दुर्ग | शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की संवैधानिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में दुर्ग जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। कल, 14 अप्रैल को जिले की समस्त ग्राम पंचायतों और उनके आश्रित ग्रामों में ग्राम सभाओं का महा-आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल सरकारी योजनाओं की समीक्षा का मंच बनेगा, बल्कि ग्रामीणों को अपने गांव की सरकार (पंचायत) से सीधे सवाल पूछने और विकास की रूपरेखा तय करने का अधिकार भी देगा।
क्यों खास है यह आयोजन?
छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार, पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा-6 के तहत हर तीन माह में ग्राम सभा का आयोजन अनिवार्य है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत ने बताया कि इस बार की सभाओं के लिए विस्तृत समय-सारिणी तैयार की गई है और नोडल अधिकारियों को कड़े दायित्व सौंपे गए हैं ताकि कोई भी मुद्दा अनसुना न रहे।
चर्चा के प्रमुख केंद्र-बिंदु (एजेंडा)
ग्राम सभा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों पर बिंदुवार चर्चा की जाएगी:
वित्तीय लेखा-जोखा: पिछली तिमाही के आय-व्यय का विवरण जनता के सामने रखा जाएगा और उसका अनुमोदन लिया जाएगा।
डिजिटल पंचायत: 'समर्थ पंचायत पोर्टल' के माध्यम से संपत्ति कर निर्धारण और संग्रहण प्रणाली को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी।
अधूरे कार्य और बकाया: पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के लंबित लेखों तथा गांव में चल रहे विकास कार्यों की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट पेश होगी।
सामाजिक सरोकार: सड़कों पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के उपाय, मुक्तिधामों की सफाई और राशन वितरण (खाद्यान्न) की जानकारी का वाचन किया जाएगा।
राजस्व एवं प्रमाणन: नामांतरण, बंटवारा प्रकरणों की समीक्षा के साथ-साथ जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीयन की स्थिति जांची जाएगी।
पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 का होगा अनावरण
इस बार की ग्राम सभा का मुख्य आकर्षण 'पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0' के परिणामों का प्रस्तुतीकरण होगा। इसके जरिए ग्रामीण यह जान सकेंगे कि विकास के पैमानों पर उनका गांव किस स्तर पर है। जहां कमियां पाई जाएंगी, वहां सुधार के लिए तत्काल नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
प्रशासन की अपील: "आपकी भागीदारी, गांव की तरक्की"
जिला पंचायत सीईओ ने सभी ग्रामवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा है कि:
"ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन सबसे शक्तिशाली इकाई है। अधिक से अधिक संख्या में पहुंचें और सक्रिय भागीदारी निभाएं ताकि गांव में पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशी विकास सुनि
श्चित हो सके।"