राजनांदगांव /शौर्यपथ / कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि पर आधारित प्रख्यात साहित्यकार एवं केंद्रीय विद्यालय खैरागढ़ के हिंदी शिक्षक डॉ. योगेंद्र पांडेय के नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ का विमोचन डॉ. प्रकाश खूंटे द्वारा किया गया। यह विमोचन हिंदी साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. योगेंद्र पांडेय निरंतर साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं। उनके अनेक उपन्यास, कहानियाँ एवं साहित्यिक रचनाएँ विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी लेखनी में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना और समकालीन विषयों की प्रभावशाली अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। नवीनतम उपन्यास ‘यशस्विनी’ कोरोना काल के कठिन समय में समाज, परिवार और व्यक्ति के संघर्ष, पीड़ा, धैर्य और आशा को संवेदनशील भाषा में प्रस्तुत करता है। यह कृति महामारी के दौर को साहित्य के माध्यम से सहेजने का एक सार्थक प्रयास है। उपन्यास का विमोचन करते हुए डॉ. प्रकाश खूंटे ने इसे समकालीन हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह उपन्यास पाठकों के बीच विशेष स्थान बनाएगा और समाज को आत्ममंथन की दिशा में प्रेरित करेगा।
छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों के लिए यह गर्व का विषय है कि वे अपनी भाषा और संस्कृति को शिखा की तरह प्रज्वलित रखते हुए हिंदी साहित्य को नई ऊर्जा, नई दिशा और नई पहचान प्रदान कर रहे हैं। इससे न केवल राज्य की साहित्यिक पहचान सशक्त होती है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा मिलती है। उपन्यास ‘यशस्विनी’ के प्रकाशन पर डॉ. योगेंद्र पांडेय को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं तथा उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की गई।