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ग्रामीणों की है मांग हमे नारायणपुर जिले में किया जाए शामिल* राज्यपाल से उन्हें है आस, मिलने निकले हजारों की संख्या में पैदल मार्च

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कांकेर / शौर्यपथ / कांकेर जिले के 58 गॉव जो कि नारायणपुर जिले  के समीप स्थित है के लगभग तीन हजार लोगो का काफिला पैदल मार्च करते राजभवन के लिए निकले है। ग्रामीण हाथों में तिरंगा लेकर निकले 58 गांवों के लोग; नारायणपुर  जिले में शामिल करने की मांग को लेकर राज्यपाल से मिलेंगे ।
ग्रामीणों को समझाइश देने के लिए कांकेर के कलेक्टर चंदन कुमार व पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा  भी पहुंचे।
   ग्रामीणों की मांग है कि, कोलर इलाके के 58 गांवों को पड़ोसी नारायणपुर जिले में शामिल किया जाए। इससे पहले ग्रामीण 45 दिनों तक रावघाट मंदिर के पास धरने पर भी बैठे थे। लेकिन इनकी समस्याएं जानने के लिए कोई भी जिम्मेदार इन तक नहीं पहुंचा। अब ग्रामीण खुद अपनी मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात करने के लिए पैदल निकल गए हैं।
बताया जा रहा है कि, बुधवार की देर रात पैदल निकले ग्रामीणों को रोकने व रायपुर न जाने की समझाइश देने के लिए कांकेर के कलेक्टर चंदन कुमार व पुलिस अधीक्षक  शलभ सिन्हा भी पहुंचे थे। लेकिन, ग्रामीणों ने इनकी एक न सुनी और भारत माता की जयकार के नारे लगाते आगे बढ़ते गए। पैदल रायपुर के लिए निकले काफिले में भैसगांव, कोलर, तालाबेड़ा, बैंहासालेभाट, फूलपाड़ एंव बंडापाल क्षेत्र  कोसरोंडा, देवगांव, गवाडी, मातला- ब, अर्रा, मुल्ले व करमरी पंचायत के ग्रामीण इसमें शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि, अब राज्यपाल ही हमारी मांगे पूरी करेंगी। फिलहाल खबर लिखे जाने देर शाम तक ग्रामीण अंतागढ़ से रायपुर  के लिए निकल गए है।
150 किमी का करना पड़ता है सफर तय
  58 गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि, हमें शासकीय कामों के लिए 150 किलोमीटर का सफर तय कर कांकेर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। आने-जाने में 1 से 2 दिन का समय लगता है। इस इलाके में पक्की सड़कें भी नहीं हैं। ऐसे में कई किलोमीटर पैदल सफर तय करते हैं। जबकि नारायणपुर जिला मुख्यालय की दूरी महज 20 किलोमीटर ही है। स्वास्थ्य सुविधाएं हो या फिर शिक्षा नारायणपुर जिले से ही लेते हैं। लेकिन शासकीय कार्यों के लिए मजबूरन कांकेर जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। यही वजह है कि 58 गांवों को नारायणपुर में शामिल करने की मांग की जा रही है।
2007 से कर रहे थे मांग
   ग्रामीणों ने बताया कि, कोलर इलाके को नारायणपुर जिले में शामिल करने की यह मांग सालों पुरानी है साल 2007 से हम आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन करते लगभग 13 से 14 साल हो गए हैं। लेकिन जिम्मेदारों की आंख नहीं खुली है। छत्तीसगढ़ में अब सरकार भी बदल गई है। लेकिन हमारी मांगे पूरी नहीं हुई। यदि अब भी हमारी मांग पूरी नहीं की जाती है तो आंदोलन चलता रहेगा।

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