० टीके से वंचित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए 192 सत्रों में चलेगा अभियान
० शिशु के स्वस्थ जीवन के लिए काफी प्रभावी है टीका : डा. चौधरी
राजनांदगांव /शौर्यपथ/
नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के दौरान जिले में टीकाकरण से छूटे हुए दो वर्ष तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने के लिए जिला अस्पताल में मिशन इंद्रधनुष 4.0 अभियान का तीसरा चरण शुरू किया गया है, जो 11 अप्रैल तक चलाया जाएगा। इस अभियान में उन्हीं बच्चों को शामिल किया गया है जो नियमित टीकाकरण से किसी कारणवश वंचित रह जाते हैं। मिशन इंद्रधनुष के तहत टीके लगाने से गर्भवती महिलाओं के साथ ही बच्चों में भी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होगी।
इसके तहत राजनांदगांव जिले में शून्य से दो वर्ष तक के बच्चे तथा गर्भवती महिलाएं जो टीकाकरण से वंचित हो गए हैं, उनका हेड काउंट सर्वे (गणना) कर विशेष सत्रों में टीकाकरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम की शुरुआत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 25 दिसंबर 2014 को मिशन इन्द्रधनुष अभियान के नाम से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से बचाना है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. बीएल तुलावी ने बताया, 4 से 11 अप्रैल तक आयोजित होने वाले तृतीय चरण के टीकाकरण कार्यक्रम में प्रत्येक सत्र सात दिनों का रहेगा, जिसके तहत 192 टीकाकरण सत्रों में शून्य से दो वर्ष आयु वर्ग के 494 बच्चों एवं 122 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाएगा। बच्चों को मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत आने वाले टीके लगाए जाएंगे तथा गर्भवती महिलाओं को टीटी की खुराक प्रदाय की जाएगी। डॉ. तुलावी ने बताया, बच्चों व गर्भवती माताओं के लिए टीकाकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो बच्चे टीकाकृत हैं वे उन खतरनाक बीमारियों से सुरक्षित होते हैं जो अक्सर अक्षमता या मृत्यु का कारण बनते हैं। यह जानना सभी माता-पिता के लिए जरूरी है कि क्यों, कब, कहां और कितनी बार बच्चे का टीका लगवाना चाहिए। साथ ही उन्हें यह भी जानने की आवश्यकता है कि बीमार तथा अक्षम या कुपोषण से पीड़ित बच्चे को भी टीका लगवाना सुरक्षित होता है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वस्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मिथिलेश चौधरी ने बतायाः कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा के निर्देश पर जिले में नियमित टीकाकरण के अंतर्गत बच्चों व गर्भवती महिलाओं को गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए प्रतिरक्षित किया जा रहा है। नियमित टीकाकरण न कराने वाले बच्चों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है जिस कारण उनके शरीर में जानलेवा बीमारियों से लड़ने की ताकत नहीं आ पाती। कई बार टीकाकरण से छूटे बच्चे इन रोगों की चपेट में आ जाते हैं जिससे दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शिशुओं के जीवन और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है।