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नौकरशाही की असहिष्णुता का दुखद उदाहरण, नहीं बटा मसीही स्कूलों में वेतन

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     बिलासपुर/ शौर्यपथ /
आज क्रिसमस मनाया जा रहा है बहुत से नेता जिनमे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी शामिल है ने मसीह समाज को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी पर यह कैसा क्रिसमस एक तरफ हिंदूवादी संगठनों ने 24 तारीख को छत्तीसगढ़ बंद किया और त्योहार की चमक को फीका कर दिया इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ में सीडीबीई के 19 स्कूल ये 19 स्कूल ईसाई समाज के इनमें 100 साल पुरानी परंपरा की क्रिसमस के पहले वेतन दे दिया जाता है। पर यह परंपरा साय की नौकरशाही ने तोड़ दी, एक माह पूर्व इन स्कूलों पर शासन के आदेश से प्रशासक नियुक्त हुआ है तो वेतन के देयक उसके हस्ताक्षर से ही बैंक पहुंचेंगे 19 स्कूल अलग-अलग जिलों में है हर जिले के स्कूल प्राचार्यों ने वेतन बिल बनाकर सीडीबीई के कार्यालय रायपुर पहुंचाएं और वहां से हस्ताक्षर होने के लिए रायपुर एसडीएम के पास पहुंचे पर टाल मटोल करते हुए अधिकारियों ने हस्ताक्षर नहीं किये।
19 स्कूल में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिला और वे कर्मचारी जो क्रिश्चियन है घर का चूल्हा त्यौहार ठंडा हो गया। क्या इसे ही सब का साथ कहा जा सकता है। पहले क्रिसमस के पूरे सौहार्द पूर्ण वातावरण को हिंदू संगठनों द्वारा सुनियोजित तरीके से बिगड़ गया व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रखे क्रिसमस ट्री सांता क्लाज के स्टैचू को छती पहुंचाई गई 24 दिसंबर को ही छत्तीसगढ़ बंद रखा गया और अंतिम प्रहर की 19 स्कूलों का वेतन वितरण नहीं हुआ यह कैसी सरकार है।
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शौर्यपथ

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