कवर्धा / शौर्यपथ /
भीषण गर्मी से अनेक तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में सतर्कता व जागरूकता ही बचाव के लिए जरूरी है। शासन-प्रशासन की ओर से उपचार की व्यवस्था कर ली गई है लेकिन ज्यादा उचित है कि बचाव के उपायों को अपनाकर सुरक्षित रहा जाए। डॉ मुखर्जी ने बताया कि गर्मियों में लू अथवा हीट स्ट्रोक, फूड पॉइजनिंग, डिहाइड्रेशन, पीलिया, टाइफाइड, चिकन पॉक्स व स्किन सम्बन्धी समस्या बढ़ सकती है अत: सतर्क रहना जरूरी है वरना यह जानलेवा हो सकते हैं।
लू से बचें
डॉ मुखर्जी ने बताया कि लू यानी कि हीट स्ट्रोक जिसे मेडिकल टर्म में 'हाइपरथर्मियाÓ कहा जाता है। गर्मी के मौसम में होने वाली सबसे कॉमन बीमारियों में से ये एक है। लंबे समय तक तेज धूप में रहने के कारण लू की चपेट में आ सकते हैं। हीट स्ट्रोक होने पर सिर में तेज दर्द, तेज बुखार, उल्?टी, तेज सांस लेना,चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या बेहोश हो जाना, यूरिन कम पास होना जैसे लक्षण आते हैं। इससे बचने के लिए कभी भी खाली पेट घर से बाहर ना निकलें। हाइड्रेट रहें और जहां तक हो सके खुद को ढक कर ही धूप में जाएं। कोशिश करें कि अतिआवश्यक न हो तो दोपहर 11 बजे से 4 बजे तक घर पर रहें।
फ़ूड पॉइजनिंग
फ़ूड पॉइजनिंग भी गर्मियों में होने वाली एक कॉमन समस्या है। यह दूषित भोजन या दूषित पानी के सेवन से होता है। इस मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से ग्रोथ करते हैं, ऐसे में शरीर के अंदर अगर किसी तरह का बैक्?टीरिया, वायरस, टॉक्सिन आदि चला जाए तो फूड पॉइजनिंग हो सकता है। इसके लक्षण की बात करें तो इसमें पेट दर्द, जी मिचलाना, दस्त, बुखार और शरीर में दर्द आदि होते हैं। इसमें ना सिर्फ पेट मरोड़ के साथ दर्द करता है, बल्कि डायरिया, उल्टी जैसी समस्याएं भी नजर आने लगती हैं। इसलिए इस मौसम में खुले में बिक रहा खाना, ठंडा खाना, बासी खाना या दूषित खाना आदि से बचना बहुत जरूरी है। कोशिश करें साफ और ताजा खाना खाएं।
टायफाइड
टायफाइड एक ऐसी बीमारी है जो दूषित पानी पीने से होती है। आमतौर पर जब संक्रमित बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है तब टायफाइड की समस्या होती है।
लक्षण- टायफाइड में तेज बुखार, भूख ना लगना, पेट में तेज दर्द होना, कमजोरी महसूस होना जैसे लक्षण नजर आते हैं।
बचाव- गर्मी के मौसम में टायफाइड का खतरा ज्यादा रहता है। इससे बचने के लिए बाहर का दूषित खाना ना खाएं और साफ पानी पिएं। टायफाइड से बचने के लिए वैक्सीन भी लिया जा सकता है।
खसरा(चिकनपॉक्स)
गर्मियों में मीजल्स यानी खसरा और चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है।मीजल्स और चिकनपॉक्स दोनों ही वायरस से होने वाली बीमारी है।
बचाव- मीजल्स से बचने के लिए नवजात शिशुओं को एम एम आर का टीका लगाया जाता है। वहीं, चिकनपॉक्स से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए अपने हाथों को अच्छी तरह से धोएं, सैनिटाइज करें, बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
मौत की वजह न बने शरीर का अधिक तापमान
गर्मी में तेजी से वृद्धि शरीर के तापमान के समतुलन को प्रभावित करता है, इससे ऐंठन, थकावट, हीटस्ट्रोक और हाइपरथर्मिया सहित हार्ट अटैक जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। शरीर का अधिक तापमान हीटवेव्स कार्डियोवैस्कुलर, श्वसन, और सेरेब्रोवास्कुलर बीमारी और मधुमेह सहित कई स्थितियों को भी खराब कर सकती हैं।
बहुत तेज़ धूप या हीटवेव्स के कारण हीटस्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है। मानव शरीर का सामान्य तापमान लगभग 98.7 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है। और इसे नियंत्रित न कर पाने पर हीटस्ट्रोक होता है। हीटस्ट्रोक के कारण व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है या उसे उल्टियां आ सकती हैं। शरीर में तेज़ दर्द भी इसका कारण हो सकता है। इसकी वजह से रक्त का तापमान बढ़ता है और अचानक हृदयघात हो सकती है, जिससे मौत का खतरा होता है।
शासन की ओर से पुख्ता है इंतजाम*
डॉ मुखर्जी ने बताया कि गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए शासन व जिला प्रशासन के सहयोग व मार्गदर्शन से स्वास्थ्य विभाग की ओर से तैयारियां पुख्ता कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि जिले में सभी स्वास्थ्य केंद्रों में ओ आर एस व जिंक कॉर्नर बनवाया गया है, साथ ही आपातकाल के लिए जिला अस्पताल समेत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग से वार्ड की व्यवस्था करने का निर्देश भी दिए गए हैं। इन बीमारियों से बचाव हेतु जिला अस्पताल समेत सभी विकास खंडों में टीम गठन किया गया है। समस्त शासकीय अस्पतालों में ओपीडी , प्रतीक्षा कक्षों में कूलर की अनिवार्य व्यवस्था भी करवा दिया गया है।