सूत्रों का दावा- बेलर, उमरगांव और सिहावा के कुछ खाद कारोबारियों का नेटवर्क सक्रिय, POC नियमों पर उठे सवाल; कृषि विभाग से जांच की मांग
थरुण कुमार की खास रिपोर्ट
धमतरी/नगरी। धमतरी जिले के बेलर क्षेत्र में किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली रासायनिक खाद की कथित अवैध तस्करी का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार बेलर, उमरगांव और सिहावा क्षेत्र के कुछ खाद कारोबारियों का सिंडिकेट सक्रिय है, जो बड़ी मात्रा में खाद को गोदामों में डंप कर जैतपुरी मार्ग या नवागांव रास्ते ओडिशा भेज रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो इससे स्थानीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन ट्रैक्टर पिकअप वाहनों के माध्यम से खाद की खेप सीमा पार भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि बेलर क्षेत्र इस कथित नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां से खाद का संग्रहण और परिवहन किया जा रहा है।
नियमों के अनुसार खाद की बिक्री पीओएस (POS/POC) मशीन के माध्यम से की जाती है, जिसमें खरीदार का आधार कार्ड और भूमि संबंधी दस्तावेज दर्ज किए जाते हैं। कृषि विभाग का भी कहना है कि बिना आधार और भूमि रिकॉर्ड के खाद की बिक्री नहीं की जा सकती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खाद वास्तव में दूसरे राज्य भेजी जा रही है तो उसकी बिक्री का रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज किया जा रहा है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ कारोबारी खुलेआम यह कहते हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है क्योंकि संबंधित अधिकारियों तक पैसा पहुंचता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालने वाला मामला होगा। स्थानीय किसानों का कहना है कि कई बार खाद की कमी का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर बड़े पैमाने पर खाद बाहर भेजे जाने की चर्चा लगातार होती रहती है।
अब जरूरत इस बात की है कि कृषि विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। खाद विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन, पीओएस मशीनों के रिकॉर्ड का मिलान तथा सीमा क्षेत्रों में वाहनों की निगरानी से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी .