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दंतेवाड़ा के स्वास्थ्य विभाग में विघुत विभाग का चल रह खतरनाक खेल

  • doing of business

 दंतेवाड़ा /शौर्यपथ /

का स्वास्थ्य विभाग एक पहेली बनकर रहा गया है जिसकी पहेली कभी नहीं सुलझ सकती,इस विभाग को यहां के अधिकारियों ने व्यापार एवम घोटाला का स्थान बना रखा है। यहां सालो तक कभी सिविल तो कभी इलेक्ट्रिकल तो कभी भर्तियों को लेकर यहां के कार्य हमेशा सुर्खियों में रहते है।

आपको बता दे हाल ही में छत्तीसगढ़ के स्वस्थ्य मंत्री टी. एस. बाबा का दौरा रहा और अधिकारी इस दौरे में नदारद रहे।

इस अस्पताल मे हो रहे इलेक्ट्रिकल कार्य, केवल हो रहे है परन्तु नियम और सुरक्षा गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
आपको बता दे की अस्पताल कि छतो मे हाई टेंशन सप्लाई के केवल फायार पैयपो मे नाग की तरह लिपटे हुए है जिसमे कई जगहों से केवल खुले हुए है,तो कहीं छत्तो पर जाने वाले मार्गो पर सीढिय़ों में ही सप्लाई केवल बिछे है।

ये सभी केवल कभी भी कभी या किसी भी वक्त मौत का तांडव पूरे अस्पताल को दिखा सकते है इस पर विघूत विभाग के अधिकारी केवल काम करवाकर अपने कमीशन का खेल,खेल रहे है और नियमों कि धज्जियां उड़ा रहे है ।

इस अस्पताल में नियमों की तो कोई बात ही नहीं कर सकता,क्योंकि ये खेल कमीशन का है ।

अधिकारी चुप है और लोग मौत के खेल में व्यस्त है ।यहां तक कि अस्पताल के अधिकारी और कर्मचारी भी मौन होकर सब खेल देख रहे है।
आपको बता दे यहां अस्पतालों के एडमिट बेड के उपर ही केवल अनियमित ढंग से लगे है, जहा भर्ती किए हुए पेशेंट बेड पर है और उनके बच्चे वहा खेल रहा है। इस पूरे विंग में कहीं भी इलेक्ट्रिकल समन यंत्र नहीं लगा है।

यदि यहां आकस्मित कोई घटना हो जाए तो सुरक्षा शून्य है और बेड पर लेटे हुआ व्यक्ति को बचाव असंभव है।
इससे पहले भी कई बार, इस तरह के घटिया कार्यों के कारण सरकारी भवनों में आगजनी हो चुकी है।
फिर भी अधिकारी चुप है, अब शायद ये इलेक्ट्रिकल विभाग के अधिकारी हजारों कि जिंदगियों के जान का खेल देखने के लिए बैठे है जहा लोग जीवन जीने कि आश में एडमिट होते है वहीं इलेक्ट्रिकल कार्यों कि अनियमितता और नियमों एवम सुरक्षा संसाधनों कि धज्जियां उड़ाते देख जहा प्रशासन और इलेक्ट्रिकल विभाग के अधिकारी मौन धारण करके बैठे है वे शायद कोई घटना का ही इंतजार कर रहे है या फिर वे अपने कमीशन से असंतुष्ट होकर अंधे होने कि एक्टिंग कर रहे है।
इसका जवाब जानता को कौन देगा कि उनके जान का यह खेल देखकर भी अधिकारी क्यो मौन है।

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PANKAJ CHANDRAKAR

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