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'बिहान' में नियमों का खुलेआम कत्ल: पलारी पंचायत के सदस्य शहरी छेत्र में फर्जी समूह, कर्मचारियों के परिजनों का कब्जा; स्थानीय महिलाओं को छोड़ बाहरी लेबर मिस्त्रियों से चल रही 'मोर सुवाद' कैंटीन

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एक ही परिवार से जुड़े सदस्यों को समूह में शामिल करने और बिना निविदा प्रक्रिया के आवंटन के आरोप, अनुमति व एनओसी को लेकर भी सवाल

कोंडागांव। जिला मुख्यालय में विहान समूह के अंतर्गत संचालित किए जा रहे ‘मोर स्वाद वीआईपी रेस्टोरेंट’ को लेकर अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि रेस्टोरेंट का संचालन जिस लक्ष्मी स्व सहायता समूह, पलारी को दिया गया है, उसमें एक ही परिवार से जुड़े कई सदस्य शामिल हैं। वहीं, समूह के पीछे प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि रेस्टोरेंट को विहान समूह के अंतर्गत लक्ष्मी स्व सहायता समूह को आवंटित किया गया है। आरोप है कि समूह में जिला पंचायत में विहान के अंतर्गत पदस्थ लेखापाल लोचन देवांगन की पत्नी, उनके बड़े भाइयों की पत्नियां तथा परिवार से जुड़े अन्य सदस्य शामिल हैं। संबंधित सदस्यों के पतियों के शासकीय संस्थानों में पदस्थ होने की बात भी सामने आ रही है।

इसी को लेकर सवाल उठ रहा है कि क्या पात्रता और पारदर्शिता के सभी मापदंडों का पालन करते हुए समूह का चयन किया गया? शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, ग्राम पंचायत के नाम समूह बनाकर सीधे शहरी छेत्र मे अलबेडा पारा वार्ड के समूह को छोड़ककर अमीर लोगो के परिवार को गरीब बता कर समूह बना कर खोला गया है, जो नियम के विरुद्ध मिलीभगत से खोला गया है।

 

शहरी क्षेत्र में संचालन, अनुमति को लेकर भी सवाल 

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू रेस्टोरेंट के स्थान और संचालन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि उक्त रेस्टोरेंट शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहा है। और खाने पीने का सामानों में अत्यधिक राशि लिया जा रहा है ऐसे में स्थानीय निकाय की अनुमति, आवश्यक एनओसी और अन्य वैधानिक औपचारिकताओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि रेस्टोरेंट शुरू करने से पहले संबंधित वार्ड पार्षद की अनुमति तथा नगरपालिका से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र लिया गया था या नहीं। इस संबंध में प्रशासन और नगरपालिका स्तर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

महिला सशक्तिकरण योजना पर भी उठ रहे सवाल

सरकार द्वारा महिला स्व सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने और उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में यदि किसी एक समूह को बिना पारदर्शी प्रक्रिया के लाभ पहुंचाया गया है, तो यह योजना के मूल उद्देश्य और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि समूह के सदस्यों के पारिवारिक संबंध, उनके पतियों की सरकारी सेवा में पदस्थापना और समूह को मिले कार्य की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि लक्ष्मी स्व सहायता समूह का चयन किन नियमों के तहत किया गया, चयन प्रक्रिया में कितने समूह शामिल हुए, क्या निविदा या अन्य निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई तथा रेस्टोरेंट संचालन के लिए नगरपालिका सहित संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति ली गई या नहीं।

इस सम्बन्ध मे संजय सोनपिपरे संपादक, उजाला टुडे के द्वारा जिला पंचायत बिहान को सुचना का अधिकार के तहत समूह के सदस्यों के नाम पति/ पिता का नाम पता और निविदा के जानकारी चाही गई थी किंतु जानकारी प्रदाय नहीं किया गया, पुनः प्रथम अपील जिला पंचायत कोंडागांव के अपिलीय अधिकारी को किया गया। जिसपर सुनवाई 20/07/2026 को किया गया अपिलीय अधिकारी अविनाश भोई केजानकारी प्रदाय नहीं किये जाने के कारण जिला मिशन मैनेजर विनय सिंह को तत्काल निर्देशित कर समूह कि सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जिमसे विनय सिंह द्वारा सूची मै स्वयं निकाल दिया था देने के लिए पर स्टॉफ क्यों नहीं दिए मै तत्काल समूह कि सूची दे रहा हु बोला गया। किंतु दो माह होने जा रहा है आज दिनांक तक समूह कि जानकारी नहीं दिया गया। जो पारदर्शिता मे एनिमयता दिखाई दे रही है जो जाँच का विषय है 

अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की जांच कर चयन प्रक्रिया, समूह की पात्रता, हितों के टकराव और आवश्यक अनुमतियों की जांच करे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए जा रहे आरोप कितने सही हैं और कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। अगर उलंघन हुआ है तो दोषियों पर करवाई कब किया जायेगा।

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