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बस्तर में “आज़ादी का सूर्योदय”: अमित शाह ने किया शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र का शुभारंभ “जहां कभी गोलियों की गूंज थी, वहां अब जनसेवा की शुरुआत”

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जगदलपुर/बस्तर ।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने रविवार को छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के नेतानार गांव में “शहीद वीर गुण्डाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केन्द्र” का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि दशकों तक हिंसा और भय से जूझते बस्तर में विकास, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बनकर सामने आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक श्री तपन डेका सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।


“वीर गुण्डाधुर की भूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ”

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि बस्तर की यह धरती केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव और प्रेरणा का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1910 में वीर गुण्डाधुर ने भूमकाल विद्रोह के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ आदिवासी अस्मिता और स्वतंत्रता की लड़ाई छेड़ी थी।

शाह ने कहा—

“शहीद वीर गुण्डाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि हर भारतीय के लिए तीर्थ समान है। उन्हीं की प्रेरणा से आज सुरक्षा कैंप को सेवा कैंप में बदला जा रहा है।”


जहां 6 जवान शहीद हुए, वहीं अब बनेगा जनसेवा का केंद्र

अमित शाह ने भावुक स्वर में कहा कि यही वह क्षेत्र है जहां नक्सल हिंसा में 6 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या हुई थी। स्कूल, अस्पताल और विकास कार्यों को नष्ट किया गया, आदिवासियों को शिक्षा, रोजगार और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा गया।

उन्होंने कहा—

“आज उसी स्थान पर गरीब आदिवासियों की सेवा का तीर्थ बनाया जा रहा है। यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक परिवर्तन है।”


“नक्सलवाद खत्म करने का मतलब केवल हथियार खत्म करना नहीं”

केंद्रीय गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि अब गांवों में—

  • सस्ते राशन की दुकानें,
  • प्राथमिक विद्यालय,
  • PSC एवं CSC केंद्र,
  • आधार कार्ड और राशन कार्ड सुविधा,
  • हर घर पेयजल योजना,
  • प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख तक मुफ्त इलाज

जैसी सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं।


“नक्सलवाद ने विकास रोका, विकास की कमी ने नहीं”

अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा—

“नक्सलियों ने वर्षों तक यह भ्रम फैलाया कि विकास न होने के कारण उन्होंने हथियार उठाए। सच्चाई यह है कि विकास इसलिए नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने हथियार उठा रखे थे।”

उन्होंने कहा कि रायपुर जैसे शहरों में जो विकास हुआ है, वही सुविधाएं अब एक-एक गांव तक पहुंचाई जाएंगी।


70 सुरक्षा कैंप बनेंगे जनसेवा केंद्र

गृह मंत्री ने घोषणा की कि बस्तर क्षेत्र में मौजूद लगभग 200 कैंपों में से 70 कैंपों को अगले डेढ़ वर्षों में इसी प्रकार के आधुनिक जनसेवा केंद्रों में बदला जाएगा।

इन केंद्रों में उपलब्ध होंगी—

  • बैंकिंग सेवाएं,
  • आधार एवं राशन कार्ड निर्माण,
  • सरकारी योजनाओं की राशि वितरण,
  • कॉमन सर्विस सेंटर,
  • केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ

एक ही स्थान पर।


“1947 में देश आजाद हुआ, बस्तर में 2026 में”

अमित शाह का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कहा—

“देशभर में आजादी 1947 में आई थी, मगर बस्तर में 31 मार्च 2026 के बाद आजादी का सूर्योदय हुआ है।”

उन्होंने कहा कि दशकों की हिंसा और पिछड़ेपन से हुए नुकसान की भरपाई अगले पांच वर्षों में करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है।


आदिवासी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

गृह मंत्री ने कहा कि सरकार केवल सुरक्षा और सड़क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आदिवासी संस्कृति, खेल और परंपराओं को भी विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का काम करेगी।

इसी उद्देश्य से—

  • बस्तर ओलंपिक
  • बस्तर पंडुम

जैसी पहल शुरू की गई हैं, जिनके माध्यम से आदिवासी खेल, साहित्य, संगीत, भाषा, कला और खानपान को बढ़ावा दिया जा रहा है।


विकास, विश्वास और बदलाव का नया अध्याय

नेतानार में शुरू हुआ यह जन सुविधा केंद्र बस्तर में उस परिवर्तन की तस्वीर बनकर उभरा है, जहां कभी भय और बंदूकें थीं, वहां अब विकास, सेवाएं और लोकतंत्र की पहुंच दिखाई दे रही है।

सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में बस्तर केवल नक्सलवाद से मुक्त क्षेत्र नहीं, बल्कि देश के सबसे तेज़ी से विकसित होने वाले आदिवासी क्षेत्रों में शामिल होगा।

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