राजनांदगांव /शौर्यपथ/
पति की असमय मृत्यु हो जाने के बाद पुष्पा और उसकी बेटी के पास परिवार का केवल नाम है। न परिवार का उसे साथ मिल रहा और न ही आसरा मिल न ही जीवन-यापन के लिये कोई ठौर।इससे त्रस्त होकर पुष्पा ने बेटी के साथ कलेक्टर के साथ धरना देने का निर्णय लिया तब भी बात नही बनी तो राज्यपाल से इच्छा मृत्यु की अपील करेगी पुष्पा ।
प्रेस क्लब भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता मे अपनी दांस्ता पुष्पा लालवानी ने अपनी छोटी बच्ची के साथ बयां की । पुष्पा ने बताया कि उसने सिंधी लववानी परिवार के युवक से अंतरजाति विवाह किया था। लेकिन असमय पति की मृत्यु से उसका पूरा बसाया घर उजड गया ।
समाज के संपन्न व प्रतिष्ठित सिंधी परिवार की बहु पुष्पा गुजर बसर और बच्चे की पढ़ाई के लिए दर-दर भटक रही है । सिंधी समाज के प्रमुख लोगों ने भी इसमें मध्यस्थता करने की कोशिश की पर मध्यस्था का नहीं कोई असर दिखाई दिया और ना ही ललवानी परिवार उसे उसे अपनी बहू के रूप में मदद पहुंचाएं ऐसी भी गुंजाइश कहीं से नजर नहीं आती।
पुष्पा ने पत्रकार वार्ता में कहा की हाल में ही कोर्ट परिसर में लोक अदालत लगाई गई थी जहां पर तमाम लोगों के निराकरण और सुविधा के लिए जज साहब आए थे और मुझे भी ऐसा लग रहा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कह गए । लेकिन अब मेरे सामने मेरे खुद के जीवन यापन के साथ ही मेरे बच्चे के जीवन यापन करने में आफत आ गई है मुझे रहने खाने-पीने और अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसकी वजह मेरे ससुराल वाले है और इसको लेकर में तमाम अधिकारियों पुलिस अधिकारियों सहित डॉ किरणमई नायक मुख्यमंत्री और लगातार अधिकारी कर्मचारियों के दरवाजे की चौखट पर अपनी अर्जी लगा चुकी हूँ, लेकिन अभी तक कोई भी समाधान नहीं निकला ।
पुष्पा ने कहा कि न्याय प्राप्त करने के लिये वह अपनी बच्ची के साथ राजनांदगांव कलेक्टर ऑफिस के ठीक सामने दिन रात लगातार तब तक बैठेगी। इसके बाद भी रास्ता नहीं निकलता तो मैं महामहिम राज्यपाल से अपने और अपनी बच्ची सहित इच्छा मृत्यु की अपील करूंगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए और मानवीय पहलुओं के दृष्टिकोण से बसंतपुर थाना प्रभारी राजेश साहू ने दोनों ही समाज प्रमुख को बैठाकर सुलह का प्रयास किया था पर सिंधी समाज के प्रमुख आए तो जरूर थे पर नतीजा सिफर रहा ।