बचेली में रविवार को हुई कार्रवाई से उठे सवाल, बेदखली के बाद पुनर्वास की व्यवस्था पर भी मांगा जा रहा जवाब
नजूल जमीन पर कथित कब्जों के लिए एक समान मापदंड अपनाने की मांग; एसडीएम और नगरपालिका प्रशासन की भूमिका पर सवाल
कृष्णा मंडल /
दंतेवाड़ा। शौर्यपथ / दंतेवाड़ा जिले के बचेली नगर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और आदिवासी परिवारों के पुनर्वास को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। रविवार को 10 आदिवासी परिवारों के मकान ढहा दिए गए। कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन परिवारों के रहने के लिए वैकल्पिक जमीन या पुनर्वास की व्यवस्था की गई थी या नहीं।
स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी उठ रहा है कि गरीब परिवारों के मकानों पर सख्ती दिखाने वाला प्रशासन कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोगों, एक ठेकेदार और अन्य लोगों के अतिक्रमण के मामलों में उतना सक्रिय नजर नहीं आता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि बचेली में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई किन नियमों और मापदंडों के आधार पर की जा रही है।
गरीबों पर सख्ती, प्रभावशालियों पर कार्रवाई कब?
यदि नजूल जमीन पर अवैध कब्जा हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि कथित प्रभावशाली लोगों के कब्जों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। प्रशासन को ऐसे मामलों की स्थिति सार्वजनिक कर निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाना चाहिए।
कुछ मामलों में पहले अतिक्रमण हटाए जाने के बाद मुआवजा दिए जाने और कथित तौर पर दोबारा नजूल जमीन पर कब्जे होने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रशासन को बताना चाहिए कि मुआवजा किन नियमों के तहत और किन लोगों को दिया गया तथा दोबारा कब्जे की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई।
10 परिवार बेघर, पुनर्वास की जिम्मेदारी किसकी?
मकान तोड़ने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के सामने रहने की समस्या खड़ी होने की बात कही जा रही है। यदि अतिक्रमण हटाना जरूरी था, तो क्या कार्रवाई से पहले पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया गया? क्या प्रभावित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई गई? प्रशासन को इन सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
यह मामला केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के भविष्य और बुनियादी जरूरतों से भी जुड़ा है। कार्रवाई की वैधानिकता के साथ-साथ यह जानना भी जरूरी है कि बेदखल परिवारों के लिए आगे क्या व्यवस्था की गई है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल
नगरपालिका क्षेत्र के नागरिक अपने जनप्रतिनिधियों से उम्मीद करते हैं कि वे जरूरतमंद परिवारों की समस्याओं को प्रशासन के सामने उठाएं। ऐसे में सवाल है कि प्रभावित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और राहत के लिए अध्यक्ष, पार्षदों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों ने क्या पहल की है।
प्रशासन स्पष्ट करे अपनी स्थिति
बचेली में हुई कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन, एसडीएम और नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अतिक्रमण हटाने का आधार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था और अन्य कथित कब्जों पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
बड़ा सवाल यही है कि क्या अतिक्रमण के खिलाफ कानून समान रूप से लागू हो रहा है? यदि कब्जा अवैध है, तो कार्रवाई सभी मामलों में निष्पक्ष होनी चाहिए। वहीं, बेदखल किए गए परिवारों को लागू नियमों के अनुसार राहत और पुनर्वास संबंधी विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए। प्रशासन की पारदर्शिता और समान कार्रवाई ही इन सवालों का संतोषजनक जवाब दे सकती है।