नरेश देवांगन (जगदलपुर ) की ख़ास रिपोर्ट
जगदलपुर / शौर्यपथ /
आबकारी विभाग का काम अवैध शराब पर रोक लगाने और कार्यवाही करने का है मगर अपनी ऊपरी कमाई के लिए विभाग ही अवैध शराब की बिक्री कराता नजर आ रहा है और कार्यवाही के नाम पर विभाग सिर्फ खाना पूर्ति करता दिख रहा है। कारवाही के नाम पर विभाग कच्ची शराब पकड़कर खुद की पीठ थपथपाता है । विभाग द्वारा संचालित सरकारी दुकानों से शराब प्रेमियों को तय मूल्य से 10 से 20 रुपए वही कोचियों को अधिक पैसा लेकर थोक के थोक में शराब बेची जा रही है। ताजा मामला जगदलपुर शहर के न्यू बस स्टैंड के विदेशी शराब दुकान का है, जहा बस्तर के शराब प्रेमियों को तय कीमत से अधिक ले कर उनको चुना लगया जा रहा है। सरकार के सख्त हिदायतों के बावजूद शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से अधिक कीमत पर शराब बेची जा रही है। अधिक कीमत पर बिकने के बावजूद आबकारी विभाग मौन है। एक तरफ छत्तीसगढ़ में 2000 करोड़ के शराब घोटाला को लेकर कांग्रेस की जब सरकार थी तब बवाल मचा था, जिसमे कई लोगो की गिरफ्तारी भी हुई है। इस मामले को लेकर इडी की कार्यवाही अब तक जरी है इतनी बड़ी कार्यवाही का खुलासा देख शराब प्रेमियों को नए सरकार पे भरोशा था की अब उनको नहीं ठगा जायेगा लेकिन यहाँ मामला उल्टा ही नजर आ रहा है सरकार बनने के माह 3 भी नहीं हुए है और उनके सात फिर से वही व्यवहार किया जा रहा है। इस मामले को लेकर जब हमने दुकान में शराब ले रहे कुछ लोगो से बात करने की कोशिस की तो उनका कहना है की सभी शराब की बोतल पे तय मूल्य से 10 से 20 रुपए अधिक लिया जा रहा है जिसका उनको बिल भी नहीं दिया जाता है। और तो और इसका विरोध करने पर दुकान के सेल्समेन के द्वारा लेना है तो लो नहीं तो निकलो कह कर उनके सात बत्मिज्जी कर उनको भगा दिया जाता है। लोहण्डीगुड़ा ब्लाक के एक शराब लेने आये कोचिया ने नाम नहीं छापने की सर्थ में बताया की उसने न्यू बस स्टैंड की अंग्रेजी शराब दुकान से शाम को सीजी नाम की 15 पउआ खरीदी जिसकी कीमत बोतल में 120 दर्ज है लेकिन दुकान संचालक ने उससे 130 रुपए लिए हर बोतल पे उससे 10 रुपए अधिक लिया गया ओर ये हर बार का है।
वही शहर के लालबाग निवासी ने बताया की उसने एसी ब्लैक की एक पुआ ली जिसकी कीमत दुकानदार ने 240 ली लेकिन बोतल में एमआरपी ही नहीं है वही एक और शराब प्रेमी ने बताया की आवर रेट का खेल दुकान में लगातार चल रहा है इसकी जानकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी को भी है इसकी शिकायत हमने कई बार की है लेकिन कर्यवाही नहीं होती मानो ऐसा लगता है की विभाग की मिली भगत से ही चल रहा है तभी तो दुकान के मेनेजर की हीमत बड़ी है, ओर तय कीमत से ज़्यदा पैसे ले रहा है । अब ऐसे में सोचने वाली बात है की छत्तीसगढ़ में 2000 करोड़ शराब घोटाला मामला को महज ही कुछ समय ह्ए है और फिर से शराब की कालाबाजारी का सिलसिला चालू हो चूका है अब देखने वाली बात यह है की इस खबर के प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार पर कार्यवाही होती है या शासन प्रशासन मूकदर्शक बना देखता रहता है ?
जब इस विषय पर हमने आबकारी अधिकारी रतन नागेश से बात करनी चाही तो उन्होंने कॉल उठाना भी जरूरी नहीं समझा।