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मुख्यमंत्री साय की पहली सार्वजनिक सभा :मुख्यमंत्री के पहले संबोधन में नजर आई भावी छत्तीसगढ़ की तस्वीर Featured

मुख्यमंत्री साय की पहली सार्वजनिक सभा :मुख्यमंत्री के पहले संबोधन में नजर आई भावी छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री साय की पहली सार्वजनिक सभा :मुख्यमंत्री के पहले संबोधन में नजर आई भावी छत्तीसगढ़ की तस्वीर
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छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री ने अपनी पहली सार्वजनिक सभा को संबोधित किया

   रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 16 दिसंबर को विकसित भारत संकल्प यात्रा के शुभारंभ के दौरान अपनी पहली सार्वजनिक सभा को संबंधित किया। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद यह पहला अवसर था जब राजधानी रायपुर से एक आदिवासी मुख्यमंत्री की आवाज न केवल कार्यक्रम स्थल पर, बल्कि छत्तीसगढ़ के गांव-गांव और शहर-शहर में गूंज रही थी। कार्यक्रम का वीडियो प्रसारण सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में भी देखा-सुना गया। 32 प्रतिशत की आदिवासी जनसंख्या वाले छत्तीसगढ़ राज्य में नये मुख्यमंत्री, भारत सरकार से प्रदेश को मिली गारंटियों को लागू करने का अपना संकल्प पूरे आत्मविश्वास के साथ दोहरा रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री होने के नाते मैं आश्वस्त करना चाहता हूं मोदी की गारंटी पूरी होगी। वे यह कहना भी नहीं भूले कि इस गारंटी में समाज के सभी वर्ग के लोगों की चिंता की गई है।
   विकसित भारत संकल्प यात्रा केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं के प्रचार-प्रचार के साथ-साथ आम लोगों को उनसे लाभान्वित करने के उद्देश्य से भी आयोजित की जा रही है। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किया, उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। प्रधानमंत्री के संबोधन से ठीक पहले मुख्यमंत्री का संबोधन था, उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानंत्री ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो न केवल योजनाएं बनाते हैं, बल्कि योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाया जाना भी सुनिश्चित करते हैं। मुख्यमंत्री साय ने अपने उन अनुभवों को भी साझा किया जब वे 2014 में राज्यमंत्री थे और तब प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अपने पहले संबोधन में कहा था कि उनकी सरकार गरीबों को समर्पित सरकार होगी।
  अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बार-बार भारत सरकार को उद्धृत करते हुए अपने नेतृत्व वाली राज्य सरकार की भावी रीति-नीति और लक्ष्यों को भी लोगों के सामने स्पष्ट कर दिया। इस संबोधन के दौरान श्री साय की आत्मविश्वास से लबरेज भाव-भंगिमा, शब्द, आवाज और विचारों ने राज्य के नागरिकों के सामने सदृढ़ सुशासन की भी गारंटी रख दी है। श्री साय ने अपना पहला संबोधन छत्तीसगढ़ी में दिया, उनका यह निर्णय इंगित करता है कि आने वाले दिनों में सामाजिक-सांस्कृतिक विकास की जड़ें गहरी होंगी, तना होगा और शाखाएं फलों से लदी होंगी।

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शौर्यपथ

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