राजनांदगांव। शौर्यपथ / खेती-किसानी में कीटनाशकों का उपयोग फसलों को कीटों से बचाने के लिए किया जाता है, लेकिन इनके छिड़काव के दौरान बरती गई लापरवाही किसान के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। मेडिकल कॉलेज राजनांदगांव के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रकाश खुटे ने किसानों से कीटनाशकों का उपयोग करते समय सुरक्षा संबंधी सावधानियों का अनिवार्य रूप से पालन करने की अपील की है।
डॉ. खुटे ने बताया कि कीटनाशक रसायनों के संपर्क में आने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले उसके लेबल पर दिए गए निर्देशों को अच्छी तरह समझना चाहिए। छिड़काव के समय किसान दस्ताने, मास्क अथवा उपयुक्त रेस्पिरेटर, पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े और जूते जरूर पहनें, ताकि रसायन सीधे शरीर के संपर्क में न आए।
उन्होंने कहा कि कीटनाशक का छिड़काव करते समय हवा की दिशा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तेज हवा चलने पर स्प्रे करने से बचना चाहिए, क्योंकि रसायन के शरीर और चेहरे तक पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। कीटनाशकों को हाथ से सीधे छूने के बजाय उचित उपकरणों का इस्तेमाल करें और इन्हें हमेशा भोजन तथा पीने के पानी से अलग सुरक्षित स्थान पर रखें।
डॉ. खुटे ने कहा कि कीटनाशक के खाली डिब्बे या बोतल का घरेलू उपयोग कभी नहीं करना चाहिए। छिड़काव के दौरान खाना-पीना, धूम्रपान या तंबाकू-गुटखा का सेवन भी पूरी तरह से टालना चाहिए। कीटनाशक का इस्तेमाल पूरा होने के बाद हाथ-मुंह को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोने तथा पहने हुए कपड़े बदलने की सलाह भी उन्होंने दी।
उन्होंने किसानों को कीटनाशक विषाक्तता के संभावित लक्षणों के प्रति भी जागरूक रहने को कहा। चक्कर आना, उल्टी, अत्यधिक पसीना आना, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की जरूरत है।
डॉ. खुटे ने कहा कि कीटनाशकों का सुरक्षित इस्तेमाल केवल फसल की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसान और उसके परिवार के स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। फसल को बचाना जरूरी है, लेकिन खेती करने वाले किसान की सेहत की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर कीटनाशकों से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है।