कांकेर /शौर्यपथ /
प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा राजनैतिक दलों, धार्मिक, सामाजिक, शासकीय व अन्य निजी संगठनों द्वारा किसी भी प्रकार के धरना, जुलुस, प्रदर्शन व अन्य किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन के लिए सरकार की सशर्त पूर्व अनुमति लिये जाने वाले काले कानून(भूपेश एक्ट) के विरोध में आज भारतीय जनता पार्टी ने पूरे प्रदेश में जेल भरों आंदोलन किया । इसी कड़ी में जिला भाजपा संगठन ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेण्डी, भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश लाटिया, लोकसभा सांसद मोहन मण्डावी की उपस्थिति में जेल भरो आंदोलन किया ।
आंदोलन के लिए भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता सुबह से ही भाजपा कार्यलय में जुटना प्रारंभ हो गये थे । सैकड़ों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने विक्रम उसेण्डी, सतीश लाटिया, मोहन मण्डावी, पूर्व विधायक देवलाल दुग्गा सुमित्रा मारकोले के नेतृत्व में भाजपा कार्यलय कमल सदन कांकेर से शहर के पुराने बस स्टेण्ड तक प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी व पैदल मार्च करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पुराने बस स्टेण्ड के पास प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यकर्ताओ को पुलिस ने रोक कर गिरफ्तार कर लिया। भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश लाटिया सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ताओ ने गिरफ्तारी का जबरदस्त विरोध करते हुए थाने के सामने ही धरने पर बैठ गये व कलेक्ट्रेट तक प्रदर्शन हेतु जाने की मांग की।
बाद में पुराने कम्यूनिटी हाल में मीडिया से बात करते हुए विक्रम उसेण्डी ने कहा कि कांग्रेस ने लगाया छत्तीसगढ़ में अघोषित आपातकाल । यह दुर्भाग्यजनक है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार अब असहमति व कांग्रेसी सत्ता के खिलाफ उठने वाले हर आवाज का दमन करना चाहती है । उसने एक काला आदेश निकाल कर रैलियों और प्रदर्शनों पर कड़े प्रतिबंध और शर्तो को थोपने का काम किया है । प्रदेश की कांग्रेस सरकार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में इतनी भयभीत है कि अपने खिलाफ उठ रही आवाज को दबाना चाहती है ।
सरकार के खिलाफ उठ रहे जन आक्रोश को कुचलना चाहती है । छत्तीसगढ़ वासियों के अभिव्यक्ति की आजादी को छीनना चाहती है । ऐसे समय में जब प्रदेश भर में किसान, युवा, महिलाये, शिक्षक अभ्यर्थी, विद्या मितान, पुलिस अभ्यर्थी, बिजली कर्मचारी, वन कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, रसोईया संघ, कोरोना वारियर्स, आदिवासी , पिछड़ा वर्ग सभी अपनी मांगों को लेकर भूपेश सरकार के खिलाफ आंदोलित है तब इन आक्रोशों को खत्म कर उन्हें न्याय देने के बजाय सरकार उनकी आवाज कुचलने पर आमादा है।
लोकसभा सांसद मण्डावी ने कहा कि कांग्रेस ने छ.ग. की भोली-भाली जनता को सैकड़ो लुभावने वादे कर सत्ता तो हड़प परंतु अब उन वादों को पूरा करने की मांग करने वाली जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को नृशंस हत्या करते हुए सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को रोकने के लिए काला कानून लेकर आई है । छत्तीसगढ़ की डरी हुई कांग्रेस सरकार द्वारा काला कानूने लागू कर छत्तीसगढ़ में आपातकाल की यादों को ताजा करने का कृत्य किया जा रहा है ।
भाजपा जिलाध्यक्ष सतीश लाटिया ने कहा कि सरकार के खिलाफ होने वाले रैली/धरना/प्रदर्शन/भूख हड़ताल की शर्तो के साथ पूर्व अनुमति की बाध्यता कांग्रेस की आपातकाल की मानसिकता को दर्शाता है । जिस प्रकार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने विपक्ष के लोकतांत्रिक अधिकार का दमन करने मीशा कानून के तहत विपक्षी नेताओं को वर्षो जेल में बंद की थी वैसे ही मानसिकता से ग्रसित मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शन की अनुमति की बाध्यता वाला आदेश जारी कर विपक्ष व जनता की आवाज को कुचलने का कुचक्र रचा है । भूपेश सरकार ने एक तुगलकी व मनमाना आदेश जारी कर प्रदेश भर के सभी निजी, सार्वजनिक, धार्मिक, राजनैतिक, अन्य संगठनों द्वारा प्रस्तावित आयोजनो पर जिसमें भीड़ आती हो उसे रोकने के लिए 19 बिंदुओं की शर्त लगाई गई है और उसका कठोरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा है । इन शर्तो का पूरी तरह पालन कर कोई भी बड़ा राजनैतिक/धार्मिक/सामाजिक आयोजन संभव ही नही है । सरकार द्वारा जारी तुगलकी आदेश द्वारा सरकार सीधे तौर पर यह चाहती है कि जन संगठनों के विरोध प्रदर्शनों को, असहमति की आवाज को, धार्मिक भावनाओ को, विपक्ष के आंदोलनों को, अभिव्यक्ति की आजादी को कुचल दिया जाये। आपातकाल लगा कर जनता को जीने के अधिकार से भी वंचित करने का कांग्रेस का इतिहास रहा है ।
इस विरोध प्रदर्शन में प्रमुंख रूप से जिला महामंत्री बृजेश चौहान, दिलीप जायसवाल, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष शालिनी राजपूत, पूर्व जिलाध्यक्ष हलधर साहू, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष आलोक ठाकुर, राजीव लोचन सिंह, असीम राय, निर्मला नेताम, तारा ठाकुर, गौतम उइके, देवेन्द्र भाउ, हीरा मरकाम, सुषमा गंजीर, राजा देवनानी, निपेन्द्र पटेल, डॉ देवेन्द्र साहू, विरेन्द्र श्रीवास्तव, टेकेश्वर जैन, छत्रप्रताप दुग्गा, संजय खटवानी, प्रीतपाल सिंह, टीकम टांडिया, दीपक खटवानी, नारायण पोटाई, यशवंत सुरोजिया, दिनेश नागदौने, पंचू राम नायक, गजेन्द्र परिहार, पीलम नरेटी, जितेन्द्र मरकाम, रामेश्वर मण्डावी, राजा पाण्डेय, उमा शर्मा, संजय सिन्हा, आशाराम नेताम, मोती नाग, विजय मण्डावी, राधे लाल नाग, बृजमोहन तिवारी, गिरधर यादव, अरूण कौशिक, चन्द्रप्रकाश ठाकुर, रूखमणी ठाकुर, मीरा सलाम, राजेन्द्र गौर, विजय साहू, मुकेश संचेती, टाकेश साहू, अंशु शुक्ला, संजू गोपाल साहू, रोशन मिश्रा, विजय लक्ष्मी कौशिक, रजिंदर रंधावा, शकुन्तला नरेटी, रामबाई गोटा, मीना साहू, उषा ठाकुर, सरिता जोशी, धर्मेन्द्र ठाकुर, राजीव श्रीवास, श्रद्धेश चौहान, कुशल नेताम, भागवत नेताम, दशरथ साहू, पीयुष वलेचा, परमानंत तेता, संकेत नशीने, गोलु तिवारी, अंकित जैन, सितंबर कावड़े, संतोष बाजपेई, भानु नेताम, देवेन्द्र पटेल, रवि सिन्हा, नरोत्तम चौहान सहित सैकड़ों की संख्या में भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे ।