कोण्डागांव/शौर्यपथ/
जब से वनकर्मी धरने पर गए है तबसे विभाग की कार्यप्रणाली ही बदल गया है, और जिनके जिम्मे पूरा जंगल है अब उन्ही के संरक्षण में अवैध तरीके से लकड़ी डिपो तक पहुच रही है। जब वनविभाग की एक सरकारी वाहन में 73 नग साल के छोटे-बड़े गोले का ट्रांस्पोर्टिंग किया जा रहा था। जिसे वनविभाग के ही कुछ लोगों ने राम मंदिर के पास रोक रखा था। जब इसकी हकीकत सामने आई तो पता चला कि, यह वाहन सिंघनपुर से गोले लोडकर काष्ठागार भेजा गया है। लेकिन वाहन चालक आनंद वाहन क्रमांक सीजी 02- 3560 में बिना कोई वैध दस्तावेज के साल के 73 गोले काष्ठागार ले जाने की बात कह रहा था। और वही पहुचने के बाद ही अधिकारी के द्वारा चलान कापी में हस्ताक्षर व मुहर लगाने की बात भी कही। उन्होंने बताया कि, वह पिछले कुछ दिनों से ऐसे ही वाहन में गोले लोड़कर ला रहा है। जानकारी के मुताबिक यदि विभाग के लकड़ी ट्रांसपोटिंग करने के लिए बकायदा चलान/दस्तावेज बनाना होता है, जिसमें कितनी लकड़ी, किस प्रकार की कहॉ से कहॉ ले जाया जा रहा है। सहित अन्य जानकारी का उल्लेख करते हुए उसमें संबंधित अधिकारी के पदमुद्रा वाली सील के साथ हस्ताक्षर होना चाहिए। वनकमर्चारियों के धरने में जाने से इसका असर दिखाई देने लगा है।
वसर्न-
0- बिना नंबर लगे लकड़ी वाहन में भरी ही नही जाती है, इसके लिए चलान भी बनाया जाता है।
(उत्तम गुप्ता, डीएफओ)