शौर्यपथ विस्तृत रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के लोक पर्व 'करमा' पर आयोजित हो रही प्रतियोगिताओं को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने विरोध की आवाज बुलंद की है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा—"हमारी लोकपरंपरा व आस्था का पर्व करमा पूरे समाज को जोड़ने और सद्भाव का संदेश देने के लिए है, यह किसी प्रतिस्पर्धा का हिस्सा नहीं हो सकता। धर्म और आस्था के आयोजन को मंच, पुरस्कार या किसी अन्य प्रतिस्पर्धी स्वरूप में बदलना समाज की भावनाओं को आहत करता है।"
रवि भगत का कहना है कि युवाओं और आयोजकों को चाहिए कि वे करमा जैसे पर्व का सम्मान करें और इसे जोड़ने की परंपरा को बनाए रखें, न कि प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनाएं। उन्होंने महोत्सव आयोजकों से गुजारिश की है कि वे इसकी मौलिकता संरक्षित रखें, ताकि अगली पीढ़ी भी यही संस्कृति गर्व से अपना सके।
पूर्व अध्यक्ष ने भविष्य में समाजिक आयोजनों को व्यावसायिक या प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप देने के बजाए, मूल परंपरा व आस्था की भावना को बनाए रखने की जरूरत दोहराई है। सोशल मीडिया पर उनकी इस अपील को समाज के कई युवा और नागरिक भी समर्थन दे रहे हैं।
संवेदनशील टिप्पणी
रवि भगत का बयान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर, पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक एकता की रक्षा करने वाला है। करमा महोत्सव एक 'आस्था' का पर्व है—प्रतिस्पर्धा या निजी लाभ का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और संस्कृति के संरक्षण का द्योतक है। ऐसे त्योहारों को मूल स्वरूप में ही आगे बढ़ाना ही हमारी साझा जिम्मेदारी है।
नोट: रवि भगत ने अपने फेसबुक पेज पर इस विषय में वीडियो/पोस्ट द्वारा विस्तृत टिप्पणी की है, जिसे छत्तीसगढ़ के जनमानस से बड़ा समर्थन मिल रहा है।