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केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया ऐतिहासिक सिरपुर के पुरातात्विक धरोहरों का निरीक्षण

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सिरपुर को विश्व धरोहर मानचित्र पर स्थापित करने केंद्र–राज्य मिलकर करेंगे कार्य

शौर्यपथ, महासमुन्द ब्यूरो / संतराम कुर्रे
भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज महासमुंद जिले के ऐतिहासिक एवं समृद्ध पुरातात्विक स्थल सिरपुर का दौरा किया। उनके साथ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा राज्य के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे। हेलीपैड पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक महासमुंद योगेश्वर राजू सिन्हा, कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक प्रभास कुमार सहित जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया।

ऐतिहासिक धरोहरों का गहन अवलोकन

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने सिरपुर पहुंचकर लक्ष्मण देवालय, आनंद प्रभु कुटी विहार, तिवरदेव विहार, सुरंग टीला तथा स्थानीय हाट बाजार का निरीक्षण किया। उन्होंने सिरपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा—
“सिरपुर भारत की प्राचीन धरोहर का अद्वितीय केंद्र है, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाएगी।”
निरीक्षण के दौरान उन्होंने संरक्षण व विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और निर्देश दिया कि पुरातात्विक स्थलों की मूल संरचना को सुरक्षित रखते हुए सौंदर्य एवं सुविधाओं का विकास किया जाए।पर्यटकों की सुविधा हेतु सड़क, साइन बोर्ड, सूचना केंद्र, स्वच्छता, पार्किंग एवं मूलभूत सुविधाएं मजबूत की जाएं। सिरपुर में कनेक्टिविटी बढ़ाई जाए जिससे पर्यटन में तीव्र वृद्धि हो सके।उन्होंने कहा कि सिरपुर को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास जारी हैं।
गंधेश्वर महादेव का दर्शन
दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गंधेश्वर मंदिर पहुंचे और गंधेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर देश की समृद्धि और कल्याण की कामना की।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, राज्य बीज निगम अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर, पूर्व मंत्री पूनम चंद्राकर, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखम ठाकुर, जनपद अध्यक्ष दिशा दीवान, नगर पालिका उपाध्यक्ष देवी चंद राठी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा—“राज्य सरकार सिरपुर के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर रही है, ताकि पर्यटन के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हों।”उन्होंने बताया कि आज भोरमदेव कॉरिडोर का भी शुभारंभ होगा।

सिरपुर—प्राचीन श्रीपुर की धरोहर

सिरपुर, जिसका प्राचीन नाम श्रीपुर/श्रिपुरा है, महानदी तट पर बसा एक ऐतिहासिक नगर है। इसका इतिहास 5वीं से 12वीं सदी तक व्यापक रूप से फैला है। यह दक्षिण कोसल का प्रमुख राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन तीनों धर्मों के मठ, मंदिर और विहारों का अनूठा संगम मिलता है। खुदाई में यहां—22 शिव मंदिर ,5 विष्णु मंदिर ,10 बौद्ध विहार ,3 जैन विहार के अवशेष मिले हैं, जो इसे भारत के सबसे समृद्ध पुरातात्विक क्षेत्रों में शामिल करते हैं।

सिरपुर के प्रमुख स्थल — संक्षिप्त परिचय

लक्ष्मण देवालय (6वीं–7वीं सदी)
लाल ईंटों से निर्मित, भगवान विष्णु को समर्पित यह प्राचीन मंदिर महारानी वासटादेवी द्वारा अपने पति राजा हर्षगुप्त की स्मृति में निर्मित किया गया। इसे प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है।

तिवरदेव विहार (7वीं–8वीं सदी)
बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र, जहां ध्यान, शिक्षा और धार्मिक क्रियाएं संपन्न होती थीं। खुदाई में ईंटों से निर्मित विशाल परिसर के अवशेष मिले हैं।

आनंद प्रभु कुटी विहार
14 कक्षों वाला यह भव्य बौद्ध विहार भिक्षु आनंद प्रभु द्वारा स्थापित किया गया था। यहां बुद्ध की विशाल प्रतिमा सहित अनेक बौद्ध मूर्तियां पाई गई हैं।

सुरंग टीला (7वीं सदी)
विशिष्ट संरचना वाला यह पौराणिक स्थल पांच गर्भगृहों वाला मंदिर था, जिसमें शिवलिंग और गणेश प्रतिमा पाई गई हैं। इसकी वास्तुकला सिरपुर को अनूठी पहचान देती है।

सिरपुर—विश्व धरोहर की ओर
जनप्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष सिरपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने हेतु अपने सुझाव रखे। केंद्रीय मंत्री ने आश्वस्त किया कि संरक्षण, कनेक्टिविटी और पर्यटन विकास के माध्यम से सिरपुर को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जाएगी।

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