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गांव-वनांचल की खेल प्रतिभाओं को मिलेगी नई उड़ान, छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहा खेलों का आधारभूत ढांचा

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रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में 20–25 करोड़ से बनेगी तीरंदाजी अकादमी; 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी के लिए प्रयास करेगा छत्तीसगढ़

रायपुर । छत्तीसगढ़ के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ अंचलों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अब बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए संसाधनों और अवसरों की कमी नहीं होने दी जाएगी। सरकार खेल अधोसंरचना के विस्तार के साथ प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर विशेष फोकस कर रही है।

रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी एवं जनरल काउंसिल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में खेलों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का सशक्त साधन भी हैं।

रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी, पंडरापाठ में भी बनेगा बड़ा केंद्र

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी का निर्माण किया जा रहा है।

वहीं जशपुर के पंडरापाठ में 20 से 25 करोड़ रुपये की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है। इससे जशपुर सहित आसपास के वनांचल के खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर में तीरंदाजी की समृद्ध परंपरा है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में यह खेल जीवन और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसी प्राकृतिक प्रतिभाओं को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

बस्तर-सरगुजा ओलंपिक से मिल रहा दूरस्थ प्रतिभाओं को मंच

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं। बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है और राज्य सरकार इसका आयोजन हर वर्ष करेगी। सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय खिलाड़ियों को आगे आने का मंच मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेशभर में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। लक्ष्य स्पष्ट है कि खिलाड़ी चाहे बड़े शहर से हो या किसी दूरस्थ गांव और वनांचल से, उसे आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

उद्योगों को खेल संघों से जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कार्यरत बड़े उद्योग समूह यदि अलग-अलग खेलों और खेल संघों के साथ जुड़कर सहयोग करें तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

ओलंपिक संघ के साथ समन्वय के लिए वरिष्ठ अधिकारी को जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री साय ने शासन और छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के बीच बेहतर तालमेल के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी देने की बात कही। इससे खेल संघों की आवश्यकताओं, प्रस्तावों और शासन स्तर की प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान और खिलाड़ियों तक योजनाओं का पूरा लाभ पहुंचाने के लिए शासन एवं खेल संगठनों के बीच निरंतर संवाद जरूरी है।

40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी पर छत्तीसगढ़ की नजर

बैठक में 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विस्तार के बाद अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी के लिए गंभीरता से प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है तो प्रतियोगिताओं को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे बस्तर में बन रहे शांति, विकास और विश्वास के नए वातावरण को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की बड़ी संभावनाएं

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का हिस्सा है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने बताया कि बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है।

खेल अलंकरण की वापसी से बढ़ा खिलाड़ियों का मनोबल

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक सहायता देने के साथ उन्हें शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे खिलाड़ियों का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है।

अन्य जिलों में भी बनेंगे जिला ओलंपिक संघ

छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने संघ की पिछली बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए प्रदेश में खेल गतिविधियों और आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। बैठक में ओलंपिक दिवस, नेशनल गेम्स, विभिन्न खेल संघों की आवश्यकताओं और बजटीय प्रावधानों पर चर्चा हुई।

प्रदेश के वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अलावा अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाने पर सहमति बनी। विभिन्न खेल संघों की गतिविधियों और प्रदेश में खेलों के विस्तार से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में सांसद विजय बघेल, वन मंत्री केदार कश्यप, ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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