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जर्जर झोपड़ी में कच्ची लकड़ियों के सहारे खाना बनाने की मजबूरी,रौशनी के नाम पर टिमटिमाते दिए का सहारा Featured

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इस मकान तक पहुंच हर शासकिय योजनाएं हो रही है सिफर

     कोण्डागाँव /शौर्यपथ / तेज बारिश के बीच टिमटिमाते दीए की रोशनी में कच्ची लकड़ियों से खाना बनाने की मजबूरी यह किसी का शौक नही बल्कि सुरेश विश्वकर्मा के परिवार की मजबूरी है। जिसके परिवार तक पहुंच शायद  उज्जवला गैस बिजली की योजनाएं और पीएम आवास जैसी योजनाएं दम तोड़ देती है,जिले के अधिकारीयों की उदासीनता के चलते,अनेक परिवार
आज भी जर्जर कच्चे मकान में निवास करने को मजबूर हैं।
    जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का सपना भारत को 2025 तक डिजिटल बनाना, सभी को पक्के घर देना लकड़ी के धुएं से मुक्ति की सोच हर  सपना कोण्डागाँव  के नहर पारा में निवासरत सुरेश विश्वकर्मा के परिवार को देखकर विफल नजर आता है। चूल्हे में खाना बनाती गृहणी लता विश्वकर्मा से जब शासन की योजनाओं के लाभ को लेकर पूछा गया तो उदास होते उसने कहा  कि   पीएम आवास व उज्वला कनेक्शन के  लिए उसे अपात्र बताया गया, लता ने कहा कि मेरा परिवार मजदूरी करता है जर्जर मकान में रहना मेरी मजबूरी है मैं किराए के घर पर  रहने में असमर्थ हूं।एक तरफ जहां प्रदेश सरकार बिजली बिल हाफ व हर गरीब को कनेक्शन की बात कह रही है, वहीं लकड़ी के धुंए से मुक्ति की बात करते उज्वला योजना का शंखनाद किया गया था व पक्के मकान तक हर गरीब की पहुंच होने की बात देश के प्रधानमंत्री ने कही थी लेकिन इन  योजनाओं का लाभ किन पात्र हितग्राहियों को मिल रहा है जांच का विषय है। क्या शासन प्रशासन के नुमाइंदे ऐसे जर्जर मकान में रह रहे परिवार के साथ गंभीर हादसा होने का इंतजार कर रहे हैं।

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शौर्यपथ

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