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बारिश में भवन से टपक रहा पानी, जीवनरक्षक दवाओं की सुरक्षा पर सवाल; DMF और CSR फंड के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान
रिपोर्टर: कृष्णा मंडल
लोकेशन: दंतेवाड़ा
दंतेवाड़ा। प्रदेश के सबसे अधिक डीएमएफ (DMF) और सीएसआर (CSR) फंड प्राप्त करने वाले जिलों में शामिल दंतेवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के एकमात्र जिला अस्पताल में करोड़ों रुपये मूल्य की जीवनरक्षक दवाओं का स्टोर रूम जर्जर हालत में पहुंच चुका है। बारिश के दौरान भवन से पानी रिसने के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा बना हुआ है।
स्थिति यह है कि अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारी स्टोर रूम में रखी दवाओं को बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लेने को मजबूर हैं। जिस भवन की मरम्मत या नए निर्माण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है, वहां फिलहाल अस्थायी इंतजामों के भरोसे दवाओं को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में हर वर्ष भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन अस्पताल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक मेडिसिन स्टोर की हालत बेहद खराब बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब दंतेवाड़ा को DMF और CSR के माध्यम से पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, तब भी इस भवन के सुधार को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।
बारिश के मौसम में भवन के भीतर पानी रिसने से जीवनरक्षक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कई दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए नियंत्रित वातावरण आवश्यक होता है, ऐसे में नमी और रिसाव उनकी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
अब सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये की दवाओं की सुरक्षा केवल तिरपाल के भरोसे की जा सकती है? इस मामले में स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान शीघ्र किया जाना चाहिए, ताकि मरीजों के उपचार के लिए रखी गई दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई रफ्तार; 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' योजनाओं पर दिया जोर
रायपुर / शौर्यपथ / कोण्डागांव जिले के मर्दापाल में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने शनिवार को नवनिर्मित ग्राम पंचायत भवन एवं महतारी सदन का लोकार्पण किया। लगभग 12 लाख रुपये की लागत से बने पंचायत भवन तथा 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित महतारी सदन को उन्होंने ग्रामीणों को समर्पित करते हुए इसे गांव के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
महतारी सदन बनेगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र
लोकार्पण के बाद मंत्री श्री कश्यप ने बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं से संवाद कर उनकी आजीविका गतिविधियों और आय में आए बदलाव की जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने लगे हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
इस अवसर पर श्री कश्यप ने कहा कि महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। राज्य सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। 'लखपति दीदी' और 'ड्रोन दीदी' जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और आय बढ़ाने के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
फलदार पौधों और पशुपालन को अपनाने की अपील
वन मंत्री ने महिलाओं से फलदार पौधों का रोपण, पशुपालन और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और मेहनत के साथ इन गतिविधियों को अपनाकर ग्रामीण परिवार अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महतारी सदन महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता शोरी, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, जनपद सदस्य श्रीमती कौशल्या कोर्राम, श्रीमती जयमती कश्यप, श्री रामूराम कोर्राम, श्री रामचन्द्र कश्यप, श्री रामकुमार कोर्राम, श्री रमेश सेठिया, श्री आसमन कोर्राम, श्री लक्ष्मीकांत बेलसरिया, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री विनय सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
शौर्यपथ की नजर
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन और महतारी सदन जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल भवन नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन को मजबूत करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम हैं। यदि इन केंद्रों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए तो स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ महिलाओं की भागीदारी और आत्मनिर्भरता भी सशक्त होगी।
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के शाला त्यागी और अप्रवेशी बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील नेतृत्व एवं वन एवं प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस अभियान के तहत करीब 1,200 बच्चों को पुनः विद्यालयी शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
कलेक्टर श्री विश्वदीप एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग के शाला त्यागी एवं अप्रवेशी बच्चों की घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से पहचान की गई। इसके बाद उन्हें आवासीय पोर्टा केबिन विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की नई शुरुआत कराई गई है।
खेल-खेल में लौट रहा स्कूल का भरोसा
वर्षों से स्कूल से दूर रहे बच्चों को सीधे पढ़ाई में शामिल करने के बजाय पहले उन्हें विद्यालय के माहौल से जोड़ने का प्रयास किया गया। इसके लिए खेलकूद, चित्रकला, नृत्य, टेलीविजन आधारित गतिविधियां और शैक्षणिक भ्रमण जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, ताकि बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनापन और रुचि विकसित हो सके।
90 दिन का विशेष ब्रिज कोर्स
बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को मजबूत करने के लिए 90 दिवसीय विशेष ब्रिज कोर्स संचालित किया जा रहा है। इस दौरान भाषा, लेखन, पठन और गणित की बुनियादी समझ विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बच्चे नियमित पढ़ाई के लिए तैयार हो सकें।
मूल्यांकन के बाद तय होगी कक्षा
ब्रिज कोर्स पूर्ण होने के बाद बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के परिणाम के आधार पर उनकी सीखने की क्षमता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त कक्षा में नियमित प्रवेश दिया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि वर्षों बाद इतनी बड़ी संख्या में बच्चे दोबारा विद्यालय लौट रहे हैं। ऐसे में उनकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित देखभाल और बेहतर सीखने का वातावरण उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों—डीईओ, डीएमसी, बीईओ, बीआरसी एवं संकुल समन्वयकों—की बैठक लेकर निर्देश दिए हैं कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और भोजन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि वे सहजता से विद्यालयी वातावरण में ढल सकें।
शौर्यपथ की नजर
बीजापुर जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 1200 बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा देने का प्रयास है। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी शाला त्यागी बच्चों को वापस विद्यालय तक लाने के लिए यह एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।
50 नक्सल मुक्त गांवों को मिलेंगे 1-1 करोड़ रुपये, गैर-जनहानि मामलों की होगी साप्ताहिक समीक्षा, 15 अगस्त को हर नक्सल मुक्त गांव में फहराया जाएगा तिरंगा
रायपुर । छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित जिलों में विकास, पुनर्वास और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन नक्सल आरोपियों के विरुद्ध जनहानि जैसे गंभीर अपराध दर्ज नहीं हैं, उनके मामलों की विधिसम्मत समीक्षा कर रिहाई की प्रक्रिया तेज की जाए।
इसके लिए विधि विभाग के सहयोग से अभियोजन अधिकारियों और शासकीय वकीलों की विशेष टीम गठित की जाएगी। साथ ही प्रत्येक सप्ताह संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ऐसे प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित कर प्रगति की निगरानी की जाएगी।
नक्सल मुक्त गांवों को मिलेगा विकास का तोहफा
उप मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पूर्व में अति नक्सल प्रभावित रहे और अब नक्सल मुक्त घोषित ग्रामों में तीव्र विकास के लिए प्रत्येक गांव को 1 करोड़ रुपये तक के विकास कार्य स्वीकृत किए जाएंगे। प्रथम चरण में 50 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें सुकमा के 20, बीजापुर के 20 और नारायणपुर के 10 गांव शामिल हैं। इन कार्यों से ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ आधारभूत सुविधाओं का भी विस्तार होगा।
15 अगस्त को हर नक्सल मुक्त गांव में तिरंगा यात्रा
श्री शर्मा ने निर्देश दिए कि आगामी 15 अगस्त 2026 को सभी नक्सल मुक्त गांवों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी, जिससे राष्ट्रीय एकता, विश्वास और जनभागीदारी का संदेश गांव-गांव तक पहुंचे।
पीड़ित और पुनर्वासित परिवारों को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी नक्सल पीड़ित एवं पुनर्वासित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के विशेष प्रावधानों के तहत आवास उपलब्ध कराया जाए। जिन क्षेत्रों में बड़ी नक्सली घटनाएं हुई हैं, वहां शहीद जवानों और पीड़ित नागरिकों की स्मृति में सामुदायिक स्मारकों का निर्माण भी कराया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने जिलावार शहीद जवानों, मृत नागरिकों तथा उनके परिजनों को दी गई सहायता की समीक्षा करते हुए कहा कि शासन की सभी निर्धारित सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
एक माह में मिलेगा प्रोत्साहन राशि का भुगतान
पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण कर पुनर्वासित युवाओं को घोषित प्रोत्साहन राशि का भुगतान एक माह के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पुनर्वास एवं पीड़ित परिवारों से संबंधित सभी जानकारियों को डिजिटल डैशबोर्ड पर नियमित रूप से अपडेट करने को कहा गया।
इसके अलावा माओवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों की बरामदगी के लिए अंतर्राज्यीय समन्वय समिति गठित करने तथा जंगलों में कोई हथियार न छूटे, यह सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रमुख सचिव सुश्री निहारिका सिंह बारिक, सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, एडीजी श्री विवेकानंद सिन्हा सहित गृह विभाग, पुलिस विभाग एवं संबंधित जिलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जगदलपुर, । बस्तर रेंज में पुलिस नेतृत्व का महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बद्रीनारायण मीणा ने मंगलवार को बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) का विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने सुन्दरराज पट्टलिंगम का स्थान लिया है, जिन्हें भारत सरकार ने प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) के पद पर नई जिम्मेदारी सौंपी है।
पदभार ग्रहण समारोह बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित रेंज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सुन्दरराज पट्टलिंगम ने बद्रीनारायण मीणा का स्वागत करते हुए उन्हें सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं और विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर पुलिस का पूरा अमला नए नेतृत्व को भी उसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ सहयोग देगा।
निवर्तमान आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने अपने संबोधन में 'मिशन 2026' के सफल क्रियान्वयन में मिले सहयोग के लिए शासन, पुलिस मुख्यालय, सुरक्षा बलों, नागरिक प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मीडिया तथा बस्तर की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन की साझा परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य बस्तर में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि बद्रीनारायण मीणा के नेतृत्व में यह अभियान और अधिक प्रभावी गति प्राप्त करेगा।
पट्टलिंगम ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए सुरक्षा बलों के जवानों और स्थानीय नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।
वहीं, नवनियुक्त आईजी बद्रीनारायण मीणा ने कहा कि वे पिछले वर्षों में हुए उल्लेखनीय कार्यों को आगे बढ़ाते हुए सभी हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करेंगे। उन्होंने बस्तर में स्थायी शांति, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, तेज विकास और आम जनता के विश्वास को और सुदृढ़ करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
नए नेतृत्व के साथ अब बस्तर में सुरक्षा, विकास और जनसहभागिता को लेकर चल रहे अभियानों को नई दिशा और गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रायपुर/बस्तर ।
बस्तर जिले के भानपुरी में शाला प्रवेश उत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर, माला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को स्कूल बैग एवं शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की गई।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विकसित समाज की आधारशिला है और राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शिक्षा एवं सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं सांसद महेश कश्यप ने विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और तकनीक का लाभ उठाकर अपने भविष्य को संवारने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्राम बनियागांव में ₹1 करोड़ 12 लाख 80 हजार की लागत से निर्मित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नए भवन का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही विद्यालयों को डिजिटल शिक्षा के लिए स्मार्ट टीवी प्रदान किए गए तथा मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में दोनों जनप्रतिनिधियों ने बच्चों के साथ सहभोज कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कोंडागांव। जिला मुख्यालय स्थित डाकघर में पदस्थ कर्मचारी शेख रूहुल ताज पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक विभागीय कार्रवाई न होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और व्यापारियों में इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार शेख रूहुल ताज के खिलाफ अब तक तीन अलग-अलग शिकायतें सामने आ चुकी हैं। पहला मामला एक डॉक्टर से दुर्व्यवहार का है, जिसमें डॉक्टर ने संभागीय अधीक्षक को लिखित शिकायत दी थी। हालांकि, आरोप है कि इस मामले को झूठी रिपोर्ट बनाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
दूसरा मामला कोपाबेड़ा निवासी सुमित्रा नेताम से जुड़ा है। आरोप है कि उनसे खाते में जमा करने के नाम पर 20 हजार रुपये लिए गए, लेकिन एक साल तक राशि खाते में जमा नहीं की गई। बाद में रकम लौटा दी गई, पर खाते में जमा नहीं की गई, जिसे ठगी की श्रेणी में माना जा रहा है।
तीसरा मामला कोंडागांव के 20 से अधिक व्यापारियों से जुड़ा है। व्यापारियों को पोस्टर लगाने के नाम पर 6 महीने से 1 साल तक विज्ञापन का आश्वासन दिया गया, लेकिन पोस्टर एक महीने के भीतर ही हटा दिए गए। जब इस संबंध में डाकघर में जानकारी ली गई, तो पता चला कि ऐसी कोई योजना विभाग में थी ही नहीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि व्यापारियों को गुमराह कर ठगी की गई।
इन तीनों मामलों की जांच के बाद यह बात सामने आ रही है कि संबंधित कर्मचारी पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं। मामले को लेकर जब जगदलपुर के संभागीय अधीक्षक से चर्चा की गई, तो उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस देरी से लोगों में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी गहराने लगी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि डाकघर जैसे भरोसेमंद संस्थान में इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, तो आम जनता का विश्वास कमजोर होना स्वाभाविक है।
वहीं, कोंडागांव डाकघर के मुख्य अधिकारी श्री मिश्रा ने इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार करते हुए बताया कि उनका स्थानांतरण हो चुका है और इस विषय में उनके वरिष्ठ अधिकारी ही जवाब देंगे।
रायपुर स्थित उच्च अधिकारी अजय सिंह चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया।
अब सवाल यह उठता है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण इस मामले में शामिल है, या फिर इसे जानबूझकर दबाया जा रहा है? आम जनता अब इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
उप मुख्यमंत्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं
आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो - उप मुख्यमंत्री शर्मा
रायपुर / कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है।
गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।
उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।
जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, एडीएम एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ। बोधघाट थाना क्षेत्र से हाटकचोरा एवं करकापाल जाने वाले मार्ग के दोनों ओर संबंधित विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर "कचरा फेंकना मना है" संबंधी सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की प्रवृत्ति को रोकना और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जाता है।
हालांकि, मार्ग से गुजरने वाले कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं, उनमें से कई स्थानों के आसपास कचरा दिखाई देता है। इससे यह प्रश्न उठ रहा है कि केवल सूचना बोर्ड लगाने से अपेक्षित परिणाम प्राप्त हो रहे हैं या नहीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निगरानी, कचरा संग्रहण की पर्याप्त व्यवस्था तथा नियमों के प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। उनका मानना है कि यदि प्रतिबंध संबंधी सूचनाओं के साथ व्यवहारिक प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत हो, तो सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की समस्या में कमी लाई जा सकती है।
क्षेत्र के कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सूचना बोर्ड लगाने पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया है, इसलिए समय-समय पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि अभियान अपने उद्देश्य की पूर्ति कर रहा है या नहीं।
स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाले जानकारों का मानना है कि किसी भी जागरूकता अभियान की सफलता केवल संदेश प्रसारित करने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से तय होती है। ऐसे में संबंधित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
