राजनांदगांव /शौर्यपथ/
शिक्षा विभाग में जिस प्रकार से विगत दो वर्षो में कई घोटालों का खुलासा हो चुका है और विधानसभा में भी लगातार विधायकगण सवाल उठा रहे है, इससे ना सिर्फ विभाग की बल्कि सरकार की भी छवि धुमिल हो रही है।
लगातार अखबारों में विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता, कमीश्नखोरी की समाचार प्रकाशित हो रही है, जिससे जिला प्रशासन भी परेशान नजर आ रहा है। सिर्फ जिला शिक्षा अधिकारियों को जिले से ट्रांसफर कर देने से विभाग से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं किया जा सकता है, इसके लिए विभाग में पदस्थ दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करने की जरूरत है जो हो नहीं रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में जिस प्रकार थोक के भाव में दूसरे संस्थाओं से प्राचार्यो, व्याख्याताओं, और बाबूओं को नियम विपरीत संलग्न कर रखा गया है, जबकि राज्य सरकार ने संलग्नीकरण समाप्त करने का आदेश दे चुकी है।
प्रायवेट स्कूलों में दी जाने वाली आरटीई प्रतिपूर्ति राशि और प्रायवेट स्कूलों में अध्ययनरत् गरीब बच्चों की जानकारी जिस प्रकार छिपाया जा रहा है, और प्रतिपूर्ति राशि वितरण में हो रही गड़बड़ी की लगातार शिकायतें हो रही है इससे तो अब विभाग को यह जानकारी सार्वजनिक कर देना चाहिए कि किस प्रायवेट स्कूल में कौन गरीब बच्चा अध्ययनरत् है और किस प्रायवेट स्कूल को कितनी प्रतिपूर्ति राशि मिल रही है।
विभाग द्वारा जिस प्रकार सदन में लगातार मिथ्या व भ्रामक जानकारी भेज रहा है और आरटीई के अंतर्गत प्रवेश पाने के लिए निकाले जाने वाले ऑनलाईन लॉटरी में भी प्रतिवर्ष गड़बड़ी की जा रही है, जिससे पात्र गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है और अब पीडि़त पालकगण प्रमुख सचिव को दस्तावेजी साक्ष्य भेजकर आरटीई नोडल ऑफिसर आदित्य खरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे है।