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मछलीपालन के कारोबार ने इमरान को पहुंचाया कामयाबी के शिखर तक सिहावा के उत्कृष्ट मत्स्यपालक राष्ट्रीय स्तर के एक और सम्मान से हुए सम्मानित

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धमतरी / शौर्यपथ / आदिवासी बाहुल्य नगरी विकासखण्ड के सिहावा क्षेत्र के ग्राम सोनामगर निवासी इमरान खान ने आधुनिक तकनीकी से मछली उत्पादन के जरिए ऊंचा मुकाम हासिल किया है। मछलीपालन के कारोबार ने उनके जीवन स्तर को फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया है। उनके उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट मत्स्योत्पादन को देखते हुए विश्व मास्यिकी दिवस के अवसर पर केन्द्रीय मछलीपालन एवं पशुपालन राज्य मंत्री प्रतापचंद्र सारंगी ने पूसा कैम्पस नई दिल्ली में 21 नवम्बर को आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें एक लाख रूपए का नकद पुरस्कार, प्रशस्ति-पत्र तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
इमरान ने बताया कि मछलीपालन की शुरूआत उनके पिता अब्दुल जब्बार खान ने लगभग 30 साल पहले बहुत ही छोटे स्तर पर की थी। अपनी मेहनत और विभाग के सतत् मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीकी ज्ञान और उत्पादन के वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से कारोबार में लगातार इजाफा हुआ। उन्होंने बताया कि कारोबार में जैसे-जैसे मुनाफा होता गया, वैसे-वैसे साल-दर-साल मछलीपालन का रकबा भी बढ़ता गया। एक समय ऐसा आया कि यहां की मछलियों की मांग उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे सीमावर्ती प्रदेशों से आने लगी। उन्होंने बताया कि उनके जलाशयों में प्रतिवर्ष 10 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। आज कम्पनी के पास खुद के संसाधन उपलब्ध हैं जिनमें आइसकेन प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, आइस फिशिंग प्लांट, ट्रांसपोर्टिंग व्हीकल्स, इंसोलेटेड एफआरसी, बोट मैनुफैक्चरिंग आदि शामिल हैं। पहले किराए पर वाहन लेकर मछलियों की ट्रांसपोर्टिंग करते थे, अब खुद की मालवाहक गाड़ियों से जरिए मछलियों का निर्यात किया जाने लगा। श्री इमरान खान ने यह भी बताया कि उनकी फिश कम्पनी ने आधुनिक तकनीकी से मछलीपालन तथा जलाशय प्रबंधन के क्षेत्र में पूरे देश में उत्कृष्ट मुकाम हासिल किया है।
उल्लेखनीय है कि उन्हें पूर्व में भी अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के सम्मान से नवाजा जा चुका है, जिसमें वर्ष 2012 में राष्ट्रपति के हाथों, 2013 में गुजरात मुख्यमंत्री, 2014 में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल तथा वर्ष 2015 में राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा प्रदेश सरकार के द्वारा अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। श्री खान ने बताया कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों के सतत् मार्गदर्शन और मातहत कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और लगन के बूते यह मुकाम हासिल किया है। मछलीपालन को स्वावलम्बी और आर्थिक सुदृढ़ीकरण का बेहतर जरिया बताते हुए इमरान खान ने युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आने का आव्हान किया है।

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शौर्यपथ

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