओं की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और शिक्षा विभाग द्वारा हर स्तर पर सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।
10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग, दुर्गम अंचलों तक पहुंचीं टीमें; हजारों मरीजों को मिला नि:शुल्क उपचार
रायपुर / शौर्यपथ / बस्तर संभाग के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाडिय़ों और दूरस्थ बसाहटों में अब स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक साफ महसूस की जा रही है। जहां कभी इलाज के लिए लंबी दूरी और अनिश्चितता ही विकल्प थी, वहां अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के द्वार तक पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के दस दिन पूरे होते-होते यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में सफल हो रही है, बल्कि सुदूर अंचलों में रहने वाले लोगों के मन में भरोसे की नई किरण भी जगा रही है।
अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही नि:शुल्क दवा और उपचार उपलब्ध कराया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में तत्काल राहत मिली है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर त्वरित रेफरल की व्यवस्था की गई है। अब तक 8055 मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में भेजकर विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित किया गया है।
जांच के दौरान मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामलों की पहचान की गई है। समय पर पहचान और उपचार शुरू होने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही गंभीर स्थितियों को टालने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए उन इलाकों तक भी सेवाएं पहुंच रही हैं, जहां पहले इलाज की सुविधा सीमित थी।
इसके साथ ही लोगों के डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल (आभा) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि आगे भी इलाज की निरंतरता बनी रहे और जरूरत पडऩे पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सके। अब बस्तर के सुदूर गांवों में भी लोग इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके द्वार तक पहुंच रही हैं। यही बदलाव इस अभियान को खास बना रहा है।
आयुष्मान कार्ड से लाखों का मुफ्त इलाज, पुनर्वासित युवाओं में दिखा उत्साह
रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विशेष पहल पर माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। इन युवाओं को राशन कार्ड, आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ तेजी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं । इसी तरह प्रशासन द्वारा इन युवाओं को आयुष्मान कार्ड बनाकर लाखों रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है ।इन प्रयासों से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें आत्मनिर्भर व सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढऩे का अवसर मिल रहा है ।
दस्तावेजों से लेकर स्वास्थ्य तक पूरा सहयोग
पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩे के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।
आयुष्मान योजनाओं से व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा
जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा—
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत
बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज
एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत
दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता
साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वास
आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के बाद पुनर्वासित युवाओं में उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया। उन्होंने शासन और प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढऩे की इच्छा जताई।
समावेशी विकास की ओर मजबूत कदम
यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
काठमांडू, ।
नेपाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने वित्तीय अनियमितताओं और विवादित कारोबारी संबंधों के गंभीर आरोपों के बीच 22 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हैरानी की बात यह है कि उनकी नियुक्ति को महज 26 दिन ही हुए थे, जिससे यह मामला नई सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका बन गया है।
गुरुंग पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के घेरे में चल रहे व्यवसायी दीपक कुमार भट्ट की कंपनियों—लिबर्टी माइक्रो लाइफ इंश्योरेंस और स्टार माइक्रो इंश्योरेंस—में निवेश किया।
बताया गया कि उन्होंने दोनों कंपनियों में 25-25 हजार ‘फाउंडर शेयर’ खरीदे, जो सामान्य निवेश की तुलना में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
जांच में सामने आए लेनदेन ने मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार:
इस पैटर्न ने संभावित बेनामी निवेश और फंड रूटिंग की आशंकाओं को जन्म दिया।
आलोचकों का कहना है कि गुरुंग ने इन ‘अनलिस्टेड’ फाउंडर शेयरों को अपनी संपत्ति घोषणा में स्पष्ट रूप से अलग नहीं दिखाया, बल्कि सामान्य प्रतिभूतियों के साथ जोड़ दिया।
नेपाल के कानून के तहत मंत्रियों के लिए पारदर्शिता अनिवार्य है, ऐसे में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया।
सुदन गुरुंग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा:
गुरुंग ने अपने इस्तीफे में कहा कि:
“मैं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और किसी भी तरह के हितों के टकराव से बचने के लिए पद छोड़ रहा हूं।”
उनके इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने गृह मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार खुद संभाल लिया है।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि:
ऐसे में सरकार बनने के कुछ ही हफ्तों में इतना बड़ा विवाद सामने आना उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
नेपाल के विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है और उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
निष्कर्ष:
सुदन गुरुंग का इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि उस राजनीतिक वादे की परीक्षा है, जिसमें भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का दावा किया गया था। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या बालेन शाह सरकार अपनी साख को बचा पाती है या नहीं।
शौर्यपथ लेख।
मुंबई की फिजाओं में जब अंडरवर्ल्ड और गैंगवार का शोर था, उस दौर में एक शख्स ऐसा भी था जिसकी ताकत न बंदूक थी और न बम। उसकी ताकत थी—जुबान और भरोसा। कराची से खाली हाथ आए एक शरणार्थी रतन खत्री ने कैसे 'मटका' जैसे अवैध धंधे को एक कॉर्पोरेट साम्राज्य की तरह खड़ा किया, यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
?️ कराची से मुंबई: एक बेनाम शरणार्थी का उदय
विभाजन की आग के बीच रतन खत्री मुंबई आए थे। छोटी-मोटी नौकरियों के बाद उन्होंने सट्टे की दुनिया में कदम रखा। लेकिन उन्होंने इस खेल को केवल 'किस्मत' तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक सिस्टम बना दिया।
⚖️ खत्री का 'पारदर्शिता' मॉडल: अंधेरे में उजाले का खेल
आमतौर पर जुए के धंधे में धोखाधड़ी आम बात थी, लेकिन खत्री ने इसे बदल दिया।
सार्वजनिक ड्रा: उन्होंने मटके से ताश के पत्तों की पर्चियां निकालने का खेल सबके सामने शुरू किया।
अटूट विश्वास: खत्री का मानना था कि अगर दांव लगाने वाले को खेल पर यकीन होगा, तभी धंधा बढ़ेगा।
नकद भुगतान: उस दौर में जब 1 करोड़ की रकम एक सपना थी, खत्री का रोजाना का टर्नओवर करोड़ों में था और जीतने वाले को उसकी रकम तुरंत मिल जाती थी।
? बॉलीवुड और 'रंगीला' रसूख
रतन खत्री का रसूख केवल सट्टा बाजार तक सीमित नहीं था, बल्कि फिल्मी गलियारों में भी उनकी तूती बोलती थी।
फिल्म प्रेरणा: 1975 की मशहूर फिल्म 'धर्मात्मा' में प्रेम नाथ का 'मटका किंग' वाला किरदार पूरी तरह खत्री से प्रेरित था।
प्रोड्यूसर की भूमिका: उन्होंने ऋषि कपूर की फिल्म 'रंगीला रतन' को प्रोड्यूस किया और उसमें एक छोटी सी भूमिका (कैमियो) भी निभाई।
? साम्राज्य का पतन और 'मटका' का अंत
हर बड़े साम्राज्य का अंत निश्चित होता है। खत्री के साथ भी यही हुआ:
इमरजेंसी का प्रहार: 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें 19 महीने जेल में बिताने पड़े।
गैंगवार और हिंसा: सट्टा बाजार में दाऊद और अन्य गिरोहों की एंट्री से खून-खराबा बढ़ने लगा।
स्वैच्छिक विदाई: अपनी 'साफ-सुथरी' छवि और सिद्धांतों के पक्के खत्री ने इस हिंसा से खुद को अलग कर लिया और 1990 के दशक तक इस धंधे को अलविदा कह दिया।
"रतन खत्री का इतिहास यह सिखाता है कि धंधा चाहे कानूनी हो या गैरकानूनी, अगर नींव 'भरोसे' पर टिकी है, तो आप एक बेताज बादशाह बन सकते हैं।"
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नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ की सियासत के सबसे चर्चित हत्याकांडों में से एक, रामअवतार जग्गी मर्डर केस में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के अध्यक्ष अमित जोगी को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी राहत मिली है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ—जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल हैं—ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
जेल जाने पर रोक: हाई कोर्ट द्वारा दिए गए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। जोगी को अभी जेल नहीं जाना होगा।
दोषसिद्धि (Conviction) पर स्टे: कोर्ट ने अमित जोगी की सजा के साथ-साथ उनकी दोषसिद्धि पर भी रोक लगा दी है।
CBI को नोटिस: शीर्ष अदालत ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा है।
दिग्गज वकीलों की दलीलें आई काम
अमित जोगी की ओर से देश के तीन दिग्गज वकीलों—कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी और विवेक तन्खा— ने पैरवी की। वकीलों ने हाई कोर्ट के फैसले की कानूनी बारीकियों और पूर्व में निचली अदालत से मिली रिहाई के तथ्यों को मजबूती से रखा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए राहत प्रदान की।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 23 साल पुराना है, जिसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिलाकर रख दिया था:
जून 2003: रायपुर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामअवतार जग्गी की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
साल 2007: निचली अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था।
अप्रैल 2026: करीब 19 साल बाद छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्या की साजिश रचने का दोषी माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस 'स्टे ऑर्डर' के बाद अमित जोगी के लिए कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक नई उम्मीद जगी है। फिलहाल यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत के अधीन है, जहाँ इसकी विस्तृत सुनवाई होगी।
दुर्ग। शौर्यपथ । शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख चौराहों में शुमार मालवीय नगर चौक अब दुर्घटनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में हुई एक बड़ी दुर्घटना के बाद भाजपा नेता विजय जलकारे ने दुर्ग की ट्रैफिक व्यवस्था और चौक के निर्माण में हुई तकनीकी खामियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बताया गया कि बुधवार, 22 जून की सुबह करीब 5 बजे राजनांदगांव से भिलाई की ओर जा रही फलों से भरी मिनी ट्रक (CG07CZ9808) के सामने अचानक एक कार आ गई, जो भिलाई से दुर्ग रेलवे स्टेशन की ओर मुड़ रही थी। कार को बचाने के प्रयास में ट्रक चालक नियंत्रण खो बैठा और वाहन पास स्थित एन.सी. नाहर के घर की बाहरी दीवार से जा टकराया।
इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन दीवार को भारी नुकसान पहुंचा और एक बड़ा हादसा टल गया।
⚠️ “तकनीकी त्रुटियों ने बनाया खतरनाक”
भाजपा नेता विजय जलकारे का कहना है कि मालवीय नगर चौक का नया निर्माण ही इसकी सबसे बड़ी समस्या बन गया है।
उनके अनुसार, चौक की डिजाइन ऐसी है कि भिलाई से आने वाले वाहन जब रेलवे स्टेशन की ओर मुड़ते हैं, तो सामने से आ रहे वाहन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, जिससे टक्कर की आशंका बढ़ जाती है।
? सिग्नल बंद तो बढ़ता खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब ट्रैफिक सिग्नल बंद रहते हैं, तब यहां हादसों की संख्या और बढ़ जाती है। जलकारे ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार मांग के बावजूद इस चौक पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती नहीं की जाती, जिससे अव्यवस्था बनी रहती है।
? दुर्घटनाओं में सबसे आगे
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, दुर्ग शहर में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं इसी चौक पर दर्ज की गई हैं, जिससे यह क्षेत्र अब “ब्लैक स्पॉट” के रूप में चिन्हित होने लगा है।
?️ प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
विजय जलकारे ने प्रशासन से मांग की है कि:
चौक की डिजाइन और तकनीकी खामियों की तत्काल जांच हो
नियमित रूप से ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए
सिग्नल व्यवस्था को दुरुस्त कर 24×7 चालू रखा जाए
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
? निष्कर्ष:
मालवीय नगर चौक की बढ़ती दुर्घटनाएं प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस ‘ब्लैक स्पॉट’ को सुरक्षित बनाने के लिए कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाते हैं।
रायपुर। शौर्यपथ । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बीच छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा है कि राज्य में अब सत्ता परिवर्तन तय है। उन्होंने दावा किया कि मतदान के शुरुआती रुझान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि जनता बदलाव चाहती है और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार की विदाई निकट है।
अरुण साव ने भरोसा जताया कि इस बार पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली पसंद बनकर उभरेगी और “कमल खिलने” के साथ राज्य को सुशासन, सुरक्षा और विकास की नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों की सुरक्षा और युवाओं को रोजगार के अवसर देना भाजपा की प्राथमिकता होगी।
? कांग्रेस पर तीखा प्रहार — “ओबीसी के मुद्दे पर दोहरा चेहरा”
उप मुख्यमंत्री साव ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी का ओबीसी वर्ग के प्रति रवैया हमेशा से दोहरा रहा है।
उनके अनुसार, जब कांग्रेस सत्ता में थी तब उसने अन्य पिछड़ा वर्ग की उपेक्षा की, लेकिन अब सत्ता से बाहर होने के बाद वह ओबीसी हितैषी बनने का दिखावा कर रही है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की पूर्व भूपेश बघेल सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में भी ओबीसी वर्ग के साथ न्याय नहीं हुआ।
? इतिहास का हवाला, कांग्रेस पर सवाल
नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए साव ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद काका कालेकर आयोग की रिपोर्ट को दबाकर रखा और मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने में भी गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वी.पी. सिंह की सरकार ने मंडल आयोग लागू किया, जबकि उस समय राजीव गांधी ने इसका विरोध किया था।
? राजनीतिक संदेश स्पष्ट
अरुण साव ने कहा कि देश और प्रदेश का ओबीसी वर्ग अब कांग्रेस के “राजनीतिक दिखावे” को समझ चुका है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगा।
? निष्कर्ष:
पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास चरम पर है। अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि क्या वास्तव में “बदलाव की बयार” सत्ता परिवर्तन में बदलती है या नहीं।
रायपुर/नवा रायपुर। शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी ताजा निर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि कोई भी शासकीय सेवक अब किसी भी राजनीतिक दल, संगठन या अन्य पद पर आसीन नहीं रह सकेगा।
? क्या है आदेश का आधार?
यह निर्देश छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत जारी किया गया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के आचरण, निष्पक्षता और कर्तव्यों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से ही निर्धारित हैं।
साथ ही, आदेश में 21 अप्रैल 2026 को जारी सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञापन का हवाला दिया गया है।
⚖️ क्या-क्या प्रतिबंध लगाए गए?
सरकार के आदेश के मुताबिक—
❌ कोई भी शासकीय सेवक किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य नहीं होगा
❌ किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी पूरी तरह प्रतिबंधित
❌ बिना अनुमति किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था, समिति या संगठन में पद धारण नहीं कर सकेगा
❌ ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होगा जिससे उसके सरकारी कार्यों की निष्पक्षता प्रभावित हो
? उल्लंघन पर क्या होगा?
सरकार ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
⚠️ दोषी पाए जाने पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत
⚠️ कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी
? सरकार का संदेश
इस फैसले के पीछे सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि—
? सरकारी तंत्र पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रहे
? जनता को निष्पक्ष और ईमानदार प्रशासनिक सेवा मिले
? क्या बदल सकता है?
इस आदेश के बाद प्रदेश में—
सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक सक्रियता पर लगाम लगेगी
प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा
शासन-प्रशासन में हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति कम होगी
? निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब “सरकारी सेवा = पूर्ण निष्पक्षता”।
राजनीति और सरकारी जिम्मेदारी को अलग रखने की यह पहल आने वाले समय में प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बना सकती है।
अम्बिकापुर। शौर्यपथ ।
सरगुजा जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने न केवल शिक्षा प्रणाली बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वरंग किड्स एकेडमी (पेशागी एजूकेशन सोसायटी), चोपड़ापारा द्वारा महज 4 वर्षीय मासूम बच्चे को केवल इसलिए प्रवेश देने से इंकार कर दिया गया क्योंकि वह हिन्दी के बजाय स्थानीय सरगुजिहा भाषा में बात करता था।
❗ मामला क्या है?
सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों में वायरल इस घटना में बताया गया कि विद्यालय प्रबंधन ने बच्चे के पिता से यह तक कह दिया कि “यहाँ बड़े घर के बच्चे पढ़ते हैं, वे भी आपके बच्चे की तरह सरगुजिहा सीख जाएंगे।” साथ ही यह तर्क दिया गया कि शिक्षक बच्चे की भाषा समझ नहीं पा रहे हैं, इसलिए प्रवेश नहीं दिया जा सकता।
⚖️ जांच में क्या निकला?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए।
जांच समिति का गठन वरिष्ठ प्राचार्य श्रीमती रूमी घोष की अध्यक्षता में किया गया।
जांच में यह पुष्टि हुई कि घटना सही है।
साथ ही यह भी सामने आया कि विद्यालय बिना विभागीय मान्यता के संचालित हो रहा था।
शाला प्रबंधन और शिक्षकों ने अपनी गलती स्वीकार कर ली।
? कानून का खुला उल्लंघन
यह पूरा मामला निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) और नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के प्रावधानों के सीधे उल्लंघन के रूप में सामने आया है, जिसमें मातृभाषा और स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
? सख्त कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी ने धारा 18(5) के तहत सख्त कदम उठाते हुए—
विद्यालय पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का आर्थिक दंड लगाया है।
साथ ही विद्यालय का संचालन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
संस्था को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित चालान के माध्यम से राशि शासन के खजाने में जमा कर उसकी प्रति प्रस्तुत करें।
? बड़ा सवाल
यह घटना शिक्षा के अधिकार और समानता के मूल सिद्धांतों पर चोट करती है। जब देश की शिक्षा नीति खुद स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात करती है, तब इस तरह का भेदभाव न केवल असंवैधानिक है बल्कि समाज में विभाजन को भी बढ़ावा देता है।
? निष्कर्ष:
सरगुजा में हुई यह कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है—
? शिक्षा के अधिकार से किसी भी बच्चे को वंचित नहीं किया जा सकता, चाहे उसकी भाषा, पृष्ठभूमि या परिस्थिति कुछ भी हो।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
