राजनांदगांव /शौर्यपथ/
नंदग्राम के नाम से विख्यात राजनांदगांव 26 जनवरी 1973 को दुर्ग जिले से अलग होकर अस्तित्व में आया पर आज अपने खुद के अस्तित्व को बचाने में असमर्थ है। 1 जुलाई 1998 को इसे सर्वप्रथम बांटकर नया जिला कबीरधाम बनाया गया और अब फिर एक नया जिला . अपने राजनीतिक स्वार्थ को साधने के लिए इसके और नए टुकड़े किए जा रहे हैं ।
बीते दिनों हुए खैरागढ़ उपचुनाव में मुख्यमंत्री द्वारा खैरागढ़ को नया जिला बनाने की घोषणा की गई थी इस घोषणा से यह प्रतीत हो रहा था कि कांग्रेस के पास राजनांदगांव के टुकड़े कर चुनाव जीतने के सिवाय और कोई ठोस मुद्दा नहीं था। कांग्रेस को लाओ 24 घंटे में नया जिला पाओ की घोषणा चुनाव जीतने का मुख्य नारा बन गया था। हुआ भी यही कांग्रेस की यशोदा वर्मा भाजपा के कोमल जंघेल को हराकर पहली महिला ओबीसी विधायक बनी और मुख्यमंत्री ने अपने किए गए वादे को भी निभाया और खैरागढ़ छुईखदान गंडई को मिलाकर एक नया जिला घोषित किया। राजनांदगांव के कांग्रेसी कार्यकर्ता इस जीत पर बहुत खुश हुए तथा अपने राजनांदगांव जिला के टुकड़े होने पर झूमते नजर आए।
खनिज एवं वन संपदा से परिपूर्ण राजनांदगांव जिला आज अपने खुद के अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ाई लडऩे वाले की तलाश कर रहा है और यह सोच रहा है कि अपने स्वार्थ के लिए मेरे और कितने टुकड़े भविष्य में किए जाएंगे ।क्या आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए मुझे फिर नेताओं द्वारा दाव पर लगाया जाएगा खैरागढ़ उपचुनाव खत्म होने के बाद एक नई मांग सामने आई है कि राजनांदगांव को संभाग बनाया जाए फिलहाल अभी तो कोई चुनाव नहीं है देखा जाएगा कि यह मांग पूरी होती है कि नहीं या फिर इसे आगामी विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुद्दा बनाया जाएगा.