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शासन -प्रशासन के बीच चल रहा संघर्श, दो पाटों के बीच पिसा रहे आमजन

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समाधान नहीं कर पा रहे मुख्य मंत्री भुपेष बघेल को दे देना चाहिए इस्तीफा-सीपीआई  

    कोण्डागांव / शौर्यपथ / शासन -प्रशासन  के बीच कर्मचारी-अधिकारियों के द्वारा दो मुख्य मांगों केंद्र के समान महंगाई भत्ता और सातवें वेतनमान के आधार पर गृहभाड़ा भत्ता दिए जाने को लेकर अनिष्चितकालीन आंदोलन के आयोजन से चल रहे संघर्श के कारण दो पाटों के बीच आमजनों के पिसा रहे होने का आरोप लगाते हुए मामले का एक समय सीमा में समाधान नहीं कर पा रहे मुख्य मंत्री भुपेष बघेल से इस्तीफा दे देने की मांग सीपीआई कोण्डागांव द्वारा की गई है। उक्त सम्बन्ध में सीपीआई जिला परिशद् के जिला सचिव तिलक पाण्ड़े ने सीपीआई की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि कर्मचारी-अधिकारीगण अपनी दो मुख्य मांगों केंद्र के समान महंगाई भत्ता और सातवें वेतनमान के आधार पर गृहभाड़ा भत्ता दिए जाने को लेकर 22 अगस्त सोमवार से अनिष्चितकालीन आंदोलन में ड़ट गए हैं और आज उनके आंदोलन को पूरा एक सप्ताह बित चुका है। इस बार किए जा रहे अनिष्चित आंदोलन की खास बात यह है कि सभी षासकीय विभागों के कर्मचारी और अधिकारी एकजुटता दिखाते हुए अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और इससे सभी षासकीय कार्यालयों में कामकाज ढप्प हो गया है। कर्मचारी-अधिकारीगणों द्वारा किए जा रहे अनिष्चितकालीन आंदोलन से षासन-प्रषासन को कोई हानि नहीं हो रही है, केवल और केवल आम लोगों को ही हानि हो रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि आम लोगों को ही कार्यालयों का चक्कर लगाते हुए काफी परेषान होना पड़ रहा है।
जिला सचिव तिलक पाण्डे ने कहा कि देष में चल रहे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत आम जनता द्वारा चुनकर सत्ता में आसीन हुए षासन का सबसे बड़ा और अहम दायित्व होता है कि वह आम जनता को बेहतर सुविधाएं दे, बेहतर प्रषासनिक व्यवस्था देना भी षासन की जिम्मेदारी है, लेकिन छ.ग.राज्य में सत्ताषीन कांग्रेस पार्टी के मुख्य मंत्री के रुप में नेतृत्वकर्ता भुपेष बघेल, उक्त दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह असमर्थ नजर आ रहे हैं।
मुख्य मंत्री भुपेष बघेल न ही आंदोलनकारी कर्मचारी-अधिकारीगणों की मांगों को ही पूरा कर पा रहे हैं और न ही विगत सप्ताह भर से अनिष्चितकालीन आंदोलन में डटे कर्मचारी, अधिकारीगणों से सार्थक चर्चाकर आंदोलन को जनहित में समाप्त करा पा रहे हैं, इसे कहते हैं सांप-छछूंदर की स्थिति होना, यानि न उगलते बन रहा, न निगलते बन रहा। यानि न मांग पूरी कर पा रहे और न ही सकारात्मक कार्यवाही कर पा रहे हैं। वहीं आम जनता को बेवजह परेषान होने का मजबूर होना पड़ रहा है। जिसके कारण ही सीपीआई कोण्डागांव को आम जनता को हो रही परेषानी के मदद्ेनजर मुख्य मंत्री भुपेष बघेल से मांग की जा रही है कि या तो वे कर्मचारी-अधिकारीगणों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करें, अथवा सकारात्मक चर्चाकर आंदोलन को खत्म करवाएं अन्यथा तत्काल इस्तीफा दे दें।

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