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गरीब बच्चों को नहीं दिलाया प्रवेश, मानव अधिकार आयोग करेगा जांच

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गरीब बच्चों को नहीं दिलाया प्रवेश, मानव अधिकार आयोग करेगा जांच

राजनांदगांव / शौर्यपथ /

जिले में शिक्षा का अधिकार कानून को मजाक बना दिया गया है, गरीब बच्चे नि:शुल्क शिक्षा पाने भटक रहे है। कोरोना काल में बंद हुए प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् आरटीई के गरीब बच्चे नि:शुल्क शिक्षा पाने भटक रहे है। कुछ पालकों ने तो पुलिस विभाग में भी लिखित शिकायत कर आरटीई नोडल अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे है, क्योंकि उनके बच्चे आज किसी भी स्कूल में नहीं जा रहे है, लेकिन शिक्षा विभाग के द्वारा विधानसभा में जानकारी देकर यह बताया गया है कि उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाया जा चुका है, जिससे पालकों में भी आक्रोश है।
वहीं दूसरी ओर कई प्रायवेट स्कूल ऐसे है जो सिर्फ कक्षा आठवीं तक ही संचालित है उनमें भी सैकड़ों आरटीई के गरीब बच्चों को प्रवेश दिलाया गया था, जो इस वर्ष कक्षा आठवी उत्तीर्ण कर कक्षा नवमीं में प्रवेश किए है जिन्हें किसी अन्य स्कूलों में कक्षा नवमीं में प्रवेश दिलाया जाना है, लेकिन शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी उन्हें अन्यत्र स्कूलों में प्रवेश दिलाने में कोई रूचि नहीं दिखा रहे है। पीडि़त पालकों के द्वारा कलेक्टर से लिखित शिकायत कर आरटीई नोडल अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे है।
गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दिलाया जा रहा है, जिसको लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन की लिखित शिकायत पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग दिल्ली ने राज्य मानव अधिकार आयोग रायपुर को जांच का आदेश दिया है।
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल का कहना है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल की सरकार यह दावा कर रही है कि शिक्षा का अधिकार कानून का लाभ अब कक्षा बारहवीं तक मिल रहा है, लेकिन जिले के लगभग 1500 गरीब बच्चे जो कक्षा आठवीं उत्तीर्ण कर चुके है, उन्हें कक्षा नवमी में प्रवेश दिलाने में शिक्षा विभाग रूचि नहीं दिखा रहा है।
श्री पॉल का कहना है कि जिले के सैकड़ों गरीब बच्चों के पालक इस भीषण गर्मी मे अपना काम-धंधा छोड़कर अपने बच्चों को किसी अन्य स्कूल के कक्षा नवमी में प्रवेश दिलाने भटक रहे है और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी वातानुकूल कमरे में बैठकर मजे मार रहे है।
इतना ही नहीं जो गरीब बच्चा नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक प्रायवेट अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ाई पूर्ण किया है उसे अब शिक्षा विभाग के द्वारा सरकारी हिन्दी माध्यम के स्कूलों के कक्षा नवमीं में प्रवेश दिलाया जाने की योजना पर पालकों में भारी आक्रोश है।

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