सर्व आदिवासी समाज ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण पर दिया जोर, महिला आयोग ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रदेश की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के अनुरूप प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में बस्तर से सरगुजा तक के सामाजिक प्रतिनिधियों की आवाज समिति के सामने पहुंची। सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, राज्य महिला आयोग और राज्य फिल्म विकास निगम के पदाधिकारियों ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और लिव-इन संबंध जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने सुझाव रखे।
UCC समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह तथा सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े ने विभिन्न पक्षों को विस्तार से सुना। समिति की ओर से कहा गया कि संहिता तैयार करते समय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक विविधता और स्थानीय परंपराओं को ध्यान में रखा जाएगा।
आदिवासी समाज बोला—परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की हो सुरक्षा
परिचर्चा में कंवर, गोंड, बैगा और उरांव सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक परंपराएं उसकी विशिष्ट पहचान हैं। इसलिए प्रस्तावित कानून में इन परंपराओं और सांस्कृतिक विशिष्टताओं के संरक्षण का पर्याप्त प्रावधान होना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने इसके साथ ही विवाह पंजीयन, महिलाओं के संपत्ति अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक एवं वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर भी समिति के समक्ष अपने सुझाव दिए। उनका जोर इस बात पर रहा कि समानता के उद्देश्य के साथ-साथ स्थानीय सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक संस्थाओं की वास्तविकताओं को भी समझा जाए।
महिला अधिकार और सामाजिक सुरक्षा पर भी जोर
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सकारात्मक सामाजिक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने तथा धर्म परिवर्तन पर रोक से जुड़े विषयों के संदर्भ में UCC की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि विवाह एवं संपत्ति अधिकारों में समानता समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है।
जनसंवाद के जरिए तैयार होगा प्रस्तावित प्रारूप
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के लिए नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने का प्रावधान है। इसी संवैधानिक भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में UCC समिति प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद कर रही है। प्रस्तावित संहिता के अंतर्गत विवाह एवं तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन संबंधों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, कानूनविदों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सुझाव जुटा रही है। बस्तर से सरगुजा तक सामने आ रहे विभिन्न दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने की यह प्रक्रिया इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित UCC के प्रारूप को स्थानीय सामाजिक विविधता, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन के आधार पर तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।