अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत शिवपुर स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में अव्यवस्थाओं को लेकर छात्राओं का आक्रोश सोमवार को सड़क पर दिखाई दिया। स्कूल और हॉस्टल की कथित बदहाली से नाराज 30 से अधिक छात्राएं सुबह करीब 8 बजे पैदल ही जिला मुख्यालय अंबिकापुर में कलेक्टर से मिलने के लिए निकल पड़ीं।
छात्राओं का कहना है कि स्कूल और हॉस्टल में लंबे समय से कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर उन्होंने खुद प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला लिया।
एक महीने से बिजली की समस्या, पढ़ाई प्रभावित
छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायत स्कूल और हॉस्टल में बिजली व्यवस्था को लेकर है। उनका आरोप है कि करीब एक महीने से बिजली की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मेस के खाने और सफाई व्यवस्था पर भी सवाल
छात्राओं ने हॉस्टल के मेस में गंदगी और खराब भोजन पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिल रहा है और मेस की साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
इसके अलावा छात्राओं ने फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों की कमी की शिकायत की है। उनका कहना है कि शिक्षकों की कमी के चलते उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी शिकायत
छात्राओं ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ प्राचार्य के व्यवहार और कथित मनमानी को लेकर भी गंभीर शिकायतें प्रशासन के सामने रखी हैं। छात्राओं का कहना है कि कई समस्याओं के बावजूद उनकी शिकायतों का उचित समाधान नहीं किया गया।
अधिकारियों ने रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्राएं रहीं अडिग
सुबह शिवपुर से अंबिकापुर के लिए निकली छात्राओं को रास्ते में प्रशासन और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों ने रोकने और समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें वापस लौटने के लिए समझाया, लेकिन छात्राएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं।
छात्राओं ने स्पष्ट कर दिया कि वे कलेक्टर से प्रत्यक्ष मुलाकात कर अपनी शिकायत रखना चाहती हैं।
बैठक छोड़कर छात्राओं से मिलने पहुंचे कलेक्टर
छात्राओं का जत्था जब लमगांव पहुंचा, तब सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत प्रशासनिक बैठक में मौजूद थे। छात्राओं की स्थिति की जानकारी मिलने पर उन्होंने बैठक बीच में रोककर स्वयं छात्राओं से मुलाकात की।
कलेक्टर ने छात्राओं से उनकी समस्याएं सुनीं और उनका शिकायती पत्र भी प्राप्त किया। उन्होंने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि हॉस्टल और स्कूल में सामने आई शिकायतों की जांच कराई जाएगी तथा यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह कि आखिर छात्राओं को सड़क पर क्यों उतरना पड़ा?
एकलव्य आवासीय विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों के रहने और पढ़ने की व्यवस्था होती है। ऐसे में बिजली, भोजन, स्वच्छता और शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर छात्राओं का इस तरह पैदल कलेक्टर तक पहुंचना स्कूल प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अब देखने वाली बात होगी कि कलेक्टर के आश्वासन के बाद जांच में क्या सामने आता है और छात्राओं की शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है।